दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण से श्वसन रोगों में वृद्धि, दवाओं का असर हुआ कम
एम्स के डॉक्टरों के अनुसार प्रदूषण के कारण मरीजों की दवाओं की खुराक बढ़ानी पड़ रही है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 4:54 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
दिल्ली-NCR क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर में निरंतर वृद्धि का गंभीर प्रभाव अब आम लोगों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। विशेष रूप से श्वसन तंत्र की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई मरीजों पर पुरानी दवाओं का असर नहीं हो रहा है, जिसके कारण डॉक्टरों को उनके उपचार में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए दिल्ली एम्स के पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सौरभ मित्तल ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने के कारण सांस के मरीजों में लक्षण अधिक गंभीर हो गए हैं। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण सामान्य दवाएं अब प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं। इस स्थिति से निपटने और मरीजों की हालत सुधारने के लिए डॉक्टरों को उनकी दवाओं की खुराक (डोज) बढ़ानी पड़ रही है। कुछ मामलों में मरीजों को दिए जाने वाले इनहेलर की खुराक बढ़ाने की जरूरत पड़ी है, जबकि कुछ मरीजों को पूरी तरह से नई दवाएं देनी पड़ रही हैं।
डॉ. सौरभ मित्तल के अनुसार, जो मरीज पहले से ही सांस की बीमारियों से लड़ रहे थे, उनकी तकलीफों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनकी खांसी और सांस लेने में होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए वर्तमान में उपचार पद्धति में बदलाव किया जा रहा है। कुछ गंभीर मरीजों के मामले में, इनहेलर की खुराक बढ़ाने के साथ उन्हें ओरल स्टेरॉयड यानी खाने वाली स्टेरॉयड दवाएं भी दी जा रही हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि इन मरीजों की समस्या इतनी बढ़ गई है कि वह सामान्य दवाओं से नियंत्रित नहीं हो रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब ऐसे लोग भी सांस संबंधी समस्याओं को लेकर डॉक्टरों से संपर्क कर रहे हैं, जिन्हें पहले कभी ऐसी कोई तकलीफ नहीं हुई थी। इन नए मरीजों में मुख्य रूप से खांसी, गले में जलन, नाक में जलन और सांस फूलने जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। ऐसे मरीजों को भी उनके लक्षणों के आधार पर उचित उपचार और राहत देने वाली दवाओं की आवश्यकता पड़ रही है, जो दर्शाता है कि प्रदूषण अब केवल बीमार लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों के लिए भी जोखिम बन गया है।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के कारणों के बारे में बात करते हुए डॉ. मित्तल ने स्पष्ट किया कि यह समस्या किसी एक दिन में या किसी एक कारण से पैदा नहीं हुई है। यह एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई कारक जिम्मेदार हैं। सर्दियों की शुरुआत में जब मौसम बदलता है और हवा में नमी की मात्रा बढ़ती है, तो प्रदूषण पैदा करने वाले कण जमीन के करीब जमा हो जाते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
इसके अलावा, अन्य मानव निर्मित कारण भी इस प्रदूषण में बड़ा योगदान देते हैं। वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं, निर्माण गतिविधियों के दौरान उड़ने वाली धूल और फसल कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की प्रक्रिया से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के स्तर को आसमान पर पहुंचा देता है। इन सभी कारणों के समन्वय से दिल्ली-NCR की हवा जहरीली हो रही है, जिसका सीधा असर लोगों के फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर पड़ रहा है।
आजतक (Aaj Tak) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं आया तो स्वास्थ्य संकट और बढ़ सकता है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में ये लक्षण अधिक तेजी से देखे जा रहे हैं, जिससे चिकित्सा क्षेत्र पर दबाव बढ़ गया है।
સ્થાનિક ચૂંટણીમાં બેલેટ પેપરના ઉપયોગ પર કર્ણાટકમાં રાજકીય વિવાદ
કેબિનેટની મંજૂરી બાદ કોંગ્રેસ સરકારના નિર્ણયનો ભાજપે વિરોધ કર્યો
गर्मियों में बिजली कटौती रोकने के लिए सरकार ने कोयले के स्टॉक को तीन गुना करने का निर्देश दिया
मार्च तक पावर प्लांटों में कोयले का भंडार 18 मिलियन टन से बढ़ाकर 55 मिलियन टन करने का लक्ष्य
दिल्ली के करौल बाग के गफ्फार मार्केट में भीषण आग, 22 फायर टेंडर तैनात
शुक्रवार सुबह पुरी प्लाजा की एक दुकान में आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई