सुप्रीम कोर्ट का आदेश: बंधुआ मजदूरों को 7 दिन में आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए
सरकार ने बंधुआ मजदूरी उन्मूलन के लिए योजना में सुधार कर समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, रात 10:58 · अपडेट रात 11:05 · 3 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए लोगों के पुनर्वास और आर्थिक सहायता के लिए महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया है कि बंधुआ मजदूरों को मुक्त करना राज्य की जिम्मेदारी का अंत नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर संवैधानिक कर्तव्य है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि मुक्ति के 7 दिन के भीतर आर्थिक सहायता की राशि लाभार्थियों को मिल जाए, ऐसी समान प्रक्रिया तैयार की जाए।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश दो याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया गया है, जिसमें एक याचिका बंधुआ मजदूरी से मुक्त हुए व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी। याचिकाओं में आर्थिक सहायता में होने वाली देरी और पहचान तथा पुनर्वास की प्रक्रिया में मौजूद खामियों पर प्रकाश डाला गया था। कोर्ट ने नोट किया कि बंधुआ मजदूरी उन्मूलन के कानूनी कदम केवल कागज पर सीमित नहीं रहने चाहिए। मुक्त कराए गए लोगों के लिए गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए जरूरी शर्तें पूरी करना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।
केंद्र सरकार ने 14 मई को बंधुआ मजदूरी के मामलों के लिए संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने की जानकारी दी थी। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 6 महीने के भीतर यह SOP लागू करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) के साथ परामर्श करके 3 महीने में पूरक दिशानिर्देश जारी करने के लिए भी केंद्र को कहा गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बंधुआ मजदूरी की शिकायतों का सत्यापन सामान्य रूप से 24 घंटे में होना चाहिए और उसके बाद तत्काल बचाव कार्य शुरू करना चाहिए। पहचान होने के बाद सक्षम अधिकारी को 24 घंटे में मुक्ति प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है।
अन्य राज्यों से मुक्त कराए गए मजदूरों को होने वाली परेशानियों और भाषा की बाधाओं को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया लाभार्थियों के लिए सुलभ होनी चाहिए। मुक्त कराए गए लोगों की भाषा में ही उन्हें उनके अधिकारों और पुनर्वास के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। अंतर-राज्य समन्वय मजबूत करने के लिए राज्यों को 6 महीने में नोडल ऑफिसर की नियुक्ति करने और बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम, 1976 के तहत जिला और उप-विभागीय स्तर पर सतर्कता समितियां गठित करने का आदेश दिया गया है।
कोर्ट ने पुलिस और अन्य अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण देने पर जोर दिया है। यदि कानूनी कर्तव्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक विफलता देखी जाएगी, तो उस पर जांच की जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया है कि वे मुक्त कराए गए लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के तहत रोजगार और आजीविका के अवसर प्रदान करें। कोर्ट ने केंद्र को 4 महीने में अनुपालन रिपोर्ट और राज्यों को 6 महीने में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 7 महीने बाद की जाएगी।
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