लद्दाख की बंजर जमीन पर लाल सोना: 30 दिनों में खिले केसर के फूल, चार दिनों में 22 ग्राम उत्पादन
लेह में प्रायोगिक आधार पर शुरू की गई केसर की खेती रंग लाई, मात्र एक महीने में ही फूल खिल गए।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, सुबह 2:41 · अपडेट रात 8:20 · 5 मिनट का पाठ
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अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, लद्दाख की बंजर जमीन पर की गई केसर की खेती का प्रयोग अपने प्रारंभिक चरण में ही अत्यंत सफल साबित हो रहा है। लेह जिले की बंजर जमीन पर शुरू की गई केसर की इस प्रायोगिक खेती में मात्र चार दिनों के भीतर ही लगभग 22 ग्राम शुद्ध केसर का उत्पादन दर्ज किया गया है। पूरे मामले की सबसे खास बात यह है कि यहाँ केसर के फूल सामान्य समय की तुलना में लगभग एक महीना पहले ही खिलने लगे हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने रविवार को इस उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि लद्दाख में केसर के पहले फूल मात्र 30 दिनों की संक्षिप्त अवधि में ही खिल उठे हैं, जबकि सामान्यतः इस प्रक्रिया में लगभग दो महीने का समय लगता है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने स्वयं स्पितुक फरका में स्थित केसर के खेत का व्यक्तिगत दौरा किया और वहां जाकर इन फूलों का निरीक्षण किया।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वपूर्ण प्रायोगिक परियोजना की शुरुआत गत 2 अक्टूबर को की गई थी। इस योजना के अंतर्गत लेह जिले के स्पितुक फरका क्षेत्र में पहले से ही बंजर पड़ी लगभग 4,000 वर्ग मीटर जमीन का उपयोग किया गया था। इस जमीन पर ईरान देश से विशेष रूप से मंगवाए गए लगभग 90 हजार उच्च गुणवत्ता वाले केसर के कंदों का रोपण किया गया था। इन सभी कंदों का कुल वजन लगभग 800 किलोग्राम है। इन कंदों का चयन विशेष रूप से लद्दाख के ऊंचाई वाले भौगोलिक क्षेत्र और वहां की जलवायु परिस्थितियों को पूरी तरह ध्यान में रखकर ही किया गया था।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, उपराज्यपाल सक्सेना ने आगे बताया कि इन खेतों में प्रतिदिन औसतन 20 से 25 फूल खिल रहे हैं, जबकि एक ही सुबह में 72 फूल दर्ज किए गए थे। इस खेत से मात्र शुरुआती चार दिनों की संक्षिप्त अवधि में ही लगभग 22 ग्राम शुद्ध केसर एकत्र कर लिया गया है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, उपराज्यपाल सक्सेना ने अपने बयान में कहा कि यह अद्भुत प्रयोग लद्दाख के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कृषि क्षेत्र की बिल्कुल नई संभावनाओं के द्वार खोलता है। इससे भविष्य में केसर की इस खेती का बड़े स्तर पर विस्तार किया जा सकेगा। इसके अलावा, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, कृषि आधारित नए उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को एक नई मजबूती मिलने की पूरी आशा है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए लद्दाख के कृषि विभाग के साथ-साथ वहां के समर्पित और मेहनती फील्ड स्टाफ के कार्य की बहुत प्रशंसा की और कहा कि यह पहल 'आत्मनिर्भर लद्दाख' के महत्वपूर्ण लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए अत्यंत कारगर और महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
अमर उजाला में प्रकाशित अंग्रेजी विवरण के अनुसार, लेह में हाल ही में पुनर्स्थापित की गई खराब जमीन पर प्रायोगिक केसर की खेती शुरू की गई है, जिसने लद्दाख के ऊंचाई वाले कृषि परिदृश्य में एक नया इतिहास रच दिया है। सामान्यतः पहला फूल खिलने में दो महीने का समय लगता है, इसके मुकाबले यहाँ रिकॉर्डतोड़ 30 दिनों के समय में ही फूल खिल गए हैं। उपराज्यपाल द्वारा इस खेत का दौरा करके पहले फूल खिलने के क्षण को देखा गया। यहाँ प्रतिदिन औसतन 20 से 25 फूल खिलते हैं और एक सुबह 72 फूल खिले थे। मात्र 04 दिनों में लगभग 22 ग्राम शुद्ध केसर एकत्र किया गया है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह उल्लेखनीय उपलब्धि हमारे पर्यावरण की लचीलापन और इस क्षेत्र में ऊंचाई पर होने वाली खेती की अपार और अब तक अनछुई क्षमता का एक शक्तिशाली प्रमाण है। यह सफल breakthrough व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन के लिए एक आशाजनक आधार रखता है, जो लद्दाख में खेती और कृषि-आधारित उद्यमिता के लिए नए रास्ते खोलेगा और एक मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए UT लद्दाख के कृषि विभाग और हमारे समर्पित फील्ड स्टाफ के प्रति गहरी प्रशंसा और बधाई दी गई है।
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