रूस में नौकरी करने गए आंध्र के युवक को सेना में भर्ती कर यूक्रेन सीमा पर भेजा गया
नेपाली नागरिक के भरोसेमंद वादों में फंसकर फंसे भारतीय युवकों ने भारत सरकार से सुरक्षित वापस आने के लिए मदद मांगी है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
3 नवंबर 2026, सुबह 2:10 · अपडेट सुबह 9:43 · 5 मिनट का पाठ
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आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में रहने वाले एक युवक को रूस में नौकरी दिलाने का झांसा देकर रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया है और अब उस पर यूक्रेन सीमा पर युद्ध के मैदान में भेजे जाने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना को लेकर युवक की मां ने केंद्र और राज्य सरकार से अपने पुत्र को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए भावुक अपील की है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, विशाखापट्टनम निवासी जे. वामसी रोजगार की तलाश में रूस गए थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनके साथ धोखाधड़ी होने की बात सामने आई है।
वामसी की मां जे. अप्पलाकोंडा ने इस संबंध में विवरण देते हुए बताया कि उनका बेटा रूस में फ्रूट पैकिंग की नौकरी करने के इरादे से गया था। उसे वहां फ्रूट पैकिंग का काम मिलने की उम्मीद थी, लेकिन रूस पहुंचने के बाद उसे किसी भी प्रकार की नौकरी नहीं मिल सकी। इस कठिन समय के दौरान वामसी की मुलाकात एक नेपाली नागरिक से हुई थी। इस नेपाली नागरिक ने वामसी को यूक्रेन में बहुत अच्छी सैलरी वाली नौकरी दिलाने का पक्का भरोसा दिया था। वामसी इन वादों में आ गए और उस व्यक्ति के साथ रूस में आगे बढ़े, लेकिन अंततः उन्हें रूसी सेना में शामिल कर लिया गया।
अपने पुत्र के जीवन के खतरे और उसकी अनुपस्थिति के कारण मां अप्पलाकोंडा अत्यंत चिंतित और परेशान हैं। उन्होंने इस संकट की घड़ी में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और आईटी मंत्री नारा लोकेश से मदद की अपील की है। अप्पलाकोंडा ने अत्यंत भावुक होकर कहा, "मुझे बस मेरा बेटा वापस चाहिए। मेरे पास और कुछ नहीं है। मुझे और कुछ नहीं चाहिए, बस मेरा बेटा सुरक्षित वापस आ जाए तो बहुत हैों।" उन्होंने आगे बताया कि उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री है और उनके पति का भी निधन हो चुका है, जिसके कारण पुत्र की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता और बढ़ गई है।
इस पूरे मामले को लेकर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वामसी होने का दावा करने वाला एक युवक अन्य चार भारतीयों के साथ मिलकर अपनी मुश्किलें बता रहा है। इस वीडियो में सभी युवकों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे रूस में नौकरी करने गए थे, लेकिन उन्हें धोखा देकर रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया है। अब उन्हें रूस और यूक्रेन के बीच की सीमा पर युद्ध के मोर्चे पर भेजा जा रहा है। वीडियो में युवकों ने कहा है कि वे अभी बहुत खतरे में हैं और कभी भी उनके साथ कोई अनहोनी घटना हो सकती है।
वीडियो में वामसी होने का दावा करने वाले युवक ने एक अत्यंत गंभीर बात का भी खुलासा किया है। उसके अनुसार, उन्हें इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि उन्हें रूसी नागरिकता दे दी गई है। जब उन्होंने अपनी नागरिकता के बारे में पूछताछ की, तो उन्हें बताया गया कि अब वे भारतीय नागरिक नहीं बल्कि रूसी नागरिक बन गए हैं। युवक ने जोर देकर कहा कि वे केवल भारतीय नागरिकता ही रखना चाहते थे और उन्हें रूसी नागरिकता लेने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। यदि उन्हें इस बात की पहले से जानकारी होती, तो वे कभी इसके लिए तैयार नहीं होते।
युवकों ने यह भी आरोप लगाया है कि उनसे रूसी भाषा में लिखे गए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए थे। इन दस्तावेजों में क्या लिखा था, इसकी उन्हें कोई समझ या जानकारी नहीं थी। रूसी भाषा न आने के कारण वे दस्तावेजों का अर्थ नहीं समझ सके और अब उन्हें युद्ध के मैदान में भेजने की तैयारियां की जा रही हैं। वीडियो में युवक अत्यंत घबराहट में कह रहे थे कि उन्हें नहीं पता कि अब उनके साथ आगे क्या होगा, और उन्हें संदेह है कि ये उनके जीवन के अंतिम शब्द भी हो सकते हैं। इन सभी युवकों ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वे तत्काल हस्तक्षेप करें और उन्हें सुरक्षित घर वापस लाएं।
यह मामला सामने आने के बाद आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने भी इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस संबंध में पोस्ट करते हुए कहा कि विदेश में फंसे भारतीयों की स्थिति देखकर बहुत दुख होता है। लोकेश ने इस मामले में तत्काल कदम उठाने के लिए अपने कार्यालय को संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने और प्रभावित लोगों की मदद के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि इन युवकों की सुरक्षित और त्वरित वापसी सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।
यह घटना रूस में नौकरी के लिए जाने वाले भारतीयों के लिए एक बड़ी चेतावनी है, जहां नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी करके युवाओं को युद्ध के मैदान में धकेल दिया जाता है। वर्तमान में ये युवक रूस-यूक्रेन सीमा के खतरनाक क्षेत्र में फंसे हुए हैं और अपनी सुरक्षा के लिए भारत सरकार के हस्तक्षेप की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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