बाजार में पांच दिनों की तेजी के बावजूद VIX ऊंचा, वैश्विक जोखिमों से निवेशकों में चिंता
शेयर बाजार में लगातार पांच दिनों की बढ़त के बीच भी वोलेटिलिटी इंडेक्स 15 के आसपास स्थिर है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, रात 11:41 · अपडेट दोपहर 3:14 · 4 मिनट का पाठ
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भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला देखा जा रहा है, लेकिन वोलेटिलिटी इंडेक्स (VIX) अभी भी 15 पॉइंट के आसपास रहने से निवेशकों में पूर्ण निश्चिंतता नहीं देखी गई है। आगामी 30 दिनों में बाजार में कितनी अस्थिरता आ सकती है इसका पैमाना माने जाने वाले इस 'फियर गेज' में अक्टूबर के अंत में दर्ज किए गए 17 के स्तर से गिरावट आई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के कारण यह अभी भी ऊंचे स्तर पर है।
वर्ष की शुरुआत से अब तक निफ्टी 50 में लगभग 8% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि VIX में 65.4% का बड़ा उछाल देखा गया है। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि हाल ही में इक्विटी में सुधार होने के बावजूद निवेशकों में चिंता का स्तर अधिक है।
बुधवार को बाजार में तेजी देखी गई, जिसमें सेंसेक्स 383 पॉइंट या 0.5% बढ़कर 77,301 के स्तर पर बंद हुआ। उसी समय निफ्टी 50 149 पॉइंट या 0.6% की बढ़त के साथ 23,960 पर स्थिर हुआ। इस प्रकार बाजार में लगातार पांचवें सत्र में सुधार देखा गया। हालांकि, इस तेजी में इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) शेयरों में देखी गई कमजोरी के कारण थोड़ा अवरोध आया था। निफ्टी IT इंडेक्स 1.5% गिरकर 32,061 पर आ गया था और सत्र के दौरान यह 3% तक नीचे गया था, जिससे बाजार के व्यापक सेंटीमेंट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार के अनुसार, VIX मूल रूप से बाजार में अस्थिरता की संभावना का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि बाजार में तेजी आ रही है लेकिन निवेशक विभिन्न कारणों से गिरावट से डर रहे हैं। क्रूड ऑयल का संकट, पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष, यूएस के चुनाव परिणाम और ट्रंप की प्रतिक्रिया, ये सभी बातें वैश्विक निवेशकों की चिंता को बढ़ा रही हैं।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने एक नोट में बताया कि, यूएस मिडटर्म चुनावों के बाद निवेशकों का ध्यान पश्चिम एशिया को लेकर यूएस प्रशासन के आगामी कदमों पर केंद्रित होगा। पश्चिम एशिया में किसी भी बढ़ती तनाव की स्थिति या राजनयिक प्रगति का अल्पकालिक रूप से क्रूड ऑयल की कीमतों और वैश्विक बाजार के सेंटीमेंट पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
सितंबर तिमाही के मजबूत कॉर्पोरेट परिणामों ने स्थानीय इक्विटीज को सहारा दिया है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संबंधित शेयरों में बढ़े हुए मूल्यांकन के कारण निवेश के आवंटन में पुनर्मूल्यांकन हो रहा है, जिससे वैश्विक पूंजी के प्रवाह में भारत की ओर बदलाव हो सकता है। पिछले दो वर्षों में AI के कारण आई तेजी ने दक्षिण कोरिया, ताइवान और यूएस जैसे बाजारों में महत्वपूर्ण विदेशी पूंजी आकर्षित की थी, जिससे भारत की ओर पूंजी प्रवाह में कमी आई थी।
क्रूड ऑयल भी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें पिछले शुक्रवार को दर्ज किए गए छह महीने के उच्च स्तर $118 प्रति बैरल से घटकर बुधवार को $104 पर ट्रेड कर रही थीं, जो 0.7% की वृद्धि दर्शाता है। निवेशक यूएस चुनाव के घटनाक्रम और यूएस-ईरान संघर्ष पर नजर रख रहे हैं। रिलायगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा ने बताया कि, बाजार के पूरी तरह सुधरने के लिए क्रूड को वर्तमान स्तर पर या $100 प्रति बैरल से नीचे टिके रहना होगा। यदि AI में मंदी आती है तो अब तक की बढ़त के लिए जोखिम खड़ा हो सकता है।
वोलेटिलिटी इंडेक्स (VIX) बाजार में आगामी 30 दिनों के लिए अपेक्षित अस्थिरता का पैमाना था। यह बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव की संभावना को दर्शाता था।
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