बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जैव विविधता में वृद्धि, गौर और हाथियों की संख्या बढ़ी
वन विभाग के संरक्षण प्रयासों के कारण गिद्ध और बारासिंगा के पुनरुद्धार पर भी जोर
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:58 · अपडेट सुबह 3:07 · 3 मिनट का पाठ
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मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों से वन्यजीव संरक्षण की एक अत्यंत सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। दिवाली के अवसर पर प्राप्त जानकारी के अनुसार, यहाँ गौर, हाथियों और गिद्धों की बढ़ती उपस्थिति जंगलों की जैव विविधता को और अधिक समृद्ध बना रही है। वन विभाग द्वारा वन्यजीवों को सुरक्षित आवास प्रदान करने और उन्हें प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
आज की रिपोर्ट के अनुसार, बांधवगढ़ में एक समय स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुके वन्यजीवों की वापसी को संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप न केवल जंगलों में वन्यजीवों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि इससे समग्र पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करने में भी बड़ी मदद मिल रही है।
जैव विविधता के संदर्भ में गौर की वापसी को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। संरक्षण और पुनरुद्धार के गहन प्रयासों के बाद, गौर अब फिर से प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। उनकी बढ़ती उपस्थिति से वन पारिस्थितिकी और जैव विविधता को नई मजबूती मिल रही है।
हाथियों के संदर्भ में बात करें तो, वर्ष 2018 में बांधवगढ़ पहुंचे हाथियों ने धीरे-धीरे यहाँ के जंगलों को अपने नए आवास के रूप में अपना लिया है। समय के साथ ये हाथी स्थानीय वातावरण में पूरी तरह ढल गए हैं और आज वे बांधवगढ़ की वन्यजीव दुनिया का एक अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।
पर्यावरण की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गिद्धों की उपस्थिति भी दर्ज की गई है। गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है, क्योंकि वे मृत जीवों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं और पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं। बांधवगढ़ की सुरक्षित चट्टानें और जंगल उन्हें अनुकूल आश्रय प्रदान कर रहे हैं। संरक्षण और सुरक्षित आवास के प्रयास उनके अस्तित्व को बनाए रखने में बहुत सहायक सिद्ध हुए हैं।
इसके अलावा, बांधवगढ़ में बारासिंगा की वापसी के लिए भी विशेष पहल की जा रही है। इस योजना के तहत कान्हा टाइगर रिजर्व से बारासिंगा लाकर यहाँ एक सुरक्षित बाड़े में रखा गया है। वन विभाग द्वारा उन्हें नए वातावरण के अनुकूल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल को भविष्य में उनके लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गौर, हाथी, गिद्ध और बारासिंगा से जुड़ी ये सभी पहल दर्शाती हैं कि निरंतर संरक्षण प्रयासों और सुरक्षित आश्रयों के माध्यम से वन्यजीवों को फलने-फूलने के लिए नए अवसर मिल सकते हैं। इससे बांधवगढ़ की प्राकृतिक समृद्धि बढ़ने के साथ-साथ प्रकृति पर्यटन की संभावनाओं को भी एक नई दिशा मिल सकती है।
दिवाली के इस अवसर पर बांधवगढ़ के जंगलों के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि यदि वन्यजीवों को सुरक्षित आश्रय और अनुकूल वातावरण मिले, तो जंगलों में जीवन और जैव विविधता दोनों एक साथ समृद्ध हो सकते हैं। वन विभाग के इन प्रयासों से अब जंगली जीवों के लिए वातावरण अधिक सुरक्षित हो गया है।
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