भारत में 2026 तक 80 से 85 प्रतिशत ऑफिस लीजिंग ग्रीन स्पेस में होगी
कंपनियां अब ऊर्जा दक्षता और स्थिरता वाली प्रमाणित इमारतों को प्राथमिकता दे रही हैं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 1:10 · अपडेट दोपहर 1:23 · 3 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
भारत के प्रमुख शहरों में पर्यावरण के अनुकूल या ग्रीन ऑफिस स्पेस की मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। कोलियर्स इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के शीर्ष सात शहरों में कुल ऑफिस लीजिंग में ग्रीन ऑफिस स्पेस की हिस्सेदारी 2026 तक 80 प्रतिशत को पार कर जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में टिकाऊ ऑफिस इमारतों में लीजिंग 60-65 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंचने की संभावना है, जो कुल ऑफिस लीजिंग के 80-85 प्रतिशत हिस्से के बराबर होगा। यह रुझान लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि 2023 में यह हिस्सेदारी 74 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 76 प्रतिशत हो गई थी। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कंपनियां अब मान्यता प्राप्त स्थिरता प्रमाण पत्र वाली इमारतों की ओर अधिक आकर्षित हो रही हैं।
इस प्रकार की ऑफिस इमारतें LEED, IGBC और GRIHA जैसे ढांचे के तहत प्रमाणित होती हैं। इन इमारतों का निर्माण संसाधन दक्षता में सुधार करने, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और कार्यस्थल की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किया जाता है। LEED (लीडरशिप इन एनर्जी एंड एनवायरनमेंटल डिजाइन), IGBC (इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल) और GRIHA (ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट) प्रसिद्ध ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणन प्रणाली हैं। ये प्रणालियाँ ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, संसाधनों के उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे मानदंडों पर इमारतों का मूल्यांकन करती हैं और टिकाऊ निर्माण एवं संचालन को बढ़ावा देती हैं।
रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, 2026 में नए ऑफिस सप्लाई में टिकाऊ इमारतों की हिस्सेदारी 75-80 प्रतिशत रहेगी, जिससे 45-50 मिलियन स्क्वायर फीट जगह जुड़ेगी। अगले दो से तीन वर्षों में, ऐसी इमारतों का कुल स्टॉक वर्तमान 600-650 मिलियन स्क्वायर फीट से बढ़कर लगभग 800 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के अंत तक ग्रीन-सर्टिफाइड ऑफिस स्टॉक लगभग 636 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंचने की उम्मीद है, जो ग्रेड A ऑफिस इन्वेंट्री का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा होगा।
इसके अलावा, 2023-2026 के दौरान कुल ऑफिस स्पेस की मांग के लगभग तीन-चौथाई हिस्से के ऐसी टिकाऊ इमारतों में केंद्रित होने की उम्मीद है। शीर्ष सात ऑफिस बाजारों में, इस अवधि के दौरान कुल 275 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग में से टिकाऊ संपत्तियों में लगभग 210 मिलियन स्क्वायर फीट लीजिंग होने का अनुमान है।
शहरों की बात करें तो, बेंगलुरु टिकाऊ ऑफिस इमारतों के लीजिंग वॉल्यूम में सबसे आगे है। 2023-2026 के दौरान यहाँ 59 मिलियन स्क्वायर फीट जगह ली गई है, जो शीर्ष सात बाजारों की कुल लीजिंग का 28 प्रतिशत है। दूसरी ओर, दिल्ली NCR में ऐसी संपत्तियों की मांग का सबसे अधिक हिस्सा दर्ज किया गया है, जहाँ कुल ऑफिस लीजिंग का 85-90 प्रतिशत टिकाऊ इमारतों में केंद्रित है। हैदराबाद 80-85 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि टेक्नोलॉजी कंपनियां इस रुझान की सबसे बड़ी प्रेरक हैं। टिकाऊ ऑफिस इमारतों की कुल लीजिंग में टेक कंपनियों की हिस्सेदारी 30-35 प्रतिशत है। उल्लेखनीय है कि टेक्नोलॉजी क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत किराएदार LEED और GRIHA जैसे प्रमाण पत्र वाली संपत्तियों को चुनते हैं।
ન્યુઝીલેન્ડ સામે ટેસ્ટ શ્રેણી પૂર્વે બુમરાહ અને જાડેજા ઈન્ડિયા એ ટીમમાં સામેલ થશે
લિંકન ખાતે શનિવારથી શરૂ થતી ન્યુઝીલેન્ડ એ સામેની અંતિમ ચાર-દિવસીય મેચમાં દિગ્ગજ ખેલાડીઓ રમશે
BCI ने लॉ कोर्स के लिए आयु सीमा हटाई, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया
3 वर्ष और 5 वर्ष के LLB कोर्स में अब उम्र का कोई बंधन नहीं रहेगा
સીબીઆઈએ કિશોર બિયાણી અને ફ્યુચર રિટેલ સામે ₹૯૦૪ કરોડની છેતરપિંડીનો કેસ દાખલ કર્યો
સ્ટેટ બેંક ઓફ ઈન્ડિયાની ફરિયાદ બાદ સીબીઆઈએ મુંબઈમાં સર્ચ ઓપરેશન હાથ ધર્યું