मेटल फिल्टर जलाने की घटना के खिलाफ गुरुग्राम के निवासियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की शिकायत
क्लीनएयरभारत समूह ने आवासीय क्षेत्रों में स्क्रैप डीलरों द्वारा की जा रही खुले में दहन की कार्रवाई की मांग की
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 3:56 · 3 मिनट का पाठ
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गुरुग्राम और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में स्क्रैप डीलरों द्वारा मेटल फिल्टर और कबाड़ सामग्री को खुले में जलाया जा रहा है। इस घटना के खिलाफ आवाज उठाते हुए 'क्लीनएयरभारत' नामक निवासी समूह ने प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरणों को पत्र लिखकर इस प्रथा को रोकने के लिए एकीकृत कार्रवाई की मांग की है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस समूह ने 4 नवंबर को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) को पत्र लिखा था। पत्र में उल्लेख किया गया है कि 4 नवंबर को सेक्टर-52ए में फ्यूल नेशन पेट्रोल पंप के पास एक स्वयंसेवक ने ऐसी घटना का दस्तावेजीकरण किया था। इसके अलावा सेक्टर 55, 85, 52, नवादा, मानेसर, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी ऐसी ही प्रथाएं देखी गई हैं।
समूह का कहना है कि इस तरह सामग्री जलाने से हवा में जहरीला धुआं और खतरनाक कण निकलते हैं, जिसके कारण वहां काम करने वाले मजदूरों और आसपास के परिवारों को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। क्लीनएयरभारत की सदस्य और गुरुग्राम की निवासी रुचिका सेठी ने बताया कि, "निवासी हमेशा सतर्क रहकर इन आग की घटनाओं की निगरानी और दस्तावेजीकरण नहीं कर सकते।"
पत्र में शिकायत की गई है कि 9 और 31 अक्टूबर को नगर निगम गुरुग्राम (MCG) से सेक्टर 52, आरडी सिटी और साई का आंगन की ओर कचरा जलाने के हॉटस्पॉट्स की जांच करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। समूह ने मांग की है कि MCG और HSPCB द्वारा तत्काल संयुक्त निरीक्षण किया जाए और खुले में दहन पर प्रतिबंध लगाया जाए।
इसके अलावा, आवासीय क्षेत्रों में या उनके आसपास कार्यरत स्क्रैप डीलरों और अनौपचारिक सामग्री-रिकवरी इकाइयों की मैपिंग कर उन्हें अधिकृत रीसाइक्लिंग चैनलों से जोड़ने की मांग की गई है। समूह ने जोर देकर कहा कि यह कोई एक बार का उल्लंघन नहीं है बल्कि एक बार-बार होने वाली प्रथा है, इसलिए इसे रोकने के लिए केवल शिकायत की स्वीकृति या छिटपुट निरीक्षण के बजाय एक व्यवस्थित समाधान की आवश्यकता है। निवासियों का मानना है कि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने का काम स्वयंसेवक कर सकते हैं, लेकिन उत्सर्जन रोकने और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी नागरिक और प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरणों की है। इस संबंध में अधिकारियों से प्रस्तावित कार्रवाई पर प्रतिक्रिया मांगी गई है।
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