दिल्ली में प्रदूषण का खतरा बढ़ा, AQI 'खराब' श्रेणी में बरकरार
GRAP के कार्यान्वयन के बावजूद हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है और सरकारी एजेंसियों की लापरवाही से धूल-धुआं बढ़ रहा है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
29 अक्टूबर 2026, सुबह 11:58 · अपडेट सुबह 9:54 · 6 मिनट का पाठ
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दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सर्दियों के दौरान बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों के बीच हवा की गुणवत्ता में कोई निरंतर सुधार नहीं देखा जा रहा है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में दिल्ली की सर्दियों की हवा की गुणवत्ता में कोई निरंतर सुधार नहीं हुआ है। CREA ने सरकारी डेटा के विश्लेषण के माध्यम से बताया है कि दिल्ली का सर्दियों का AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) पिछले चार वर्षों में लगातार उतार-चढ़ाव भरा रहा है। औसत AQI वर्ष 2022-23 के 280 से बढ़कर 2023-24 में 304 हुआ, जिसके बाद 2024-25 में 285 पर आया और 2025-26 में फिर बढ़कर 295 हुआ। इसी तरह मीडियन AQI भी 294 से बढ़कर 324 हुआ, 289 पर घटा और फिर 305 हुआ। CREA के विश्लेषक मनोज कुमार ने बताया कि 2022 में GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) में सुधार के बाद दिल्ली की सर्दियों की हवा की गुणवत्ता में कोई निरंतर गिरावट का रुझान नहीं देखा गया है।
दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर को GRAP के स्टेज-1 को लागू किया था। यदि प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है तो कड़े नियंत्रण लागू किए जाएंगे। पिछले डेटा पर नजर डालें तो, स्टेज-4 के कार्यान्वयन के बाद अक्सर AQI में गिरावट देखी गई है। उदाहरण के लिए, 17 जनवरी 2026 को AQI 400 था, जो एक सप्ताह में घटकर 192 हो गया। नवंबर 2023 में भी यह 454 से घटकर 218 हुआ था। हालांकि, ऐसा हर बार नहीं होता है। दिसंबर 2024 में स्टेज-4 लागू होने के एक सप्ताह बाद AQI 379 से बढ़कर 406 हो गया था। सात मामलों के विश्लेषण के अनुसार, पांच मामलों में AQI में महत्वपूर्ण गिरावट आई, एक मामले में केवल 33 पॉइंट की गिरावट (431 से 398) हुई और एक मामले में AQI बढ़ा।
प्रदूषण के मुख्य कारणों में केवल खेतों में कचरा जलाना ही नहीं, बल्कि अन्य कारक भी शामिल हैं। मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंसेज के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के अनुसार, दिल्ली के आसपास के शहरों से आने वाला प्रदूषण PM2.5 प्रदूषण में 37 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जो सबसे बड़ा कारण है। वाहन दूसरे सबसे बड़े प्रदूषक हैं जो 20.8 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जबकि खेतों में कचरा जलाने से 10.9 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है। अतः, क्षेत्रीय प्रदूषण और परिवहन कृषि कचरे की तुलना में अधिक प्रभावशाली साबित हुए हैं। वाहनों के उत्सर्जन को रोकने के लिए दिल्ली में 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 के दौरान भारत स्टेज-VI उत्सर्जन मानकों से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, 29 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का AQI 229 था और 39 मॉनिटरिंग स्टेशन 200 से ऊपर थे। उत्तम नगर, मुंडका और द्वारका सेक्टर 8 में 'वेरी पूअर' (बहुत खराब) गुणवत्ता दर्ज की गई थी। सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के डेटा के अनुसार, बुधवार सुबह 6 बजे 58 में से 42 स्टेशनों पर PM2.5 मुख्य प्रदूषक था, जबकि 15 स्टेशनों पर PM10 मुख्य प्रदूषक था। मौसम में बदलाव के साथ प्रदूषण भी बदलता है; मंगलवार शाम को AQI 197 था जो शाम तक 'पुअर' श्रेणी में पहुंच गया था।
खेतों में कचरा जलाने की घटनाओं के संबंध में NASA के सैटेलाइट डेटा के अनुसार, 1 से 27 अक्टूबर के दौरान पंजाब और हरियाणा में 767 आग की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें पंजाब में 661 और हरियाणा में 106 थीं। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 1,048 से कम है। लेकिन iFOREST के रिसर्च ग्रुप के अनुसार, यह आंकड़ा कम हो सकता है क्योंकि अब खेतों में कचरा जलाने का समय बदल गया है। Meteosat और INSAT-3DS सैटेलाइट का डेटा दर्शाता है कि 2025 में 98 से 99 प्रतिशत आग की घटनाएं दोपहर 3 बजे के बाद दर्ज की गईं, जबकि NASA का सैटेलाइट दोपहर 1:30 बजे गुजरता है, जिसके कारण वास्तविक संख्या कम दिखाई देती है।
दूसरी ओर, प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार सरकारी एजेंसियों जैसे MCD, NDMC और PWD की लापरवाही के कारण भी हवा की गुणवत्ता जहरीली हो रही है। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। सिविक सेंटर के पास टैगोर रोड पर चार महीने से निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन वहां मलबा और गड्ढे पड़े हैं। दरियागंज में फुटपाथ पर निर्माण के दौरान रेत और मलबा खुले में पड़ा है। दिल्ली गेट के पास भी गड्ढों और मलबे से सड़कें भरी हुई हैं। फिरोजशाह रोड पर ट्रकों द्वारा मिट्टी खुली छोड़ी जाती है जिससे धूल उड़ती है। शिव विहार में भी कचरा जलाने की घटनाएं लगातार जारी हैं, जिससे काला धुआं फैलता है।
मौसम विभाग (IMD) के डेटा के अनुसार, दिल्ली में तापमान में भी गिरावट आई है। बुधवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 15.7°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.4 डिग्री कम है। अयनगर में सबसे कम तापमान 14.8°C दर्ज किया गया, जबकि सफदरजंग में 15.7°C था। पालम में 15.5°C और लोधी रोड में 16.2°C तापमान था। तापमान घटने के कारण प्रदूषण की स्थिति और गंभीर होती जा रही है। CAQM ने पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ बैठक आयोजित कर खेतों में कचरा जलाने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं और ड्रोन तथा सेंसर के माध्यम से निगरानी रखने को कहा है।
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