जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गर्माहट, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद का इस्तीफा मंजूर
लोकसभा सचिवालय द्वारा अधिसूचना जारी, तीन दिन पहले पार्टी से नाराज होकर छोड़ी थी नेका।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:11 · 3 मिनट का पाठ
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जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है और इस घटनाक्रम के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेका) के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी द्वारा दिए गए इस्तीफे को अध्यक्ष द्वारा 03 नवंबर, 2026 से स्वीकार कर लिया गया है। इस पूरे मामले में लोकसभा सचिवालय की तरफ से आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। सांसद के इस इस्तीफे के बाद अब यह लोकसभा सीट खाली हो गई है।
आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने इसके तीन दिन पहले ही नाराजगी व्यक्त करके पार्टी छोड़ दी थी और बाद में लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था। पार्टी छोड़ते वक्त रूहुल्लाह ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की काम करने की पद्धति पर बहुत तीखे प्रहार किए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री जिस कुर्सी पर विराजमान हैं, वह केवल उनके अपने लिए ही नहीं बल्कि आम जनता अर्थात अवाम के लिए भी मुसीबत और दुख का कारण बन गई है। उन्होंने कड़ी टिप्पणी करते हुए यह भी बताया था कि उमर अब्दुल्ला को अपनी टोपी और वकार (आबरू) अन्य लोगों के पैरों में धरने की कोई भी आवश्यकता नहीं थी।
इस मामले में अपनी नाराजगी और कड़वाहट व्यक्त करते हुए उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की थी कि सत्ता प्राप्त करने के लिए कभी ऐसी लाचारी न देखनी पड़े कि अपनी टोपी ही फेंकने की नौबत आए। रूहुल्लाह ने चुनौती देते हुए यह भी कहा था कि यदि असली इज्जत और स्वाभिमान किसे कहा जाता है यह देखना हो तो बड़गाम आकर प्रत्यक्ष देखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री को अक्षम अर्थात ना-अहल बताने के साथ-साथ रूहुल्लाह मेहदी ने पार्टी के सुप्रीमो डॉ. फारूक अब्दुल्ला को भी अपने निशाने पर लिया था। उन्होंने कहा था कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला को अपने पुत्र को कुरान की तालीम देनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने विधानसभा चुनाव पूरे होने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी के डर से अनुच्छेद 370 के स्टैंड के ऊपर यू-टर्न ले लिया था।
दूसरी तरफ, रूहुल्लाह मेहदी द्वारा लिए गए इस अचानक और आश्चर्यजनक निर्णय एवं उनके ऊपर लगाए गए गंभीर आरोपों के बारे में जब पार्टी सुप्रीमो डॉ. फारूक अब्दुल्ला से प्रश्न पूछा गया, तो उन्होंने इस मामले में एकदम से संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी थी। डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने इस पूरे प्रकरण पर फिलहाल कुछ भी कहने से इंकार कर दिया था और केवल इतना ही कहकर बात पूरी कर दी थी कि वे अभी इस बारे में कोई टिप्पणी करना नहीं चाहते हैं।
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