दिया मिर्ज़ा का दिवाली वीडियो हटाने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने BMC को फटकारा
कोर्ट ने भारत को धर्मनिरपेक्ष देश बताते हुए वीडियो को फिर से अपलोड करने का आदेश दिया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 1:12 · अपडेट सुबह 1:22 · 6 मिनट का पाठ
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा के दिवाली वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने के निर्णय पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने इस कदम को 'अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और BMC को आदेश दिया कि दिया मिर्ज़ा का वीडियो फिर से अपलोड किया जाए।
यह पूरा विवाद BMC के इको-फ्रेंडली और पटाखे-मुक्त दिवाली अभियान से शुरू हुआ था। मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए हाई कोर्ट ने पहले आतिशबाजी के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के पालन में BMC ने सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। नागरिकों को इस बारे में जागरूक करने के लिए BMC ने कई हस्तियों के साथ वीडियो बनाए थे, जिनमें दिया मिर्ज़ा भी शामिल थीं। दिया ने अपने वीडियो में लोगों से ग्रीन पटाखे फोड़ने और सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे न फोड़ने की अपील की थी।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, BMC के आधिकारिक X (ट्विटर) हैंडल और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स पर रविवार को यह वीडियो पोस्ट किया गया था, लेकिन उसी रात इसे हटा लिया गया। इस वीडियो पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई थी। BJP की मुंबई इकाई के अध्यक्ष अमित साटमे ने कहा था कि दिवाली 5000 वर्षों से मनाई जा रही है और आगे भी मनाई जाएगी, इसलिए उन्हें त्योहार मनाने का तरीका किसी से सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने पटाखों के खिलाफ अपील करने वालों को 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का हिस्सा बताया था। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, BJP नेता अश्विनी भिड़े ने भी टिप्पणी की थी कि दिया मिर्ज़ा से दिवाली कैसे मनाएं, इसके पाठ लेने की जरूरत नहीं है।
मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने दिया मिर्ज़ा पर तीखा हमला करते हुए उन्हें 'हिंदू विरोधी' बताया था। मेयर तावड़े ने आरोप लगाया कि दिया हमेशा विभाजनकारी तत्वों के साथ खड़ी रही हैं और उन्होंने NEET परीक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ट्रोलिंग की थी। मेयर ने आगे कहा, "वे हमेशा हिंदू विरोधी रही हैं, हमने उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया है।" दूसरी ओर, BMC के डिप्टी मेयर संजय घाड़ी ने कहा कि उन्हें अभिनेत्री के संदेश में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगा।
इस विवाद पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की बेंच ने नेताओं की टिप्पणियों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। जस्टिस कुलकर्णी ने कहा कि नेताओं ने कोर्ट के उस पुराने आदेश की अनदेखी की जिसमें सभी को जागरूकता अभियान में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने नोट किया कि दिया मिर्ज़ा ने वायु प्रदूषण पर बहुत अच्छा संदेश दिया था और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने वाले वीडियो पर राजनीतिक विवाद करना दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी का भी उल्लेख किया कि दिवाली जाति और धर्म से परे होकर सभी लोग मनाते हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान नागरिकों से धर्मनिरपेक्ष भावना बनाए रखने की अपेक्षा करता है। बेंच ने कहा कि जब स्वास्थ्य, प्रदूषण और पर्यावरण की बात हो, तो वहां किसी गुटबाजी या धार्मिक आपत्ति के लिए जगह नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मुंबई शहर एकता और अपनेपन की भावना से चलता है, और किसी की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी से यह संतुलन नहीं बिगड़ना चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि पर्यावरण के मुद्दे पर जागरूकता फैलाने में धार्मिक आधार पर आपत्ति क्यों जताई गई।
हाई कोर्ट ने BMC के कमिश्नर के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि जागरूकता फैलाने के लिए हस्तियों का चयन करना उचित था, लेकिन उसके बाद वीडियो हटाने की आवश्यकता नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि कुछ लोगों की 'छोटी विचारधारा' के कारण यह विवाद हुआ है, लेकिन इसके कारण पर्यावरणीय संदेश को सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। कोर्ट ने BMC को निर्देश दिया कि सोमवार को हटाए गए क्लिप को फिर से अपलोड कर समाज में विश्वास बहाल किया जाए।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण विवरण यह सामने आया है कि BMC ने केवल दिया मिर्ज़ा का ही वीडियो हटाया था। अन्य हस्तियों जैसे अभिनेत्री माधुरी दीक्षित, निशिगंधा वाड और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे के वीडियो BMC के सोशल मीडिया हैंडल पर यथावत रखे गए थे। इस चयनात्मक कार्रवाई पर शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि BMC ने आधिकारिक पत्र देकर दिया मिर्ज़ा से वीडियो बनवाया और फिर BJP नेता अमित साटमे की आपत्ति पर उसे हटा दिया। ठाकरे ने आरोप लगाया कि BJP किसी भी स्तर पर सरकार नहीं चला सकती। मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़े ने भी दिया मिर्ज़ा का समर्थन किया और BJP पर हर मुद्दे को धर्म से जोड़ने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, दिया मिर्ज़ा ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "मैंने इसके लिए कोई पैसा नहीं लिया। भलाई का जमाना नहीं रहा।" उन्होंने आगे कहा कि वायु प्रदूषण कम करने के प्रयासों का स्वागत होना चाहिए क्योंकि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा है।
कोर्ट ने अंत में दोहराया कि समुदाय के हर व्यक्ति का सम्मान होना चाहिए, चाहे उसका धर्म, जाति या पंथ कोई भी हो। कोर्ट ने कहा कि जो लोग सार्वजनिक पदों पर हैं, उनसे ऐसी उम्मीद नहीं की जाती। बेंच ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण और हवा-पानी के प्रदूषण के बारे में जागरूकता फैलाने वाले वीडियो को सांप्रदायिक रंग देना बहुत दुखद बात है, क्योंकि देश में सभी धर्मों और जातियों के लोग एक ही हवा में सांस लेते हैं।
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