दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण को रोकने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कड़े प्रतिबंधों की घोषणा
वाहनों, निर्माण और रोड डस्ट जैसे स्रोतों पर नियंत्रण लाने के प्रयास शुरू
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 12:09 · 4 मिनट का पाठ
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नई दिल्ली में सर्दियों के दौरान हर साल बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिबंधों की घोषणा की है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण कम करने के लिए रोड डस्ट, वाहनों द्वारा होने वाले प्रदूषण और निर्माण गतिविधियों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, इन उपायों को लागू करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन अधिकारी वर्षों से विभिन्न तरीकों से प्रयास कर रहे हैं।
बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट देखी गई है। 31 अक्टूबर को दिल्ली का औसत AQI 117 था, जो 1 नवंबर को बढ़कर 261 और 2 नवंबर को 324 पर पहुंच गया। 3 नवंबर की सुबह 8 बजे तक औसत AQI 330 तक पहुंच गया था, जिससे दृश्यता घटकर 100 मीटर से भी कम हो गई थी। इस स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू किया है। दिल्ली में हवा की गुणवत्ता मापने के लिए कुल 60 मॉनिटरिंग सेंटर हैं, जिनमें से 57 सेंटरों से डेटा मिल रहा है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण के स्रोतों में परोक्ष और स्थानीय दोनों कारण जिम्मेदार हैं। 3 नवंबर को स्थानीय प्रदूषण में ट्रैफिक का योगदान 17.8 प्रतिशत था, जो 4 नवंबर को 15.5 प्रतिशत, 5 नवंबर को 16.3 प्रतिशत और 6 नवंबर को 16.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अन्य स्थानीय स्रोतों में आवासीय गतिविधियां 3.8 से 4.4 प्रतिशत, उद्योग 2.9 से 3.3 प्रतिशत, निर्माण 2.2 से 2.5 प्रतिशत, कचरा जलाना 1.3 से 1.5 प्रतिशत और रोड डस्ट 1.1 से 1.3 प्रतिशत रहने की संभावना है।
स्थानीय स्रोतों के अलावा पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की गतिविधि प्रदूषण में बड़ी वृद्धि कर रही है। 3 नवंबर को पराली जलाने का योगदान 8.2 प्रतिशत था, जो 4 नवंबर को बढ़कर 20.2 प्रतिशत होने का अनुमान है। 5 नवंबर को यह योगदान 18.3 प्रतिशत और 6 नवंबर को फिर से 20.2 प्रतिशत रहने की भविष्यवाणी है। पड़ोसी जिलों की बात करें तो, 3 नवंबर को झज्जर का योगदान 9.9 प्रतिशत था जो 6 नवंबर को घटकर 5.9 प्रतिशत होगा, जबकि सोनीपत का योगदान 2.8 प्रतिशत से बढ़कर 5.6 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। गुड़गांव का योगदान 4.4 से घटकर 1.9 प्रतिशत और भिवानी का 2.2 से घटकर 0.3 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि रोहतक का योगदान 2.3 से बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो सकता है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया है कि वे दिल्ली में प्रदूषण बढ़ाने के लिए जानबूझकर पराली जलाने को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वे पंजाब के जिलों से 271 एफआईआर (FIR) की प्रतियां लाए हैं और 1,000 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं। सिरसा ने आगे आरोप लगाया कि पुलिस खुद आग लगा रही है ताकि अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब में पराली नहीं जल रही है, ऐसी घोषणाओं के पीछे ₹20-25 करोड़ खर्च किए गए हैं।
दूसरी ओर, पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। AAP ने X पर पोस्ट किया कि भाजपा पंजाब के किसानों को बदनाम करने और दिल्ली सरकार की विफलता को छिपाने के लिए झूठ बोल रही है। उन्होंने बताया कि जो फोटोग्राफ दिखाया गया है उसमें अधिकारी पराली की आग बुझा रहे हैं, लेकिन उसे गलत तरीके से पेश किया गया है। सिरसा ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में मई 2025 में रीना गुप्ता की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए थे, जिनके बारे में उन्होंने दावा किया कि वे अरविंद केजरीवाल की रिश्तेदार हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़े उद्धृत करते हुए सिरसा ने बताया कि जनवरी से अक्टूबर के बीच दिल्ली में 220 दिन 'गुड टू मॉडरेट' हवा रही और अक्टूबर का औसत AQI 166 था।
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