टेक कंपनियां अब AI उपयोग के बजाय उत्पादकता और रिटर्न पर ध्यान केंद्रित करेंगी
AI प्रोजेक्ट्स की बढ़ती लागत के कारण गूगल ने पांच देशों में कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक एग्जिट पैकेज घोषित किए
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:57 · अपडेट शाम 5:07 · 4 मिनट का पाठ
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वैश्विक स्तर पर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग के मानदंडों और टोकन खपत के बजाय उत्पादकता में वृद्धि, लागत दक्षता और निवेश पर मिलने वाले मापने योग्य रिटर्न (ROI) पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, एंटरप्राइजेज अब AI के केवल उपयोग के बजाय उससे होने वाले वास्तविक लाभों की जांच कर रहे हैं।
इस बीच, AI क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और लागत कम करने के हिस्से के रूप में, गूगल ने अपने कर्मचारियों के लिए 'बायआउट ऑफर' या स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना शुरू की है। संदेश (विदेश) और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने माइक्रोसॉफ्ट की तरह ही अपने कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बदले बड़ी राशि देने की पेशकश की है। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने इस खबर की पुष्टि की है।
गूगल के प्रवक्ता ने रॉयटर्स के साथ बातचीत में बताया कि वर्ष 2025 में कुछ टीमों ने नौकरी छोड़ने पर मिलने वाली राशि के साथ स्वैच्छिक एग्जिट प्रोग्राम शुरू किया था। इसके बाद, जून महीने में भविष्य के महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए इस कार्यक्रम का विस्तार वैश्विक स्तर पर कुछ देशों में किया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, यह स्वैच्छिक एग्जिट पैकेज कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड के कर्मचारियों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इस योजना के तहत जो कर्मचारी नौकरी छोड़ने के लिए सहमत होंगे, उन्हें उनकी सेवा के वर्षों के आधार पर सेवरेंस पैकेज दिया जाएगा। हालांकि, गूगल क्लाउड और डीपमाइंड के कर्मचारियों को इस योजना से बाहर रखा गया है। इन घोषणाओं के बाद जुलाई के मध्य तक कर्मचारियों को इसके परिणामों के बारे में सूचित कर दिया गया था।
दूसरी ओर, गूगल ने भारत में 'गूगल ड्रीमबीन्स AI' लॉन्च किया है। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, ड्रीमबीन्स AI उपयोगकर्ताओं के कनेक्टेड गूगल ऐप्स से जानकारी प्राप्त कर व्यक्तिगत दैनिक स्टोरी कलेक्शन तैयार करता है।
AI तकनीक के उपयोग को लेकर एक गंभीर विवाद भी सामने आया है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्रियों ने एक उद्योगपति पर मेटा AI स्मार्ट ग्लास के जरिए जासूसी करने का आरोप लगाया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने संदेह व्यक्त किया कि व्यावसायिक बातचीत के बहाने उनसे मिलने आए एक उद्योगपति मेटा स्मार्ट ग्लास के जरिए उनकी रिकॉर्डिंग या जासूसी कर रहे थे। शिवकुमार के अनुसार, वह व्यक्ति कंपनी के काम के बजाय चुनावी राजनीति और बूथ-स्तर के आंकड़ों पर चर्चा कर रहा था। शिवकुमार ने आगे आरोप लगाया कि उनके कैबिनेट के कुछ मंत्रियों के खिलाफ भी स्टिंग ऑपरेशन करने की साजिश रची जा रही थी। संदेह होने पर उन्होंने उस व्यक्ति की पहचान और बैकग्राउंड की जांच के आदेश दिए थे।
इस मामले में अब केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने भी सवाल उठाए हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सतीशन ने बताया कि वही उद्योगपति उनकी मुलाकात के दौरान भी स्मार्ट चश्मा पहनकर आया था और उन्हें उस मुलाकात की तस्वीरें भी भेजी गई हैं। उद्योगपति की मंशा पर सवाल उठाते हुए सतीशन ने कहा कि वह व्यक्ति कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलते समय तो स्मार्ट चश्मा पहनता था, लेकिन जब वह भाजपा नेताओं या अन्य मंत्रियों से मिला तो उसने चश्मा नहीं पहना था। दो अलग-अलग तस्वीरें इस अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।
केरल के मुख्यमंत्री ने इस मामले में अलग से जांच कराने की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक पुलिस पहले से ही इस मामले की जांच कर रही है, इसलिए केरल में अलग जांच की आवश्यकता नहीं है। फिलहाल इस मामले में जांच जारी होने के कारण उन्होंने अधिक विवरण साझा करने से परहेज किया।
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