लद्दाख में बनेगा विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन, टंगला में १७,५८२ फीट की ऊंचाई पर होगा निर्माण
बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन प्रोजेक्ट के तहत ४८९ किमी लंबा ट्रैक तैयार किया जाएगा, जो चीन के रिकॉर्ड को तोड़ेगा।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:06 · 4 मिनट का पाठ
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अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, लद्दाख के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र में रेलवे पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार पार पड़ेगा और प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अंतिम मंजूरी मिल जाएगी, तो भारत विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे स्टेशन के निर्माण का नया विश्व कीर्तिमान स्थापित करेगा। इस रेलवे स्टेशन को लद्दाख के टंगला में समुद्र तल से १७,५८२ फीट की ऊंचाई पर बनाने की योजना है।
इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के बाद यह चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और चिंगहाई प्रांत की सीमा पर स्थित चिंगहाई-तिब्बत रेलवे लाइन पर स्थित १६,६२७ फीट की ऊंचाई वाले तांगगुला रेलवे स्टेशन का रिकॉर्ड तोड़ देगा। टंगला में प्रस्तावित यह स्टेशन चीन के तांगगुला स्टेशन की तुलना में लगभग २९१ मीटर अधिक ऊंचाई पर होगा, जो इसे वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाएगा। प्रोजेक्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और डीपीआर भी तैयार कर दी गई है। वर्तमान में, निर्माण कार्य शुरू करने के लिए केवल औपचारिक मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। इसके लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय सहित संबंधित संस्थाओं के साथ परामर्श और आवश्यक स्वीकृति लेने की प्रक्रिया बाकी है।
इस संपूर्ण रेलवे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत १.३१ लाख करोड़ रुपये है। यह ४८९ किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन हिमालय के अत्यंत दुर्गम पहाड़ी इलाकों से गुजरेगी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य केवल लद्दाख को देश के रेलवे नेटवर्क से जोड़ना ही नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती क्षेत्र तक सैन्य उपकरणों और आवश्यक सामग्रियों की आवाजाही को अधिक सुगम और मजबूत बनाना भी है। रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को रणनीतिक महत्व की योजना के रूप में चिह्नित किया है।
इस प्रोजेक्ट की इंजीनियरिंग क्षमता अद्भुत होगी। कुल ४८९ किलोमीटर के ट्रैक में से लगभग २७० किलोमीटर का हिस्सा सुरंगों (टनल) से गुजरेगा, जिसका अर्थ है कि रेलवे मार्ग का आधे से अधिक हिस्सा पहाड़ों को चीरकर बनाया जाएगा। संपूर्ण प्रोजेक्ट में ६२ सुरंगों और ११६ पुलों के निर्माण का प्रस्ताव है। यह रेलवे लाइन हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से शुरू होकर सुंदरनगर, मंडी, मनाली, केलॉन्ग, सरचू और उपशी होते हुए लेह के टंगला तक पहुंचेगी। इस मार्ग पर केलॉन्ग में भारत का पहला भूमिगत रेलवे स्टेशन बनाने की भी योजना है। प्रोजेक्ट के पहले चरण में भानुपल्ली-बिलासपुर रेलखंड पर काम चल रहा है, जिसके २०२७ तक पूरा होने की अपेक्षा है, हालांकि पूरे बिलासपुर-मनाली-लेह कॉरिडोर के लिए समयसीमा अभी तय नहीं की गई है।
इस रेलवे लाइन के निर्माण से लद्दाख को कई फायदे होंगे। सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम में भी रेलवे संपर्क चालू रहने से खाद्यान्न, ईंधन और अन्य जीवनजरूरी चीजों की आपूर्ति नियमित बनी रहेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर वस्तुओं के भावों पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट से हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, जांस्कर और लेह सहित आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। परिवहन और पर्यटन क्षेत्र में सुगमता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
चीन-तिब्बत रेलवे लाइन चीन द्वारा निर्मित एक महत्वपूर्ण रेलवे प्रोजेक्ट है जो तिब्बत को चीन के अन्य भागों से जोड़ती है। यह रेलवे लाइन अपने उच्च पर्वतीय मार्गों और इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूनों के लिए जानी जाती है। वर्षों से इस लाइन पर स्थित तांगगुला स्टेशन दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे स्टेशन के रूप में खिताबी दर्जा रखता था, जिसे अब भारत के इस नए प्रोजेक्ट द्वारा चुनौती दी जा रही है।
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