पाकिस्तान में मानवाधिकार वकील दंपति को 10 साल की जेल की सजा
क्रिकेट टीम की सुरक्षा में बाधा उत्पन्न करने के आरोप में एंटी टेररिज्म कोर्ट ने सुनाया फैसला
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
1 नवंबर 2026, सुबह 6:41 · 7 मिनट का पाठ
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पाकिस्तान की एक एंटी टेररिज्म कोर्ट ने मानवाधिकार वकील ईमान मज़ारी और उनके पति हादी अली चट्टा को 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। 29 अक्टूबर 2026 को आए इस फैसले के अनुसार, इस दंपति पर 2024 में इंग्लैंड की क्रिकेट टीम की यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करने का आरोप है। एंटी टेररिज्म कोर्ट के जज ताहिर अब्बास सिप्रा ने यह सजा सुनाई।
यह मामला अक्टूबर 2024 की एक घटना से जुड़ा है, जब इंग्लैंड की क्रिकेट टीम पाकिस्तान के दौरे पर थी। अभियोजक के अनुसार, इस्लामाबाद में मेहमान टीम के लिए निर्धारित सुरक्षा काफिले के रास्ते पर लगाए गए रोड बैरियर को मज़ारी और चट्टा ने हटा दिया था। इसके अलावा, इस्लामाबाद के मुख्य क्लोवरलीफ रोड जंक्शन 'जीरो पॉइंट' पर पुलिस अधिकारियों के काम में बाधा डालने का भी आरोप है। अधिकारियों का कहना है कि उनके इस कृत्य से मेहमान क्रिकेट टीम की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी और सार्वजनिक अशांति फैलने की संभावना थी।
कोर्ट ने दोनों को एंटी टेररिज्म एक्ट की धारा 7(एच) के तहत 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा, पाकिस्तान पैनल कोड की अन्य धाराओं के तहत उन्हें लोक सेवकों को बाधित करने के लिए एक साल की और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ बल प्रयोग करने के लिए दो साल की अतिरिक्त सजा भी मिली है। हालांकि, ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। कोर्ट ने इन दोनों पर 2,00,000 पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसले में कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस घटना से इंग्लैंड की क्रिकेट टीम की सुरक्षा खतरे में पड़ी थी और इसका उद्देश्य आतंक का माहौल पैदा करना था, हालांकि फैसले में यह भी स्वीकार किया गया कि यह घटना बैरियर हटाने जैसी सामान्य घटना जैसी दिखती थी।
मज़ारी और चट्टा ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने खुद को 'विचारों के कैदी' (prisoners of conscience) के रूप में बताया है और दावा किया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई उनके मानवाधिकार कार्य के कारण की जा रही है। डॉन न्यूज़ को दिए गए बयान में चट्टा ने कहा कि, "मुझे केवल मेरी पत्नी के कार्य और सक्रियता का समर्थन करने के लिए ही नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ने के मार्ग को हमारे जीवन की यात्रा के रूप में चुनने के लिए सजा दी जा रही है।"
दंपति ने पहले भी कहा था कि उन्हें इस तरह से उदाहरण के तौर पर पेश किया जा रहा है ताकि अत्याचार, दमन और अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले लोगों में डर पैदा किया जा सके। ईमान मज़ारी एक जानी-मानी मानवाधिकार वकील हैं जो पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और ऐसे विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करती हैं जो राज्य की एजेंसियों द्वारा किए गए अत्याचारों का सामना कर रहे हैं। वे धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों, महिलाओं के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी काम करती हैं। उनके पति हादी अली चट्टा भी वकील और मानवाधिकार पैरोकार हैं। वर्ष 2026 में, उनके मानवाधिकार और कानून के शासन की रक्षा के लिए किए गए कार्य के लिए उन्हें 'लुडोविक-ट्रारियु इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स प्राइज' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
इस मामले में मज़ारी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि जब वे अपने क्लाइंट का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोर्ट पहुंचने का प्रयास कर रही थीं, तब उन्हें पुलिस द्वारा रोडब्लॉक पर रोका गया था। यह मामला मार्च 2025 में इस्लामाबाद के कोहसार पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। ट्रायल के दौरान अभियोजन के सात गवाहों के बयान दर्ज किए गए और यह कार्रवाई रावलपिंडी की अडियाला जेल में की गई, जहां सुनवाई के दौरान मज़ारी और चट्टा को पिंजरे जैसी संरचना के पीछे रखा गया था।
यह दंपति वर्तमान में पाकिस्तानी न्यायतंत्र के साथ कई कानूनी संघर्षों का सामना कर रहा है। जनवरी 2026 में, उन्हें सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से राज्य विरोधी विचारधारा फैलाने के आरोप में पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स प्रिवेंशन एक्ट के तहत 17 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। इस सजा को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर को स्थगित कर दिया था और उन्हें जमानत दी थी। लेकिन, जमानत मिलने के उसी दिन इस्लामाबाद पुलिस द्वारा उन्हें फिर से एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया गया, जो मार्च 2025 के एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा था, जिसमें उन पर "सरकार विरोधी नारे" लगाने और "सड़कों को रोकने" का आरोप था। यह नया 10 साल का फैसला अब उनकी पिछली सजाओं से अलग है।
इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और स्थानीय स्तर पर भारी आलोचना हो रही है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की रीजनल ह्यूमन राइट्स इम्पैक्ट की सीनियर डायरेक्टर यास्मीन अहमद ने कहा कि, "यह दोषी ठहराने की प्रक्रिया पाकिस्तानी न्याय प्रणाली पर एक कलंक है।" संस्था ने आगे जोड़ा कि ईमान और हादी को केवल इसलिए निशाना बनाया गया है क्योंकि वे अपने निडर मानवाधिकार कार्य को रोकने से इनकार करते हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग करते हैं। एमनेस्टी ने चिंता व्यक्त की कि दंपति को खुली और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार नहीं दिया गया और ट्रायल जेल के अंदर स्थानांतरित कर दी गई।
मज़ारी के परिजनों ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनकी मां शिरीन मज़ारी, जो पूर्व मानवाधिकार मंत्री रही हैं और इमरान खान की सरकार में सेवा दी थी, उन्होंने इस सुनवाई को 'ढोंग का ट्रायल' (sham trial) करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दंपति को अपने वकील द्वारा बचाव करने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए।
मज़ारी का पेशेवर जीवन और उनकी मां की राजनीतिक भूमिका के कारण वे हमेशा सत्ताधारी संस्थाओं के साथ संघर्ष में रही हैं। ईमान मज़ारी ने देश की सुरक्षा संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले कथित अत्याचारों के बारे में खुलकर बोलना जारी रखा है, जिसके कारण वे बार-बार कानूनी मुश्किलों में फंसती हैं। फिलहाल यह दंपति रावलपिंडी की अडियाला जेल में कैद है और इस फैसले ने पाकिस्तान में वकीलों और कार्यकर्ताओं पर बढ़ते दबाव को लेकर वैश्विक चर्चा छेड़ दी है।
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