सेबी द्वारा शेयर बाजार के निवेशकों के लिए नया सेटलमेंट फ्रेमवर्क लागू
नियमों के तहत ऑनलाइन आवेदन और फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, रात 9:28 · 4 मिनट का पाठ
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा 7 नवंबर, 2026 से नया सेटलमेंट फ्रेमवर्क लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से पात्र व्यक्ति और संस्थान एक व्यवस्थित ढांचे के जरिए विशिष्ट नियामक कार्यवाहियों का समाधान कर सकेंगे। इस फ्रेमवर्क के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, सेटलमेंट राशि की गणना के लिए कैलकुलेटर और कुछ मामलों में त्वरित निपटान के नियमों को शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सेबी ने 8 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। इन नए नियमों को 'एडमिनिस्ट्रेटिव एंड सिविल प्रोसीडिंग्स ऑफ सेटलमेंट रेगुलेशन 2026' के रूप में जाना जाता है, जो ट्रांजिशनल और सेविंग प्रोविजन के तहत 2018 के पुराने सेटलमेंट फ्रेमवर्क का स्थान लेंगे। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य प्रतिभूति बाजार के गंभीर उल्लंघनों के खिलाफ सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए नियामक सेटलमेंट की प्रक्रिया को सरल बनाना है।
सेटलमेंट की आवेदन प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने के लिए सेबी ने कई नई सुविधाएं शुरू की हैं। इनमें ऑनलाइन सेटलमेंट आवेदन सुविधा, सेटलमेंट अमाउंट कैलकुलेटर, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) और एक समर्पित हेल्प डेस्क शामिल हैं। इसके अलावा, नियामक ने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें समझाया गया है कि आवेदक सेटलमेंट राशि की गणना कैसे कर सकते हैं।
नियमों के अनुसार, पात्र आवेदक सेटलमेंट रेगुलेशन, 2026 के तहत आवेदन कर सकते हैं। इस फ्रेमवर्क के तहत, उचित शर्तें पूरी करने वाले आवेदक अलग-अलग चरणों में निर्धारित कार्यवाहियों के सेटलमेंट की मांग कर सकते हैं। आवेदन शुल्क की बात करें तो, आम जनता के लिए ₹25,000 और अन्य आवेदकों के लिए ₹35,000 का नॉन-रिफंडेबल आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है। सेटलमेंट की न्यूनतम राशि पहली बार आवेदन करने वालों के लिए 3 लाख रुपये और दूसरी बार आवेदन करने वालों के लिए 7 लाख रुपये रखी गई है।
हालांकि, सेटलमेंट की अंतिम राशि कई कारकों पर निर्भर करेगी। इसमें बेस अमाउंट, कार्यवाही का चरण, उल्लंघन का स्वरूप और उसकी गंभीरता, नियामक कार्यवाही के साथ-साथ लागू होने वाली गंभीर या राहत देने वाली परिस्थितियां शामिल होंगी। सेबी के समक्ष लंबित कार्यवाहियों से संबंधित आवेदन आमतौर पर कारण बताओ नोटिस या पूरक कारण बताओ नोटिस मिलने के 120 दिनों के भीतर जमा करने होंगे। लेकिन, यह समय सीमा प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण या सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष कार्यवाहियों पर लागू नहीं होगी।
नए नियमों में 'फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट सिस्टम' की भी शुरुआत की गई है, जो उल्लंघन-आधारित और मौद्रिक सीमा-आधारित प्रक्रिया पर काम करेगा। मौद्रिक सीमा तंत्र के तहत, ₹10 लाख तक की सेटलमेंट राशि वाले आवेदन त्वरित प्रोसेसिंग के पात्र हो सकते हैं, यदि उनमें डिस्गॉर्जमेंट, सुधारात्मक उपाय या अतिरिक्त नियामक शर्तें शामिल न हों।
सभी मामलों में सेटलमेंट संभव नहीं है। कुछ गंभीर उल्लंघनों को इस फ्रेमवर्क से बाहर रखा गया है। इनमें जानबूझकर चूक करने वाले (विलफुल डिफॉल्टर्स), धोखाधड़ी करने वाले देनदारों और भगोड़े आर्थिक अपराधियों से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके अलावा, बाजार पर व्यापक प्रभाव डालने वाले, निवेशकों को बड़ा नुकसान पहुंचाने वाले या बाजार की ईमानदारी को जोखिम में डालने वाले मामलों को भी नियामक नियमों के आधार पर सेटलमेंट से बाहर रखा जा सकता है।
गोपनीयता और मंजूरी प्रक्रिया के नियमों के अनुसार, जो आवेदक जांच या ऑडिट में अच्छी तरह सहयोग करते हैं, उन्हें कुछ शर्तों के साथ गोपनीयता लाभ (कॉन्फिडेंशियल बेनिफिट) के साथ सेटलमेंट की मंजूरी दी जाएगी। सेटलमेंट आवेदनों की जांच एक आंतरिक समिति और एक उच्चाधिकार प्राप्त सलाहकार समिति द्वारा की जाएगी, जो उचित शर्तों की सिफारिश करेगी। अंत में, सेबी के पूर्णकालिक सदस्यों का एक पैनल तय करेगा कि आवेदन स्वीकार करना है या अस्वीकार करना है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) भारत सरकार द्वारा स्थापित एक नियामक संस्था है, जो शेयर बाजार और निवेशकों के हितों की रक्षा का कार्य करती है।
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