ग्रेड-ए क्षेत्रों में सूक्ष्मजीव निगरानी के लिए अनुसूची-एम में संशोधन प्रस्तावित
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार औषधि नियम में बदलाव के लिए प्रस्ताव रखा है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 4:09 · अपडेट शाम 6:29 · 3 मिनट का पाठ
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पीआईबी दिल्ली के एक अहवाल के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा औषधि नियम, १९४५ की अनुसूची-एम में संशोधन करने के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्ताव २८ अक्टूबर, २०२६ के दिन जारी की गई सूचना संख्या जीएसआर ९५३(ई) के द्वारा लाया गया है। इस संशोधन के पीछे मुख्य उद्देश्य ग्रेड-ए क्षेत्रों में सूक्ष्मजीव निगरानी को अधिक मजबूत बनाना और निर्जीवाणु औषधि निर्माण के मानकों को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के अनुसार सुसंगत करना है।
इस सूचित परिवर्तन के द्वारा निर्जीवाणुकृत औषधीय उत्पादों के लिए अच्छी विनिर्माण पद्धतियों से संबंधित डब्ल्यूएचओ की तकनीकी रिपोर्ट श्रृंखला संख्या १०४४, अनुलग्नक-२ के अनुसार ग्रेड-ए क्लीन क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवी संदूषण की तय की गई सीमाओं में उचित सुधार किया जाएगा। इस कदम से अनुसूची-एम के तहत वर्तमान में अमल में आ रही सूक्ष्मजीवी संदूषण की सीमाओं और ग्रेड-ए क्षेत्रों के लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा तय किए गए संबंधित मानकों के बीच रहे अंतर को दूर किया जा सकेगा। इसके परिणामस्वरूप भारत के नियामक प्रावधानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानकों के साथ जोड़ा जा सकेगा।
निर्जीवाणु दवाओं के उत्पादन की प्रक्रिया में ग्रेड-ए क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे क्षेत्रों में खुले औषधीय उत्पादों, कंटेनरों और साथ ही निर्जीवाणुकृत घटकों के रखरखाव और संचालन का काम किया जाता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए इन क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवों पर सख्त नियंत्रण रखना अनिवार्य है, ताकि बाजार में आने वाले निर्जीवाणु औषधीय उत्पादों की गुणवत्ता और उसकी सुरक्षा पूरी तरह से सुरक्षित रह सके।
इस प्रस्तावित संशोधन की मदद से संशोधित अनुसूची-एम को डब्ल्यूएचओ की मार्गदर्शिका के साथ पूरी तरह से सुसंगत बनाया जा सकेगा और देशभर में निर्जीवाणु औषधों के उत्पादन को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे को और अधिक धारदार बनाया जा सकेगा। इस प्रस्ताव में विशेष प्रावधान किया गया है कि डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार यदि ग्रेड-ए क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवों की किसी भी प्रकार की वृद्धि देखने को मिलती है, तो उसे आधिकारिक जांच शुरू करने का सक्षम आधार माना जाएगा।
यह पूरा प्रस्ताव दवाओं के उत्पादन में गुणवत्ता के मानकों को और अधिक सबल बनाने, स्थानीय नियामक जरूरतों को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और साथ ही औषधीय उत्पादों की गुणवत्ता और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार की कटिबद्धता को स्पष्ट करता है। इस प्रस्तावित संशोधन के संदर्भ में सभी हितधारकों और आम जनता से उनकी आपत्ति अर्जियों तथा सुझावों की मांग की गई है।
इस संबंधित कोई भी आपत्ति या सुझाव हों तो उसे अवर सचिव (औषधि नियमन), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, यू-६, वर्क हॉल, सी विंग, प्रथम तल, कर्तव्य भवन-१, नई दिल्ली–११०००१ के पते पर भेजा जा सकेगा या अधिकृत ई-मेल पते drugsdiv-mohfw[at]gov[dot]in पर भेजकर प्रस्तुत किया जा सकेगा ऐसा बताया गया है।
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