बैंकों में जमा राशि की सुरक्षा के लिए RBI ने DICGC की कार्यप्रणाली समझाई
प्रत्येक बीमित बैंक में एक व्यक्ति को मूलधन और ब्याज सहित अधिकतम ₹5 लाख तक का कवर मिलेगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 5:54 · 3 मिनट का पाठ
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हाल ही में उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में बैंक के ही एक कर्मचारी द्वारा कई ग्राहकों के खातों से पैसे ट्रांसफर किए गए थे। इस घटना से पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से भी ग्राहकों का डेटा लीक होने की खबरें आई थीं। कई अन्य बैंकों से भी ऐसी घटनाएं सामने आने पर ग्राहकों में अपनी बैंक में रखी राशि कितनी सुरक्षित है, इसे लेकर चिंता और डर पैदा हो गया था।
ग्राहकों की इस उलझन को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि DICGC के माध्यम से बैंक में रखे पैसे सुरक्षित किए जा सकते हैं। RBI की सहायक संस्था 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (DICGC) ऐसी स्थितियों में खाताधारकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का कार्य करती है। ABP लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, DICGC एक प्रकार का बैंक डिपॉजिट बीमा है। यदि कोई बीमित बैंक दिवालिया घोषित हो जाता है या उसके कामकाज पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, तो निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत खाताधारकों को उनकी जमा राशि का बीमा भुगतान दिया जाता है।
DICGC के तहत बचत खाते, चालू खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) में जमा राशि को बीमा सुरक्षा मिलती है। इस योजना के तहत एक ही बैंक में एक ही व्यक्ति के सभी खातों की जमा राशि को जोड़कर अधिकतम ₹5 लाख तक का बीमा मिलता है। इस राशि में मूलधन (principal) और उस पर मिलने वाला ब्याज (accrued interest) दोनों शामिल हैं, जो लागू शर्तों के अधीन है।
यह सुरक्षा कैसे काम करती है, इसे समझाने के लिए एक उदाहरण दिया गया है कि, यदि किसी व्यक्ति के एक ही बैंक में बचत खाते में ₹2 लाख और FD में ₹4 लाख जमा हैं, तो उसकी कुल जमा राशि ₹6 लाख होती है। ऐसी स्थिति में, उस व्यक्ति को अधिकतम ₹5 लाख तक की ही बीमा सुरक्षा प्राप्त होगी।
इसके अलावा, अलग-अलग DICGC बीमित बैंकों में जमा राशि पर अलग-अलग ₹5 लाख तक का बीमा मिलता है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी व्यक्ति ने दो अलग-अलग बीमित बैंकों में पैसे जमा किए हैं, तो दोनों बैंकों में अलग-अलग बीमा सीमा लागू होगी। हालांकि, यदि एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में खाते हैं, तो सभी जमा राशियों को एक साथ जोड़कर ही बीमा की गणना की जाती है।
डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है। इसकी स्थापना 1978 में की गई थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य बैंक में पैसा जमा करने वाले ग्राहकों की बचत को सुरक्षा प्रदान करना रहा है।
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