पशुओं में फुट-एंड-माउथ रोग से लड़ने के लिए राष्ट्रीय अभ्यास 'वज्र-सैट' संपन्न
इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 25 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 83 प्रतिभागियों ने भाग लिया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 1:12 · अपडेट दोपहर 1:22 · 3 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने बेंगलुरु में ICAR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वेटरनरी एपिडेमियोलॉजी एंड डिजीज इंफॉर्मेटिक्स (ICAR-NIVEDI) के सहयोग से 'वज्र-सैट' (VAJRA-SAT) नामक दो दिवसीय राष्ट्रीय टेबलटॉप अभ्यास का आयोजन किया। 4 और 5 नवंबर 2026 को आयोजित यह अभ्यास फुट-एंड-माउथ डिजीज (FMD) के सेरोटाइप SAT-1 की तैयारियों पर केंद्रित था। यह पूरा कार्यक्रम “डिटेक्ट अर्ली, कन्फर्म फास्ट, कंटेन टुगेदर” थीम के तहत आयोजित किया गया था।
PIB दिल्ली की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब तक FMD सेरोटाइप SAT-1 दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि, यह रोग अफ्रीका से आगे बढ़कर पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में फैल गया है, इसलिए पशु स्वास्थ्य, किसानों की आजीविका और पशुधन अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए इसे एक सक्रिय तैयारी के रूप में आयोजित किया गया था।
इस अभ्यास में 25 राज्यों, 3 केंद्र शासित प्रदेशों और प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के 83 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें राज्य पशुपालन विभाग, ICAR संस्थान, पशु चिकित्सा निदान प्रयोगशालाएं, पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, टीका निर्माता तथा रक्षा और सीमा सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल थे। प्रतिभागियों ने काल्पनिक आउटब्रेक स्थितियों के माध्यम से रोग की जल्द पहचान, प्रयोगशाला पुष्टि, महामारी विज्ञान जांच, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण, आपातकाल में टीकाकरण की तैयारी, जोखिम संचार और एकीकृत प्रतिक्रिया पर चर्चा की।
4 नवंबर को पशुपालन आयुक्त डॉ. नवीना बी.एम. द्वारा इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। उन्होंने केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय और रोग की जल्द पहचान के महत्व पर जोर दिया। ICAR-NIVEDI के निदेशक डॉ. बलदेव आर. गुलाटी ने FMD SAT-1 की बदलती महामारी विज्ञान स्थिति और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की आवश्यकता बताई। ICAR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फुट-एंड-माउथ डिजीज (ICAR-NIFMD) के निदेशक डॉ. जे.के. मोहपात्रा ने प्रयोगशाला की तैयारी और त्वरित निदान पर जोर दिया, जबकि नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय के निदेशक ब्रिगेडियर एम.एम. रामचंद्र ने सीमा पर सतर्कता और अंतर-एजेंसी समन्वय पर बल दिया।
5 नवंबर को आयोजित समापन सत्र की अध्यक्षता DAHD के अतिरिक्त सचिव (लाइवस्टॉक हेल्थ) श्री रामा शंकर सिन्हा ने की। उन्होंने ICAR-NIFMD के तकनीकी सहयोग से क्षेत्रीय FMD प्रयोगशालाओं और क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशालाओं (RDDLs) की क्षमता बढ़ाने की बात कही। प्रतिभागियों ने समय पर रिपोर्टिंग, टीके की तैयारी और अंतर-राज्य समन्वय के महत्व पर जोर दिया। इस अभ्यास से प्राप्त सुझावों का उपयोग राष्ट्रीय प्रतिक्रिया रणनीति विकसित करने के लिए किया जाएगा।
इसके अलावा, 5 नवंबर 2026 को FMD-मुक्त कम्पार्टमेंटमेंटेशन पर एक अलग तकनीकी बैठक आयोजित की गई। अतिरिक्त सचिव (LH) और पशुपालन आयुक्त की सह-अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सीमेन प्रोडक्शन सेंटर्स और सीमेन बैंकों के FMD-मुक्त कम्पार्टमेंटमेंटेशन पर चर्चा की गई, ताकि पशुधन आनुवंशिक संसाधनों की रक्षा कर सुरक्षित व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके।
कोच्चि में आईटी पेशेवर के हादसे में शिकार होने के बाद सुरक्षा अभियान शुरू
दुर्घटना के बाद प्रोग्रेसिव टैकिस और अन्य संगठनों द्वारा ट्रैफिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया है।
जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गर्माहट, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद का इस्तीफा मंजूर
लोकसभा सचिवालय द्वारा अधिसूचना जारी, तीन दिन पहले पार्टी से नाराज होकर छोड़ी थी नेका।
तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट का झटका: 10 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार
गोवा रेप केस में दोषी पूर्व की सजा यथावत, दीवाली जेल में ही मनानी पड़ेगी