NMC ने NEET-PG में रैंक आधारित प्रवेश और शुल्क में कमी का प्रस्ताव दिया
2027 के काउंसलिंग चक्र से स्नातकोत्तर चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया में बड़े बदलाव हो सकते हैं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 8:11 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने NEET-PG और NEET-SS के लिए वर्तमान पर्सेंटाइल-आधारित क्वालीफाइंग प्रणाली को बदलकर केवल रैंक-आधारित प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव दिया है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये महत्वपूर्ण बदलाव 2027 के काउंसलिंग चक्र से लागू हो सकते हैं।
ये प्रस्ताव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 23 जुलाई को गठित 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों का हिस्सा हैं। NEET-PG के क्वालीफाइंग कट-ऑफ में की गई भारी कटौती को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस समिति का गठन किया गया था। केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक हलफनामे के माध्यम से अदालत में इस समिति की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशें पेश कीं।
वर्तमान प्रणाली में, उम्मीदवारों को स्नातकोत्तर चिकित्सा काउंसलिंग के लिए पात्र होने के लिए निर्धारित न्यूनतम पर्सेंटाइल प्राप्त करना होता है। जब सीटें खाली रह जाती हैं, तो अधिकारी पात्र उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाने के लिए इस पर्सेंटाइल को कम कर सकते हैं। NEET-PG 2025 की प्रक्रिया के दौरान इस संबंध में विवाद हुआ था। 13 जनवरी, 2026 को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल घटाकर शून्य कर दिया था, जिसके कारण 800 में से माइनस 40 अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार भी प्रवेश के लिए पात्र हो गए थे। सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ 50वें पर्सेंटाइल से घटाकर 7वां पर्सेंटाइल कर दिया गया था।
दूसरे दौर की काउंसलिंग के बाद लगभग 9,000 स्नातकोत्तर सीटें खाली रहने के बाद यह निर्णय लिया गया था। सामाजिक कार्यकर्ता हरीशरण देवगण और कुछ डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि शून्य या नकारात्मक स्कोर वाले उम्मीदवारों को प्रवेश देने से चिकित्सा शिक्षा के न्यूनतम मानकों में गिरावट आ सकती है।
नए प्रस्ताव के अनुसार, क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल घोषित करने के बजाय उम्मीदवारों को उनके प्रदर्शन के आधार पर रैंक दी जाएगी और काउंसलिंग इसी रैंक के अनुसार की जाएगी। हलफनामे में बताया गया है कि, "NMC नए नियम जारी करने की प्रक्रिया में है, जिसमें NEET-PG और NEET-SS काउंसलिंग के लिए केवल रैंक-आधारित प्रणाली अपनाई जाएगी; परिणामों में कोई पर्सेंटाइल अंक घोषित नहीं किए जाएंगे; उम्मीदवारों को केवल रैंक दी जाएगी।"
हलफनामे के अनुसार, NMC के सचिव डॉ. राघव लांगा ने 1 अक्टूबर को महानिदेशक स्वास्थ्य सेवा (DGHS) को इस निर्णय की जानकारी दी थी। NMC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है, लेकिन हितधारकों के सुझाव लेने सहित आगे के कदम उठाने से पहले आयोग अदालत के अंतिम निर्देशों की प्रतीक्षा करेगा।
इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों के खाली रहने की समस्या और काउंसलिंग में होने वाले विलंब को दूर करना है, जो शैक्षणिक सत्र की शुरुआत को प्रभावित करता है। इसके अलावा, प्रस्ताव में काउंसलिंग का अधिक डिजिटलीकरण, नॉन-क्लिनिकल कोर्स के लिए शुल्क में कमी, रेजिडेंट्स के स्टाइपेंड की समीक्षा और उम्मीदवारों द्वारा सीटें ब्लॉक करने से रोकने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन भी शामिल है।
समिति ने चेतावनी दी है कि इन बदलावों से न्यूनतम मानकों के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए। हलफनामे में उल्लेख है कि NEET परीक्षाओं की पवित्रता बनी रहनी चाहिए और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के न्यूनतम मानकों को इतना कम नहीं किया जाना चाहिए कि अत्यंत अपर्याप्त या नकारात्मक प्रदर्शन वाले उम्मीदवार प्रवेश के लिए पात्र हो जाएं।
તહેવારોની મોસમમાં વતન જવા માટે migrant કામદારોમાં ભારે ધસારો
ભારતીય રેલવે દ્વારા તહેવારો નિમિત્તે અઢાર હજાર વિશેષ ટ્રેનો દોડાવવામાં આવી રહી છે.
વલણ બદલીને સરકારે કલ્યાણકારી યોજનાઓ માટે આધાર કાર્ડને બદલે વોટર આઈડી જોડતા વિવાદ
લોકસભામાં વિપક્ષના નેતા રાહુલ ગાંધીએ સરકારના આ પગલાને 'મત ચોરી નહીં, પણ અધિકારોની ચોરી' ગણાવ્યું.
ઝારખંડમાં પરીક્ષાઓમાં વિલંબ અને લાંચના આક્ષેપોને લઈને વિદ્યાર્થીઓનું ઉગ્ર આંદોલન
રાજ્યમાં સરકારી નોકરીઓને આર્થિક પ્રગતિનો એકમાત્ર રસ્તો ગણાવીને વિદ્યાર્થીઓ પબ્લિક સર્વિસ કમિશનમાં મોટા ફેરફારની માંગ કરી રહ્યા છે.