भाजपा फिर सत्ता में आएगी तो उत्तर प्रदेश में लागू होगी समान नागरिक संहिता
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने समाजवादी पार्टी पर प्रहार करते हुए कहा कि आगामी ३० वर्षों तक उनकी पार्टी सत्ता में नहीं आएगी।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, दोपहर 3:41 · अपडेट सुबह 10:55 · 4 मिनट का पाठ
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को घोषित किया था कि यदि उत्तर प्रदेश में भाजपा फिर से चुनी जाएगी, तो राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई की स्टेट वर्किंग कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने यह महत्वपूर्ण घोषणा की थी। उन्होंने जोड़ा था कि कई राज्यों में समान नागरिक संहिता पहले ही अमल में आ चुकी है और इस बार जब सरकार सत्ता पर आएगी तब यूपी में भी इसे लागू किया जाएगा।
इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखे प्रहार करते हुए अमित शाह ने कहा था कि, "अखिलेश बाबू, मेरे शब्द नोट कर लेना, आपकी पार्टी आगामी ३० वर्षों तक उत्तर प्रदेश में सरकार नहीं बनाएगी। लोग आपकी तीसरी पीढ़ी को भी माफ नहीं करेंगे।" उन्होंने राम मंदिर के निर्माण में भाजपा की भूमिका को एक मुख्य उपलब्धि के रूप में भी हाईलाइट किया था। साथ ही उन्होंने राम भक्तों के सामने होने वाली हिंसा को लेकर समाजवादी पार्टी की आलोचना की थी।
उत्तर प्रदेश में यूसीसी के इस संकल्प के बीच देशभर में भाजपा के नेताओं द्वारा समान नागरिक कानून के क्रियान्वयन के लिए आह्वान फिर से तेज हुए हैं। पार्टी के नेता अनेक राज्यों में समान नागरिक कानूनों के समूह का समर्थन कर रहे हैं। इस संदर्भ में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी देशभर में यूसीसी लागू करने की मांग की थी। बस्ती जिले में बोलते हुए सरमा ने दलील दी थी कि मुस्लिम महिलाएं इस कानून के अभाव से सबसे अधिक प्रभावित हैं। उन्होंने बताया था कि बहुपत्ती प्रथा जैसे मुद्दों के निराकरण के लिए सामान्य कानून जरूरी है और असम में यूसीसी पहले ही नोटिफाई की जा चुकी है।
दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी राज्य में यूसीसी लागू करने की बात कही है। उन्होंने बताया था कि पश्चिम बंगाल उत्तराखंड और गुजरात के मार्ग पर चलकर समान नागरिक संहिता लागू करेगा। अधिकारी ने और आगे जोड़ा था कि, "हमें छह महीने दीजिए, हम लव जिहाद और लैंड जिहाद के खिलाफ कड़े कानून भी लाएंगे।" पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा यूसीसी के ड्रॉफ्ट की जांच करने के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति की रचना की गई है। सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पश्चिम बंगाल यूसीसी बिल का उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और दत्तक लेने जैसी बातों में सभी समुदायों में नागरिक कानूनों को प्रमाणित करना है। यह यूसीसी २०२६ की विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के मुख्य चुनाव वचनों में से एक था।
यूसीसी के विषय पर कानूनी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस संजय करोल ने भी इसे समय की आवश्यकता बताया है। भारत कलेक्टिव फाउंडेशन द्वारा आर्टिकल ४४ और यूसीसी पर आयोजित नेशनल लीगल डायलॉग के दौरान उन्होंने कहा था कि कानून में एकरूपता लाने के लिए केंद्रीय सिविल कोड होना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया था कि इस विषय पर अलग-अलग मत हो सकते हैं, परंतु सामान्य सिविल कोड होना चाहिए उस बात को लेकर वे दृढ़ थे।
अमित शाह का यह बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर भाजपा की रणनीति और प्राथमिकताओं को प्रतिबिंबित करता है। भाजपा के नेताओं द्वारा राज्यवार यूसीसी पर किए जा रहे इस दबाव से देशभर में समान नागरिक कानून के क्रियान्वयन को लेकर चर्चा फिर गरमाई है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की यह घोषणा राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि वह पार्टी के मुख्य एजेंडे के हिस्से के रूप में है।
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