महिलाओं की सुरक्षा के लिए एनएचआरसी ने केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों को एडवाइजरी जारी की
कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दो महीने में रिपोर्ट मांगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, दोपहर 1:28 · 4 मिनट का पाठ
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भारत के राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। यह एडवाइजरी दस केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को भेजी गई है। इस आयोग ने इन सिफारिशों के कार्यान्वयन के बारे में प्रगति जानने के लिए दो महीने के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया है।
एनएचआरसी ने नोट किया है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए देश में कड़े कानून होने के बावजूद, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी सुरक्षा अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। इस संबंध में सांख्यिकीय जानकारी देते हुए आयोग ने बताया कि, हालिया आवधिक श्रम बल भागीदारी सर्वेक्षण के अनुसार सितंबर 2026 में श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी 34.6% थी। दूसरी ओर, 2026 में प्रकाशित नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के विरुद्ध अपराध के लगभग 4.4 लाख मामले दर्ज किए गए थे। ये आंकड़े महिलाओं की सुरक्षा और सलामती सुनिश्चित करने में आ रही निरंतर चुनौतियों को दर्शाते हैं और इसके लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
आयोग के अनुसार, महिलाओं की सुरक्षा न्याय और समान अवसर प्राप्त करने के उनके संवैधानिक अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा एक ऐसी अनिवार्य शर्त है जो महिलाओं को श्रम बल में पूरी तरह से शामिल होने और उनकी क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए सक्षम बनाती है। एडवाइजरी में जो केंद्रीय मंत्रालय शामिल हैं उनमें महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, गृह मामले, सूचना और प्रसारण, श्रम और रोजगार, कॉर्पोरेट मामले, सड़क परिवहन और राजमार्ग, आवास और शहरी मामले तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय शामिल हैं।
NHRC द्वारा जारी की गई यह एडवाइजरी मुख्य रूप से आठ क्षेत्रों पर केंद्रित है। इसमें महिलाओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न के विषयों पर जागरूकता लाना, बुनियादी ढांचे में सुधार करना, किसी घटना के समय आसपास के लोगों द्वारा हस्तक्षेप या मध्यस्थता को बढ़ावा देना, पुलिस की भूमिका, पीड़ितों को सहायता प्रदान करना, महिलाओं के विरुद्ध साइबर अपराध से लड़ना, दीर्घकालिक सुधार और अन्य आवश्यक कदम उठाना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इस बीच, कोलकाता के बेहाला इलाके में तीन व्यक्तियों को अर्ध-वस्त्रों में सड़क पर घुमाए जाने की रिपोर्ट पर भी एनएचआरसी ने स्वतः संज्ञान (suo motu) लिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तीन आरोपियों को कमर पर रस्सी बांधकर अर्ध-वस्त्रों में सड़क पर घुमाया गया था। इस घटना के संदर्भ में आयोग ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को नोटिस देकर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के एक दिन पहले 18 वर्षीय युवक और उसके 19 वर्षीय मित्र को एक नाबालिग लड़की के परिजनों द्वारा पीटा गया था और अपमानित किया गया था। इसके बाद, तीनों को खुले रास्ते पर बंदूक के जोर पर घुमाए जाने की भी रिपोर्ट है। कोलकाता पुलिस ने 27 अक्टूबर के दिन दो पुरुषों को शर्ट के बिना और कमर पर रस्सी बांधकर घुमाया था, जो 26 अक्टूबर को तीन नग्न पुरुषों को घुमाने के आरोप में पकड़े गए थे। सिविल राइट्स संगठनों ने पुलिस के इस व्यवहार को लेकर सवाल उठाए हैं। इससे पहले 5 जून, 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी अवलोकन किया था कि पुलिस कार्रवाई कर सकती है लेकिन आरोपियों को बदनाम नहीं कर सकती।
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