निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थलों पर अनिश्चितकालीन कब्जा नहीं किया जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार केवल एक निश्चित अवधि के लिए हो सकता है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 11:29 · अपडेट सुबह 6:16 · 5 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि कोई भी व्यक्ति, समूह या संस्था निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चितकाल तक कब्जा जमाए रखने के अधिकार का दावा नहीं कर सकती। अदालत ने जोर देकर कहा कि अन्य लोगों को भी अपनी शिकायतें पेश करने का समान संवैधानिक अधिकार है और वे भी उसी सार्वजनिक स्थान का उपयोग कर सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने नोट किया कि निर्धारित स्थल पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति का अर्थ यह नहीं है कि वहां रहने का खुला लाइसेंस मिल गया है। अदालत ने कहा, "निर्धारित स्थल पर विरोध प्रदर्शन का अधिकार भी केवल एक निश्चित अवधि के लिए होता है। आप हमेशा के लिए विरोध स्थल पर कब्जा नहीं कर सकते... तो किसान, व्यापारी और पत्रकार कहां जाएंगे? हर किसी को विरोध करने का अधिकार है, इसलिए निर्धारित स्थल केवल निर्धारित अवधि के लिए ही दिए जाने चाहिए।"
अदालत ने आगे स्पष्ट किया कि अनुमति देने वाले आदेश में विरोध प्रदर्शन को मंजूरी देने या अस्वीकार करने के कारण बताए जाने चाहिए और यदि अनुमति दी जाती है, तो उस स्थल का उपयोग कितने समय तक किया जा सकता है, वह अवधि भी स्पष्ट होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि कोई व्यक्ति यह कहकर दूसरों को विरोध करने से नहीं रोक सकता कि 'मैं विरोध कर सकता हूं और आप नहीं कर सकते'।
ये टिप्पणियां जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आईं। इन याचिकाओं में सामूहिक हिरासत, पुलिस की ज्यादतियों, इंटरनेट पर प्रतिबंध और मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के आरोप लगाए गए थे। इन विरोध प्रदर्शनों में संसद की ओर कूच करने का प्रस्ताव था और हिंसा की घटनाएं भी हुई थीं।
दूसरी ओर, दिल्ली के व्यापारियों ने भी इन प्रदर्शनों को चुनौती दी थी। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी द्वारा प्रतिनिधित्व की गई किराना कमेटी दिल्ली और अन्य व्यापारिक संगठनों ने याचिका दायर की थी कि लंबे समय तक चलने वाले प्रदर्शनों के कारण व्यवसाय बाधित हुए हैं और उनकी आजीविका प्रभावित हुई है, विशेष रूप से त्योहारी सीजन के दौरान। रोहतगी ने बताया कि रामलीला मैदान कनॉट प्लेस के पास है, जहां लाखों निवासी और कई दुकानें तथा व्यावसायिक संस्थान स्थित हैं। उन्होंने अगले दो महीनों के लिए दिल्ली में अनुमति के साथ या बिना अनुमति के सभी विरोध प्रदर्शनों और धरनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।
पीठ ने आगाह किया कि इस विवाद को इस तरह से नहीं देखा जाना चाहिए कि किसी एक पक्ष को अपने अधिकारों का त्याग करना पड़े। अदालत ने कहा कि ये दो प्रतिस्पर्धी अधिकार हैं - एक तरफ व्यापार और आजीविका कमाने का अधिकार है और दूसरी तरफ शांतिपूर्वक विरोध करने का अधिकार है। अदालत ने आगे कहा कि आजीविका का अधिकार केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दैनिक मजदूर और छोटे व्यापारी भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि आगे बढ़ने का रास्ता यह है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए ऐसे सार्वजनिक स्थानों की पहचान की जाए जिससे दूसरों की आजीविका में बाधा न आए।
केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के लिए केवल एक दिन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने 17 दिनों तक स्थल पर कब्जा जमाए रखा और उसके बाद बिना अनुमति के संसद की ओर कूच करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बंद या विरोध का आयोजन करने वालों को उसके परिणामों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
अदालत ने रोहतगी से कहा है कि विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाली संस्थाओं को इस मामले में शामिल किया जाए, क्योंकि अंतिम निर्णय लेने से पहले उनकी प्रतिक्रिया आवश्यक है। साथ ही, व्यापारियों को हुए वित्तीय नुकसान का मूल्यांकन रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश भी दिया है। इस बीच, अदालत दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में रद्द कर प्रदर्शनों को रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड में स्थानांतरित करने के निर्णय की भी जांच कर रही है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला भी सुनाया है कि गिरफ्तारी के 24 घंटे की अवधि औपचारिक गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि व्यक्ति की हिरासत (detention) के समय से शुरू होती है।
इस समाचार का स्रोत
- The Times of India
- Hindustan Times
- The Hindu
- Scroll
- अमर उजाला
- India Today
- News18
- The Hindu
- दैनिक भास्कर
- સંદેશ (દેશ)
- ઇન્ડિયન એક્સપ્રેસ ગુજરાતી
- ટીવી9 ગુજરાતી
- Business Standard
- BusinessLine
- The Times of India
- अमर उजाला
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