भारत-पोलैंड ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य रखा
मोदी और टस्क ने रणनीतिक साझेदारी को व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी में विस्तारित करने पर सहमति जताई
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
22 अक्टूबर 2026, रात 8:30 · अपडेट सुबह 9:09 · 6 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर पोलैंड गणराज्य के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 21-23 अक्टूबर 2026 के दौरान भारत की आधिकारिक यात्रा की। उनके साथ लगभग 100 अग्रणी CEO और उद्योग प्रतिनिधियों का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल आया था। दोनों प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।
नेताओं ने अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने और 2024-2028 के लिए भारत-पोलैंड एक्शन प्लान अपनाने की घटना को याद किया। उन्होंने सितंबर 2026 में वॉरसॉ में हुई एक्शन प्लान की मध्यसत्र समीक्षा को मंजूरी दी। दोनों ने साझेदारी को ठोस, समयबद्ध और पारस्परिक लाभकारी परिणामों में बदलने का संकल्प व्यक्त किया।
भारत और पोलैंड ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। भारत ने पोलिश कंपनियों को भारत में निवेश और परिचालन बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया; टस्क ने पोलैंड को मध्य और पूर्वी यूरोप तथा व्यापक यूरोपीय बाजार में भारतीय व्यवसायों के लिए प्रवेश द्वार बताया। दोनों ने कृषि सहयोग बढ़ाने और द्विपक्षीय वर्किंग ग्रुप की गतिविधियों को फिर से शुरू करने पर सहमति दी। यात्रा के दौरान आयोजित भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम का स्वागत करके औद्योगिक मशीनरी, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मास्यूटिकल्स, खनन, निर्णायक खनिजों, ऊर्जा और ICT सहित क्षेत्रों में साझेदारी को प्रोत्साहन दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने USD 1 ट्रिलियन GDP का आंकड़ा पार करने पर पोलैंड को बधाई दी। पोलैंड ने भारत के तीव्र विकास और आगामी वर्षों में USD 10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के उसके मार्ग की प्रशंसा की। नेताओं ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर जल्द हस्ताक्षर, मंजूरी और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए आह्वान किया। उनके अनुसार यह व्यापार-निवेश के अवसर बढ़ाएगा, मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा और नए बाजार खोलेगा।
दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। सितंबर 2026 में वॉरसॉ में आयोजित रक्षा पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप की 8वीं बैठक के परिणामों का स्वागत करके नियमित आदान-प्रदान जारी रखने पर सहमति दी। रक्षा उद्योगों के बीच व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक सहयोग के अवसर खोजने और रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए ‘डिफेंस इंडस्ट्री डायलॉग’ विकसित करने के लिए प्रोत्साहन दिया। भारत-ईयू सिक्योरिटी एंड डिफेंस पार्टनरशिप पर जनवरी 2026 में हुए हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।
अंतरिक्ष सहयोग को रणनीतिक साझेदारी का मुख्य हिस्सा बताते हुए नेताओं ने संस्थागत और उद्योग-स्तर के जुड़ाव को प्रोत्साहित किया। सेमीकंडक्टर्स, AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप साझेदारी में सहयोगी अनुसंधान बढ़ाने पर सहमति दी। बैटरी रिसाइक्लिंग, दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के शुद्धिकरण, भूविज्ञान और खनन क्षेत्र में सहयोग के अवसर भी चर्चा में रहे; निर्णायक खनिजों को लेकर समझौता ज्ञापन बातचीत के अधीन है।
नेताओं ने भारत और पोलैंड के बीच सीधी विमान सेवाओं को बढ़ाने के अवसर खोजने और नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों के बीच सीधी बातचीत को प्रोत्साहित किया। शिपिंग, समुद्री सुरक्षा और बंदरगाहों के बीच सहयोग के महत्व को स्वीकार किया। भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) सहित कनेक्टिविटी सुधारने और ध्रुवीय मामलों में वैज्ञानिक सहयोग विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।
शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में क्राकोव की जगिएलोनियन यूनिवर्सिटी में भारतीय अध्ययन की ICCR चेयर का स्वागत किया गया। दोनों देशों की उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच संस्थागत साझेदारी, छात्रों और फैकल्टी के आदान-प्रदान तथा अनुसंधान बढ़ाने के लिए नेताओं ने प्रोत्साहन दिया। लोगों के बीच के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए खेल, युवा आदान-प्रदान और पर्यटन सहित सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति दी। भारत और पोलैंड के आर्काइव्स के अधिकारियों के बीच सहयोग समझौता पूर्ण हुआ और उस पर जल्द ही हस्ताक्षर होने वाले हैं।
वॉरसॉ में महाराजा जामसाहब और कोल्हापुर रियासत का स्मारक दोनों देशों के लोगों के बीच ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक होने की बात दोनों पक्षों ने कही। अक्टूबर 2026 में आयोजित संस्करण सहित जामसाहब मेमोरियल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के दो संस्करण आयोजित होने का उन्होंने उल्लेख किया। ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत यूक्रेन में फंसे 2,000 से अधिक भारतीय छात्रों को पोलिश अधिकारियों द्वारा दी गई सहायता को भी याद किया।
वैश्विक मुद्दों पर दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार की आवश्यकता जताई। पोलैंड ने सुधारे और विस्तारित UNSC में भारत की सदस्यता के साथ 2028-29 के लिए गैर-स्थायी सीट की दावेदारी का समर्थन किया। यूक्रेन में चल रहे युद्ध के मानवीय परिणामों पर चिंता व्यक्त करके अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार व्यापक, न्यायपूर्ण और लंबे समय की शांति की आवश्यकता को दोहराया।
नेताओं ने सभी रूपों के आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की निंदा की। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करके आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई, आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (CCIT) को जल्द अपनाने का आह्वान किया। आतंकवाद विरोधी संवाद करने पर भी सहमति दी।
दोनों देशों ने मुक्त, खुले और शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक, 1982 के UNCLOS और नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व को पुनः पुष्टि की। भारत ने पोलैंड को इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल विकास में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता भी जताई। भारत ने पोलैंड के CDRI में शामिल होने के निर्णय का स्वागत किया और उसे इंटरनेशनल सोलर अलायंस तथा ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
प्रधानमंत्री टस्क ने मिले आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और गहरा और विविधतापूर्ण बनाने तथा एक्शन प्लान (2024-2028) का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। टस्क ने प्रधानमंत्री मोदी को पोलैंड की यात्रा पर आने का निमंत्रण दिया।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद तेहरान में उग्र विरोध
ईरानियों ने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के विशाल पोस्टरों को जलाकर बदले की मांग की
हांगकांग के लोकतंत्र कार्यकर्ता जोशुआ वोंग को विदेशी मिलीभगत के लिए 10 साल की जेल
नेशनल सिक्योरिटी लॉ के तहत दूसरी बार दोषी ठहराए गए 30 वर्षीय कार्यकर्ता को सजा
दक्षिण अफ्रीका में स्थानीय चुनाव: भ्रष्टाचार और खराब सेवाओं के बीच ANC के सामने चुनौती
खराब सार्वजनिक सेवाओं और बढ़ती अपराध दर के कारण अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के समर्थन में बड़ी गिरावट की संभावना