केंद्र ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम को पांच साल बढ़ाया, नया नाम दिया
दिव्यांग पेंशन के लिए 40 प्रतिशत की पात्रता, आयु सीमा समाप्त और सहायता दर में वृद्धि
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
22 अक्टूबर 2026, रात 8:30 · अपडेट सुबह 9:53 · 3 मिनट का पाठ
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प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को 5 साल जारी रखने की मंजूरी दी है। 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए ₹53,428 करोड़ के प्रावधान के साथ मंजूरी दी गई है। कार्यक्रम अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के रूप में जाना जाएगा।
मंजूरी में कार्यक्रम और उसकी उप-योजनाओं के नाम बदलना, दिव्यांगता पेंशन में सुधार करना तथा अन्य उप-योजनाओं को वर्तमान स्वरूप में जारी रखना शामिल है। वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना में बदलाव नहीं होगा। ये योजनाएं अब क्रमशः प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना, प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना और प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना के रूप में जानी जाएंगी। दिव्यांगता पेंशन का नाम प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना किया गया है।
दिव्यांगता पेंशन के लिए पहले 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता और कम से कम 18 वर्ष की आयु आवश्यक थी। अब 2016 के दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम में निर्धारित 40 प्रतिशत की बेंचमार्क दिव्यांगता पात्रता का आधार बनेगी और न्यूनतम आयु की शर्त हटा दी गई है; पात्रता जन्म से लागू होगी। 79 वर्ष तक के लाभार्थियों के लिए केंद्रीय सहायता ₹300 से बढ़ाकर ₹375 और 80 वर्ष तथा उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए ₹500 से बढ़ाकर ₹625 की गई है। इस उप-योजना के लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख हो जाएगी।
दिव्यांगता का प्रमाण पत्र, परिवार के गरीबी रेखा से नीचे होने की शर्त और राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग के माध्यम से आवेदन करने की व्यवस्था यथावत रहेगी। पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता की दरों के संबंध में संशोधित दिशानिर्देश 3 महीने के भीतर जारी कर लागू किए जाएंगे।
कार्यक्रम 15 अगस्त 1995 को शुरू हुआ था और यह ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को कवर करता है। यह 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता वाली केंद्र प्रायोजित योजना है। वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए मासिक पेंशन के अलावा परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु पर एकमुश्त लाभ दिया जाता है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश योजनाओं का कार्यान्वयन करते हैं; लाभार्थियों की पहचान करने में ग्राम पंचायतें और नगरपालिकाएं भी भाग लेती हैं तथा भुगतान अधिकतर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से होता है।
यह कार्यक्रम 2025-26 में लगभग 3.09 करोड़ लाभार्थियों को कवर करता था। 14 अक्टूबर 2026 की मंजूरी से सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कवरेज बढ़कर 3.20 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच जाएगा।
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