दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने को NHAI तैयार: 60 स्प्रिंकलर और 14 एंटी-स्मॉग गन तैनात
राष्ट्रीय राजमार्गों पर 900 से अधिक श्रमिक और 23 स्वीपिंग मशीनें काम पर लगाई गईं, 9.80 लाख पौधे लगाए
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
22 अक्टूबर 2026, रात 8:30 · अपडेट सुबह 10:09 · 2 मिनट का पाठ
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नई दिल्ली :: सर्दियों के आगमन से पहले दिल्ली-एनसीआर में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर वायु प्रदूषण नियंत्रण को सघन बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा धूल नियंत्रण के कड़े कदम उठाए गए हैं। इसके अंतर्गत लगभग 60 वाटर स्प्रिंकलर और टैंकर, 14 एंटी-स्मॉग गन, 23 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन, दो ट्रैक्टर-माउंटेड ब्रूमर और 900 से अधिक श्रमिकों को तैनात किया गया है। इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 157 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्सों पर 13 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें संचालित हो रही हैं।
NHAI के तकनीकी सदस्य श्री आलोक दीपांकर ने प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा की। उन्होंने फील्ड टीमों को सभी उपकरणों, श्रमिकों और पानी के छिड़काव की पूर्ण तैनाती, एंटी-स्मॉग गन के नियमित संचालन और दैनिक मैकेनिकल स्वीपिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के कड़े पालन पर जोर दिया, जिसमें निर्माण सामग्री को ढंकना, धूलमुक्त सड़क की सतह बनाए रखना और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के अनुसार सख्त कदम उठाना शामिल है। अधिकारियों को दैनिक गतिविधियों पर नजर रखने और जियो-टैग वाले फोटोग्राफ के साथ प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
पर्यावरणीय पहल के हिस्से के रूप में NHAI द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 9.52 लाख के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 9.80 लाख पौधे लगाए गए हैं, जिसमें पेड़ों के जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत से अधिक रही है। इसके अलावा दिल्ली के लैंडफिल स्थलों से लगभग 13.58 लाख टन अक्रिय कचरे का उपयोग यूईआर-II और डीएनडी-सोहना कॉरिडोर के तटबंध निर्माण में किया गया है।
इस समीक्षा बैठक में अर्बन एक्सटेंशन रोड-II, द्वारका एक्सप्रेसवे, डीएनडी-सोहना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित प्रमुख ट्रैफिक नियमन परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। ये परियोजनाएं वाहनों के उत्सर्जन और ट्रैफिक जाम को कम करने में मददगार साबित होंगी। साथ ही ग्रीन दिल्ली ऐप और सोशल मीडिया पर मिलने वाली शिकायतों के त्वरित निपटान पर भी जोर दिया गया।
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