शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' का शुभारंभ किया
रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को रोकने के लिए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशभर में जन-जागरूकता अभियान चलेगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
22 अक्टूबर 2026, रात 8:30 · अपडेट सुबह 9:53 · 2 मिनट का पाठ
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नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के करनाल जिले के ऐतिहासिक नगर तरावड़ी से राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' का औपचारिक शुभारंभ किया है। देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों और संस्थानों से वर्चुअली जुड़े लाखों किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग नहीं रुका, तो धरती फसल पैदा करने से मना कर देगी और मानव शरीर रोगों का घर बन जाएगा। उन्होंने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच देश के हर गांव में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में उन्होंने हरियाणा को बड़ी सौगात देते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 28,422 पक्के मकानों के निर्माण के लिए ₹1,343.06 करोड़ की वित्तीय मंजूरी का पत्र हरियाणा के कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा को सौंपा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक के दाम बढ़ने के बावजूद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ₹डेढ़ लाख करोड़ से अधिक की सब्सिडी वहन कर रही है, ताकि किसानों को यूरिया की थैली मात्र ₹266 और डीएपी ₹1350 में मिले। हालांकि, सस्ता उर्वरक मिलने का मतलब यह नहीं है कि खेतों में इसका अंधाधुंध उपयोग किया जाए। जमीन में जरूरत से ज्यादा उर्वरक डालना जमीन में जहर मिलाने के समान है। भारत अब ग्रीन अमोनिया के उपयोग की ओर बढ़ रहा है और भविष्य में उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा।
श्री चौहान ने जमीन की सुरक्षा के लिए तीन महत्वपूर्ण उपाय सुझाए: पहला, किसान सॉयल हेल्थ कार्ड देखकर ही आवश्यकतानुसार संतुलित उर्वरक डालें। दूसरा, फसल चक्र में बदलाव करके धान-गेहूं के बीच चना, मसूर या अरहर जैसी दलहन फसलें उगाएं, जो प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन बढ़ाती हैं। तीसरा, किसान कम से कम आधे एकड़ में बीजामृत और घनजीवामृत बनाकर प्राकृतिक खेती शुरू करें। उन्होंने पराली जलाने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि पराली जलाने से केंचुए और उपयोगी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं।
इस कार्यक्रम में आईसीएआर के महानिदेशक तथा डेयर के सचिव डॉ. मांगीलाल जाट, हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि) विजेंद्र कुमार सहित अन्य वैज्ञानिक और किसान उपस्थित थे। मंच से 'खेत बचाओ अभियान' पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
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