राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में पुलिस स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शहीद स्मारक दीवार, डिजिटल डैशबोर्ड और फायरिंग सिम्युलेटर लैब का उद्घाटन किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
21 अक्टूबर 2026, रात 8:30 · अपडेट सुबह 10:40 · 3 मिनट का पाठ
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गांधीनगर, 21 अक्टूबर - राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में राष्ट्र की एकता, अखंडता, शांति और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिस जवानों की स्मृति में पुलिस स्मृति दिवस मनाया गया। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों के समर्पण को नमन किया।
राज्यपाल ने कहा कि देश में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जीवन की परवाह किए बिना बलिदान देने वाले शहीदों के प्रति पूरा राष्ट्र सदैव ऋणी रहेगा। उन्होंने संतानों को राष्ट्रसेवा में समर्पित करने वाले और उन्हें कर्तव्य के प्रति निष्ठा के संस्कार देने वाले परिजनों के प्रति संवेदना और आदर व्यक्त किया।
विश्वविद्यालय परिसर में शहीदों की स्मृति को संजोने और आने वाली पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देने के लिए शहीद स्मारक दीवार का उद्घाटन किया गया। गुजरात पुलिस के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष डिजिटल डैशबोर्ड और फायरिंग सिम्युलेटर लैब का भी लॉन्च किया गया। राज्यपाल ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे स्मारक युवाओं के लिए राष्ट्रप्रेम और समर्पण की प्रेरणा के केंद्र बनते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदीजी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल के दौरान देश में सर्वप्रथम चिल्ड्रन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी, टीचर्स यूनिवर्सिटी, कामधेनु यूनिवर्सिटी, गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाएं स्थापित करने की पहल की थी। उनके अनुसार, ये संस्थाएं वर्ष 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने के मिशन में नींव की मजबूत ईंटें साबित होंगी।
उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों को आधुनिक सुरक्षा, साइबर क्राइम और समय की आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षण दे रहा है। भारत अहिंसा, शांति, सहिष्णुता और भाईचारे में विश्वास रखता है, लेकिन शांति और सत्य की रक्षा के लिए सक्षम होना भी आवश्यक है, ऐसा उन्होंने कहा। कायरता और कमजोरी से शांति नहीं बनी रहती; दुष्ट तत्वों के सामने आत्मरक्षा और राष्ट्ररक्षा के लिए मजबूत होना वीरता का सच्चा आभूषण है। उन्होंने युवा पीढ़ी और प्रशिक्षुओं को ‘माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः’ के भाव के साथ मातृभूमि की सेवा के लिए तत्पर रहने का आह्वान किया।
राज्यपाल के हाथों फिजिकल एडवेंचर वॉल का उद्घाटन किया गया और जेल सहायक के रूप में परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले जवानों को सर्टिफिकेट प्रदान किए गए।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति श्री विमल पटेल ने शहीद पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस बलों तथा सुरक्षा संस्थाओं के योगदान की सराहना की। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संस्थाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सबूतों से लैस होने पर उन्होंने जोर दिया।
कार्यक्रम में प्रो-वाइस चांसलर प्रो. कल्पेश वांडरा, डीन डॉ. जसबीर कौर ठडाणी, रजिस्ट्रार श्री धर्मेश प्रजापति, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षु, पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रतिनिधि तथा शहीदों के परिजन उपस्थित रहे।
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