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लिथियम-आयन बैटरी: इलेक्ट्रिक वाहनों की क्रांति और आधुनिक ऊर्जा का रसायनशास्त्र

1991 से अब तक बैटरी की कीमत में दस गुना कमी आई है और क्षमता तीन गुना बढ़ी है। जानिए कैसे यह 'रॉकिंग-चेयर' तकनीक पूरी दुनिया का भविष्य बदल रही है।

आवतीकाल AI डेस्क29 अक्टूबर 2026 · 6 मिनट का पाठ
यह तस्वीर शोरूम में खड़ी एक चमकदार लाल स्पोर्ट्स कार को दर्शाती है, जो इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति और लिथियम-आयन बैटरी के महत्व का प्रतीक है।
यह तस्वीर शोरूम में खड़ी एक चमकदार लाल स्पोर्ट्स कार को दर्शाती है, जो इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति और लिथियम-आयन बैटरी के महत्व का प्रतीक है।
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आज के आधुनिक युग में हमारे आसपास मौजूद स्मार्टफोन, लैपटॉप से लेकर सड़कों पर दौड़ने वाली इलेक्ट्रिक वाहनों (electric vehicles) तक की तमाम टेक्नोलॉजी का मुख्य आधार लिथियम-आयन बैटरी है। लिथियम-आयन बैटरी फिर से चार्ज की जा सकने वाली रीचार्जेबल (rechargeable) बैटरी का एक प्रकार है। यह ऊर्जा के भंडारण के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से संवाहक ठोस पदार्थों में लिथियम आयनों के रिवर्सिबल इंटरकॅलेशन (reversible intercalation) यानी आयनों के अंदर और बाहर जाने की रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग करती है।

सन 1991 में जब लिथियम-आयन बैटरी की पहली व्यावसायिक बिक्री शुरू हुई थी, तब से लेकर अब तक के तीन दशकों में इसकी आयतन आधारित ऊर्जा घनत्व यानी वॉल्यूमेट्रिक एनर्जी डेंसिटी (volumetric energy density) में तीन गुना वृद्धि हुई है। इसी समयावधि में इसके उत्पादन की लागत में दस गुना कमी दर्ज की गई है। सन 2024 के अंत तक, दुनियाभर में लिथियम-आयन बैटरी की वार्षिक मांग 1 टेरावाट-घंटे (terawatt-hour) को पार कर चुकी है, जबकि वैश्विक उत्पादन क्षमता इस मांग से दोगुनी से भी अधिक पहुंच गई है।

1991 से अब तक लिथियम-आयन बैटरी के विकास के मुख्य आंकड़ेस्रोत: विकिपीडिया लेख
ऊर्जा घनत्व (Energy Density) वृद्धि3
उत्पादन लागत में कमी10

ગણો ફેરફાર

इस तकनीक के क्रांतिकारी प्रभाव को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019 में रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Chemistry) लिथियम-आयन बैटरी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को प्रदान किया गया था। इन बैटरियों ने न केवल पोर्टेबल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स को ही संभव बनाया है, बल्कि पावर ग्रिड के लिए ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज तथा रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भी एक बड़ी क्रांति ला दी है।

लिथियम बैटरी का इतिहास और नोबेल विजेताओं की खोज

लिथियम-आयन बैटरी का इतिहास 1970 के दशक में शुरू हुआ था, जब एम. स्टैनली व्हिटिंगहैम (M. Stanley Whittingham) नामक वैज्ञानिक ने इंटरकॅलेशन इलेक्ट्रोड्स का विचार प्रस्तुत किया था। उन्होंने टाइटेनियम डिस्सल्फाइड (titanium disulfide) कैथोड और लिथियम-एल्युमिनियम एनोड पर आधारित पहली रीचार्जेबल लिथियम बैटरी बनाई थी। हालांकि, इसमें सुरक्षा से जुड़ी कमियां होने के कारण इसका व्यवसायीकरण नहीं हो सका था।

इसके बाद वर्ष 1980 में जॉन गुडएनफ (John Goodenough) ने इस अनुसंधान को आगे बढ़ाया और कैथोड के रूप में लिथियम कोबाल्ट ऑक्साइड (lithium cobalt oxide) का उपयोग करके बैटरी की क्षमता में बड़ा सुधार किया। वर्ष 1985 में अकीरा योशिनो (Akira Yoshino) ने शुद्ध लिथियम धातु के बजाय कार्बनयुक्त पदार्थ यानी ग्रेफाइट का एनोड के रूप में उपयोग करके आधुनिक लिथियम-आयन बैटरी का पहला प्रोटोटाइप तैयार किया।

इन अनुसंधानों के आधार पर Sony और Asahi Kasei की संयुक्त टीम ने योशियो निशी (Yoshio Nishi) के नेतृत्व में वर्ष 1991 में पहली व्यावसायिक लिथियम-आयन बैटरी बाजार में उतारी। इन तीनों वैज्ञानिकों व्हिटिंगहैम, गुडएनफ और योशिनो को मानवता को यह क्रांतिकारी साधन देने के वास्ते 2019 का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।

बैटरी कैसे काम करती है? 'रॉकिंग-चेयर' कार्यप्रणाली

लिथियम-आयन बैटरी के भीतर रसायनशास्त्र का एक सुंदर सिद्धांत काम करता है। बैटरी के अंदर मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं: धन इलेक्ट्रोड जिसे कैथोड (cathode) कहा जाता है, ऋण इलेक्ट्रोड जिसे एनोड (anode) कहा जाता है, और उनके बीच मौजूद तरल जो इलेक्ट्रोलाइट (electrolyte) के रूप में जाना जाता है। अधिकांश कमर्शियल बैटरियों में एनोड के रूप में ग्रेफाइट (graphite) का उपयोग होता है, जिसमें क्षमता बढ़ाने के लिए अक्सर सिलिकॉन मिलाया जाता है।

लिथियम-आयन बैटरी की चार्जिंग और डिस्चार्जिंग प्रक्रियाइलेक्ट्रॉन बाहरी सर्किट में और लिथियम आयन इलेक्ट्रोलाइट में गति करते हैं।
  1. डिस्चार्जिंग (ऊर्जा की खपत)ग्रेफाइट एनोड पर ऑक्सीकरण होने पर लिथियम आयन मुक्त होकर इलेक्ट्रोलाइट के जरिए कैथोड की तरफ जाते हैं और इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ में विद्युत प्रवाह बनाते हैं।
  2. कैथोड पर प्रक्रियाबाहरी परिपथ से आने वाले इलेक्ट्रॉन और इलेक्ट्रोलाइट से आने वाले लिथियम आयन कैथोड मटेरियल के साथ पुनर्संयोजित होते हैं।
  3. चार्जिंग (ऊर्जा का भंडारण)बाहर से विद्युत ऊर्जा देने पर लिथियम आयन कैथोड से डी-इंटरकैलेट होकर एनोड की ग्रेफाइट परतों में वापस व्यवस्थित हो जाते हैं।

बैटरी जब डिस्चार्ज (discharge) हो रही होती है, यानी जब वह वाहन या फोन को पावर दे रही होती है, तब ऋण इलेक्ट्रोड (एनोड) पर ऑक्सीकरण (oxidation) की प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया से धन आवेशित लिथियम आयन और ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं। लिथियम आयन बैटरी के आंतरिक इलेक्ट्रोलाइट माध्यम से गुजरकर कैथोड की ओर जाते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन बाहरी सर्किट (external circuit) से गुजरकर कैथोड तक पहुंचते हैं।

चार्जिंग (charging) करते समय बाहरी पावर सप्लाई इलेक्ट्रॉनों को धन इलेक्ट्रोड से ऋण इलेक्ट्रोड की ओर जाने के लिए मजबूर करती है। लिथियम आयन कैथोड से निकलकर इलेक्ट्रोलाइट के माध्यम से फिर से ग्रेफाइट एनोड की परतों के भीतर व्यवस्थित हो जाते हैं। लिथियम आयन दोनों इलेक्ट्रोडों के बीच झूले की तरह आगे-पीछे गति करते हैं इसलिए इसे वैज्ञानिक भाषा में 'रॉकिंग-चेयर बैटरी' (rocking-chair battery) भी कहा जाता है।

तकनीकी आंकड़े और रासायनिक प्रकार

लिथियम-आयन सेल का नॉमिनल वोल्टेज (nominal voltage) 3.6 V या 3.7 V होता है। रसायनशास्त्र की दृष्टि से, लिथियम का प्रत्येक ग्राम 13,901 कूलॉम (coulombs) का आवेश रखता है। 3 वोल्ट के वोल्टेज पर यह क्षमता प्रति ग्राम लिथियम 41.7 किलोजूल (kJ) या प्रति किलोग्राम लिथियम पर 11.6 किलोवाट-घंटे (kWh) ऊर्जा के बराबर होती है। यह ऊर्जा गैसोलीन के दहन से मिलने वाली ऊर्जा से भी थोड़ी अधिक है, लेकिन बैटरी में प्रयुक्त अन्य सामग्रियों के वजन के कारण पूरी बैटरी प्रणाली भारी हो जाती है।

विभिन्न बैटरी केमिस्ट्री की तुलना और उपयोगप्रत्येक प्रकार के कैथोड मटेरियल के आधार पर बैटरी की विशेषताएं तय होती हैं।
केमिस्ट्रीकैथोड सामग्रीमुख्य उपयोगमुख्य विशेषता
LCOलिथियम कोबाल्ट ऑक्साइडस्मार्टफोन, लैपटॉपऊंची एनर्जी डेंसिटी
LFPलिथियम आयरन फॉस्फेटइलेक्ट्रिक वाहन, ग्रिड स्टोरेजलंबी साइकिल लाइफ और अधिक सुरक्षा
NMCलिथियम निकेल मैंगनीज कोबाल्टइलेक्ट्रिक वाहन (EVs)उच्च डिस्चार्ज रेट और संतुलित पावर
NCAलिथियम निकेल कोबाल्ट एल्युमिनियमप्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहनअत्यंत उच्च ऊर्जा क्षमता

लिथियम-आयन बैटरियों को उनके कैथोड में प्रयुक्त सामग्री के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे उपकरणों में लिथियम कोबाल्ट ऑक्साइड (LiCoO2) का उपयोग होता है जो उच्च ऊर्जा घनत्व प्रदान करता है। जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लिथियम निकेल मैंगनीज कोबाल्ट ऑक्साइड (NMC) और लिथियम निकेल कोबाल्ट एल्युमिनियम ऑक्साइड (NCA) का उपयोग किया जाता है।

शॉर्ट सर्किट के कारण विफलता होने पर अत्यधिक फूली हुई आईफोन 3GS की लिथियम-आयन पॉलीमर बैटरी।
शॉर्ट सर्किट के कारण विफलता होने पर अत्यधिक फूली हुई आईफोन 3GS की लिथियम-आयन पॉलीमर बैटरी। (Mpt-matthew, CC BY-SA 3.0, Wikimedia Commons)

वर्तमान समय में लिथियम आयरन फॉस्फेट (LiFePO4 या LFP) केमिस्ट्री भी बहुत लोकप्रिय हो गई है। LFP में महंगे कोबाल्ट का उपयोग नहीं होता है, इसलिए इसे अधिक सस्ती, सुरक्षित और लंबा जीवन देने वाली बैटरी माना जाता है।

बोइंग 787 विमान के ऑक्सिजलरी पावर यूनिट में आग लगने के बाद जलकर खाक हुई लिथियम बैटरी।
बोइंग 787 विमान के ऑक्सिजलरी पावर यूनिट में आग लगने के बाद जलकर खाक हुई लिथियम बैटरी। (National Transportation Safety Board, Public domain, Wikimedia Commons)

सुरक्षा की चुनौतियां, पर्यावरण और भविष्य की तकनीक

लिथियम-आयन बैटरियां अत्यंत कुशल होने के बावजूद, इनमें कुछ सुरक्षा संबंधी सीमाएं मौजूद हैं। बैटरी के अंदर मौजूद तरल इलेक्ट्रोलाइट ज्वलनशील ऑर्गेनिक कार्बोनेट का मिश्रण होता है। यदि बैटरी ओवरचार्ज हो जाए (जैसे 5.2 वोल्ट से अधिक) या फिर आंतरिक शॉर्ट सर्किट हो जाए, तो थर्मल रनवे (thermal runaway) की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे बैटरी फूल जाती है या उसमें विस्फोट होकर आग लग सकती है।

ऑपरेशनल स्ट्रेस फैक्टर्स और समय के साथ बैटरी के क्षय (Degradation) के कारणों का चार्ट विश्लेषण।
ऑपरेशनल स्ट्रेस फैक्टर्स और समय के साथ बैटरी के क्षय (Degradation) के कारणों का चार्ट विश्लेषण। (Vermeer, W.; Mouli, G. R. C.; Bauer, P., CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

बैटरी के अत्यधिक डिस्चार्जिंग से लिथियम ऑक्साइड और कोबाल्ट ऑक्साइड बनते हैं, जो अपरिवर्तनीय (irreversible) क्षय होने के कारण बैटरी को स्थायी नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा निरंतर उपयोग, चार्जिंग साइकिल और तापमान के कारण बैटरी के प्रदर्शन में समय के साथ गिरावट आती है।

AAA साइज की Li-ion बैटरी से गैल्वेनोस्टैटिक इंटरमिटेंट टाइट्रेशन तकनीक द्वारा प्राप्त GITT डेटा आलेख।
AAA साइज की Li-ion बैटरी से गैल्वेनोस्टैटिक इंटरमिटेंट टाइट्रेशन तकनीक द्वारा प्राप्त GITT डेटा आलेख। (Smilin8Budda, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

पर्यावरणीय दृष्टि से भी लिथियम और कोबाल्ट का खनन चिंता का विषय है। लिथियम निष्कर्षण के लिए शुष्क प्रदेशों में बड़े पैमाने पर पानी की खपत होती है। इन समस्याओं के समाधान के लिए शोधकर्ता अब सॉलिड-स्टेट बैटरी (solid-state batteries) विकसित कर रहे हैं जिनमें ज्वलनशील तरल के स्थान पर ठोस इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग होगा। इसके अलावा सोडियम-आयन (sodium-ion) और आयरन-एयर (iron-air) जैसी नई केमिस्ट्री पर भी अनुसंधान जारी है।

स्रोत

  1. Wikipedia

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