Horizon Europe के साथ वैश्विक विज्ञान साझेदारी: भारत और यूरोप के बीच अनुसंधान के नए क्षितिज
यूरोपीय संघ के 95.5 अरब यूरो के भव्य अनुसंधान कार्यक्रम Horizon Europe से जुड़ने से भारतीय वैज्ञानिकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम करने के नए द्वार खुल गए हैं।

वैज्ञानिक क्षितिज का नया अध्याय
विज्ञान और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर हो रहे तेज़ बदलावों के बीच भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच का संबंध एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। यूरोपीय यूनियन का सबसे महत्त्वाकांक्षी सात साल का वैज्ञानिक कार्यक्रम Horizon Europe वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और नवाचार का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। यह कार्यक्रम केवल यूरोप तक सीमित न रहते हुए दुनियाभर के अग्रणी देशों को एक साथ लाने के लिए ढाँचा प्रदान करता है। भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा इसके अग्रणी संस्थान अंतरराष्ट्रीय सहयोग के इस मंच पर सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं।
यह पहल सामान्य वैज्ञानिक आदान-प्रदान से कहीं बड़ी है। दुनिया आज जब जलवायु परिवर्तन, कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों, टिकाऊ ऊर्जा और जैवविविधता के खतरों से जूझ रही है, तब कोई एक देश अकेले दम पर इन चुनौतियों को हल नहीं कर सकता। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग एक रणनीतिक अनिवार्यता बन गया है। Horizon Europe में सहयोगी देश (associated country) बनने से या विशिष्ट परियोजनाओं में भागीदारी करने से भारतीय वैज्ञानिकों को यूरोप की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और संसाधनों तक सीधी पहुँच मिलती है।
Horizon Europe का स्वरूप और बजट
Horizon Europe यूरोपीय यूनियन का 9वाँ रिसर्च एंड टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट फ्रेमवर्क प्रोग्राम (FP9) है, जिसने वर्ष 2014 से 2020 तक चले Horizon 2020 (FP8) का स्थान लिया है। इस कार्यक्रम को वर्ष 2021 से 2027 तक की सात साल की अवधि के लिए अमल में लाया गया है। यूरोपीय कमीशन की मूल योजना विज्ञान खर्च में पिछले दशक की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि करने की थी, ताकि यूरोप भविष्य की चुनौतियों के खिलाफ तैयार हो सके।
वित्तीय आँकड़ों की बात करें तो इस कार्यक्रम का कुल बजट €95.5 अरब तय किया गया है, जो इसके पूर्ववर्ती Horizon 2020 के €77 अरब के बजट से काफी अधिक है। मई 2018 में जब Horizon Europe का प्रस्ताव रखा गया था तब कुल €100 अरब के खर्च का प्रस्ताव पेश किया गया था। उसमें से €2.4 अरब यूरोटम (Euratom) परमाणु अनुसंधान कार्यक्रम के लिए और €3.6 अरब InvestEU नामक निवेश फंड के लिए अलग रखे गए थे। सालाना 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए 2018 के मूल्य के अनुसार यह फंड €86.6 अरब होता था।
અબજ યુરો
यह फंड पूरा करने के लिए यूरोपीय कमीशन ने कृषि और क्षेत्रीय विकास के बजट में 5 प्रतिशत की कटौती करने का प्रस्ताव रखा था। हालाँकि यह प्रक्रिया आसान नहीं थी। नीदरलैंड्स के तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्क रुट्टे ने मई 2018 में इस ड्राफ्ट बजट को अस्वीकार्य बताया था। यूरोपीय कमिश्नर कार्लोस मोएदास ने विज्ञान बजट बढ़ाने के लिए अमेरिकी शैली के मूनशॉट (moonshot - अत्यंत साहसिक और महत्त्वाकांक्षी मिशन) के विचार को अमल में लाया था। यूरोपीय संसद और सदस्य देशों के बीच लंबी वार्ताओं के अंत में €95.5 अरब के बजट पर सहमति बनी थी।
पांच बड़े मिशन और वैश्विक लक्ष्य
Horizon Europe की पूरी कार्यप्रणाली केवल सामान्य ग्रांट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने समाज के सामने मौजूद पांच सबसे गंभीर चुनौतियों को केंद्र में रखकर पांच मुख्य मिशन तय किए हैं। ये पांचों मिशन वर्ष २०३० तक ठोस परिणाम हासिल करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
पहला मिशन जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (Adaptation to Climate Change) का है, जिसके तहत कम से कम १५० क्षेत्रों और समुदायों को २०३० तक जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीला बनाने का लक्ष्य है। दूसरा मिशन कैंसर रोग के खिलाफ लड़ाई है, जो Europe's Beating Cancer Plan के साथ समन्वय बिठाकर २०३० तक ३० लाख से अधिक मरीजों के जीवन में सुधार लाने, समय पर जांच और उपचार पद्धतियों को विकसित करने के लिए कार्यरत है। तीसरा मिशन समुद्रों और जल स्रोतों के संरक्षण का है, जबकि चौथा मिशन १०० स्मार्ट और जलवायु-तटस्थ (Climate-Neutral) शहर बनाना है।
| मिशन क्षेत्र | २०३० तक का विशिष्ट लक्ष्य |
|---|---|
| जलवायु परिवर्तन अनुकूलन | कम से कम १५० यूरोपीय प्रदेशों को क्लाइमेट रेजिलिएंट बनाना |
| कैंसर नियंत्रण | ३० लाख से अधिक रोगियों के जीवन में सुधार और निवारण |
| महासागरों और जल स्रोतों | जल संसाधनों और समुद्री परिस्थितियों का पुनर्स्थापना |
| स्मार्ट और क्लाइमेट-न्यूट्रल शहर | १०० पूर्ण कार्बन-तटस्थ स्मार्ट शहर तैयार करना |
| यूरोप के लिए जमीन करार (Soil Deal) | स्वस्थ जमीन की ओर ले जाने वाले १०० लिविंग लेब्स की स्थापना |
पांचवां मिशन यूरोप के लिए सॉइल डील (A Soil Deal for Europe) के रूप में जाना जाता है, जिसमें स्वस्थ भूमि तैयार करने के लिए १०० प्रायोगिक जीवंत प्रयोगशालाएं स्थापित करने का लक्ष्य है। ये सभी मिशन केवल यूरोप के भौगोलिक क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि भारत जैसे विशाल कृषि प्रधान और समुद्र तट वाले देश के लिए भी बेहद प्रासंगिक हैं।
सहयोगी प्रोजेक्ट्स की रचना और कार्यपद्धति
Horizon Europe के तहत दुनिया भर के अनुसंधान समूह विभिन्न प्रकार की योजनाओं के माध्यम से ग्रांट प्राप्त कर सकते हैं। इस ग्रांट का प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया गया है ताकि वैज्ञानिकों का समय कागजी कार्रवाई में बर्बाद न हो। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता मुख्य रूप से चार प्रकार की सहयोगी योजनाओं में काम करते हैं।
- संयुक्त कोल और विषय चयनयूरोपीय कमीशन पांच मुख्य मिशन के तहत विशिष्ट वैज्ञानिक क्षेत्रों के लिए ग्रांट की घोषणा करता है।
- कंसोर्टियम रचनासભ્ય देशों और गैर-यूरोपीय देशों के संशोधक एकसाथ मिलकर संयुक्त प्रोजेक्ट टीम (consortium) बनाते हैं।
- प्रस्ताव और फंड मंजूरीस्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्ता जांचने के बाद रिसर्च एंड इनोवेशन एक्शन (RIA) के तहत ग्रांट आवंटित की जाती है।
- प्रौद्योगिकी और डेटा आदान-प्रदानअनुसंधान के दौरान प्रयोगशालाओं, जैव प्रौद्योगिकी और औद्योगिक जानकारी की सहियरी हिस्सेदारी होती है।
पहला प्रकार रिसर्च एंड इनोवेशन एक्शन (Research and Innovation Action - RIA) है, जिसका मुख्य उद्देश्य नया ज्ञान प्राप्त करना और अत्याधुनिक तकनीक की संभावनाओं को जांचना है। दूसरा प्रकार इनोवेशन एक्शन (Innovation Action - IA) है, जो अनुसंधान को प्रयोगशाला से बाहर लाकर सीधे बाजार तक पहुंचाने के लिए है। तीसरा प्रकार कोऑर्डिनेशन एंड सपोर्ट एक्शन (Coordination and Support Action - CSA) है, जो सहयोगी देशों के बीच समन्वय स्थापित करता है। चौथा प्रकार प्रोग्राम को-फंड एक्शन (COFUND) है, जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र संयुक्त रूप से प्रोजेक्ट में फंडिंग करते हैं।

गैर-यूरोपीय देशों के लिए Horizon Europe के साथ जुड़ाव दो तरीकों से संभव होता है। पहला रास्ता एसोसिएटेड मेंबर (Associated Member) बनने का है। एसोसिएटेड देश कार्यक्रम के बजट में एक निश्चित वित्तीय हिस्सा जमा कराते हैं और इसके बदले में उनके वैज्ञानिकों और संस्थानों को यूरोपीय संघ के सदस्य देशों जितने ही पूर्ण अधिकार और समान ग्रांट प्राप्त करने का अवसर मिलता है। ब्रिटेन ने ब्रेक्ज़िट के बाद विवाद पैदा होने के बाद आखिरकार १ जनवरी २०२४ से फिर से Horizon Europe में आधिकारिक जुड़ाव हासिल कर लिया है।
| प्रोजेक्ट प्रकार | मुख्य उद्देश्य और कार्यक्षेत्र |
|---|---|
| रिसर्च एंड इनोवेशन एक्शन (RIA) | नया ज्ञान प्राप्त करना और नवीन प्रौद्योगिकी या प्रक्रियाओं की खोज करना |
| इनोवेशन एक्शन (IA) | अनुसंधान को बाजार के करीब ले जाकर नई प्रोडक्ट्स या सेवाएं तैयार करना |
| कोऑर्डिनेशन एंड सपोर्ट एक्शन (CSA) | अनुसंधान संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना और अनुसंधान ढांचा मजबूत करना |
| प्रोग्राम को-फंड एक्शन (COFUND) | सार्वजनिक और निजी भागीदारों के साथ मिलकर बहु-वार्षिक संयुक्त फंडिंग प्रदान करना |
दूसरा रास्ता एक गैर-संबद्ध तीसरे देश के रूप में भाग लेना है। इस श्रेणी में आने वाले देशों के शोधकर्ता यूरोपीय कंसोर्टियम के साथ जुड़कर काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें सीधे यूरोपीय फंडिंग नहीं मिलती है, सिवाय इसके कि जब विशिष्ट अपवादात्मक शर्तें पूरी होती हों। इन परिस्थितियों में भाग लेने वाला देश अपना स्वयं का विज्ञान मंत्रालय स्थानीय वैज्ञानिकों को सह-फंडिंग प्रदान करता है।
भारतीय विज्ञान ढांचा और साझेदारी की संभावनाएं
भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय देश में वैज्ञानिक अनुसंधान की नीतियों को तैयार करने और उनके कार्यान्वयन के लिए सर्वोच्च तंत्र है। इस मंत्रालय के अंतर्गत तीन महत्वपूर्ण विभाग कार्यरत हैं: डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT), डिपार्टमेंट ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (DSIR), और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST)। ये विभाग देश के अग्रणी अनुसंधान ढांचे का संचालन करते हैं।
डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस, इंस्टीट्यूट फॉर स्टेम सेल साइंस एंड रीजेनरेटिव मेडिसिन और ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट जैसी विख्यात संस्थाएं कार्यरत हैं। इसी तरह DSIR के तहत काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) की दर्जनों प्रयोगशालाएं स्थित हैं। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISERs) और हाल ही में स्थापित नेशनल अनुसंधान रिसर्च फाउंडेशन अनुसंधान क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं।
भारत पहले से ही फ्रांस के साथ इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एडवांस्ड रिसर्च (IFCPAR), जर्मनी के साथ इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (IGSTC) और अमेरिका के साथ Indo-US Science & Technology Forum (IUSSTF) जैसे द्विपक्षीय मंचों के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान कर रहा है। लेकिन Horizon Europe के साथ जुड़ने से भारत को व्यक्तिगत देशों के साथ होने वाले छिटपुट समझौतों के बजाय पूरे यूरोप के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक मतिओं के साथ एक एकीकृत मंच पर काम करने का अनूठा अवसर मिलता है। बायोमैन्युफैक्चरिंग, डेटा सिस्टम्स बायोलॉजी, जलवायु अनुकूलन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारतीय शोधकर्ता यूरोपीय समूहों के साथ संयुक्त अनुसंधान को आगे बढ़ा रहे हैं।

विवाद और भविष्य की चुनौतियां
किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम की तरह Horizon Europe भी विवादों से अछूत नहीं है। यूरोपीय संघ की संधियों में स्पष्ट प्रावधान है कि इस फंडिंग का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है। फिर भी वर्ष 2024 में स्टेटवॉच (Statewatch) और informationsstelle militarisierung (Informationsstelle Militarisierung - IMI) द्वारा किए गए एक गहन अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार Horizon के लाखों यूरो के फंड का उपयोग ऐसी सैन्य ड्रोन तकनीक विकसित करने के लिए किया गया था जिसका उपयोग गाजा में नागरिकों के खिलाफ किया गया था। ऐसे खुलासों के कारण मानवाधिकार समूहों द्वारा कार्यक्रम की निगरानी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा, यूरोपीय संघ सदस्य देशों में कानून के शासन (rule of law) और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ भी अनुसंधान निधि को जोड़ रहा है। भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश के लिए Horizon Europe में भागीदारी भू-राजनीतिक दृष्टि से संतुलित रखना आवश्यक बनता है। बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights - IPR) के बँटवारे, डेटा संप्रभुता और अनुसंधान परिणामों के पेटेंट को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होना अनिवार्य है।
Horizon Europe के साथ भारत का जुड़ाव वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में हमारी भागीदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाली पहल है। जब तक पारदर्शी नियमों और आपसी सम्मान का वातावरण बना रहेगा, तब तक यह जुड़ाव भारत और यूरोप दोनों के वैज्ञानिकों के लिए नूतन क्रांति सृजित करने का माध्यम बनेगा।


