गुजरात में सौर ऊर्जा की क्रांति: बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा और तकनीक का नया वैश्विक फलक
सूर्य की रोशनी से बिजली पैदा करने की अत्याधुनिक पद्धतियां और वैश्विक कंपनियों की बदलती रणनीतियां किस प्रकार भारत के ऊर्जा भविष्य को आकार दे रही हैं, इसका गहन विश्लेषण।

सौर ऊर्जा सूर्य के प्रकाश और गर्मी से प्राप्त होने वाली विकिरण ऊर्जा (radiant energy) है, जिसे अत्याधुनिक तकनीक की मदद से बिजली में परिवर्तित किया जा सकता है। पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में 174 पेटावॉट (petawatts) सौर विकिरण निरंतर प्राप्त होता है। इसमें से लगभग 30% ऊर्जा अंतरिक्ष में वापस परावर्तित हो जाती है, जबकि शेष 122 पेटावॉट ऊर्जा बादलों, महासागरों और जमीन द्वारा अवशोषित कर ली जाती है। यह ऊर्जा इतनी विशाल है कि 2019 के आंकड़ों के अनुसार, सूर्य से पृथ्वी पर केवल एक घंटे और 25 मिनट में जितनी ऊर्जा आती है, वह पूरी दुनिया के एक वर्ष के कुल उपभोग से भी अधिक है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की 2011 की रिपोर्ट के अनुसार, सस्ती और अक्षय सौर ऊर्जा का निर्माण देशों की ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि करता है और प्रदूषण कम करने में सहायक होता है।
सौर तकनीक को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: सक्रिय सौर (active solar) और निष्क्रिय सौर (passive solar)। सक्रिय सौर तकनीकों में फोटोवोल्टिक (photovoltaic) सिस्टम, कंसंट्रेटेड सोलर पावर (concentrated solar power) और सोलर वॉटर हीटिंग शामिल हैं। ये पद्धतियां सूर्य के प्रकाश को पकड़कर उसे सीधे बिजली या गर्मी में बदलती हैं। दूसरी ओर, निष्क्रिय सौर तकनीकों में इमारतों की ऐसी डिजाइन तैयार की जाती है जो प्राकृतिक रूप से हवा के संचार को गति दे सके या गर्मी का संग्रह करने वाले पदार्थों का उपयोग कर सके। ये पद्धतियां ऊर्जा की मांग को कम करने में मदद करती हैं, जबकि सक्रिय पद्धतियां ऊर्जा की आपूर्ति में वृद्धि करती हैं। पृथ्वी पर अधिकांश आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां प्रतिदिन 3.5 से 7.0 kWh/m² जितना इंसोलेशन (insolation) यानी सूर्य के प्रकाश की मात्रा उपलब्ध होती है।

सौर ऊर्जा का इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प है। 1878 में पेरिस में ऑगस्टिन मौचोट ने सौर वाष्प इंजन का सफल प्रदर्शन किया था, लेकिन उस समय सस्ता कोयला उपलब्ध होने के कारण इसका विकास रुक गया था। इसके बाद 1897 में फ्रैंक शुमन नामक अमेरिकी इंजीनियर ने एक छोटा प्रदर्शन इंजन बनाया जो ईथर (ether) नामक रसायन का उपयोग करता था, क्योंकि ईथर का क्वथनांक पानी से कम होता है। 1912 और 1913 के बीच, शुमन ने मिस्र के मादी में दुनिया का पहला सौर तापीय पावर स्टेशन (solar thermal power station) बनाया था। यह प्लांट नील नदी से प्रति मिनट 22,000 लीटर पानी पंप करके कपास के खेतों तक पहुंचाता था। हालांकि, प्रथम विश्व युद्ध और 1930 के दशक में सस्ते तेल की खोज के कारण इस तकनीक का विकास एक बार फिर धीमा पड़ गया था।
आधुनिक समय में सौर तापीय तकनीक का उपयोग पानी गर्म करने, जगह गर्म करने या ठंडा करने और औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है। सोलर वॉटर हीटिंग सिस्टम 40 डिग्री उत्तर और 40 डिग्री दक्षिण अक्षांश के बीच के क्षेत्रों में घरेलू गर्म पानी की 60 से 70% आवश्यकता पूरी कर सकते हैं। 2015 तक, विश्व में कुल 436 थर्मल गीगावाट (GWth) क्षमता के सोलर वॉटर हीटर्स स्थापित किए गए थे, जिसमें चीन 309 GWth के साथ विश्व में सबसे आगे है। इज़राइल और साइप्रस जैसे देशों में 90% से अधिक घरों में इस सिस्टम का उपयोग होता है। इस तकनीक में वैक्यूएटेड ट्यूब कलेक्टर्स (evacuated tube collectors) सबसे अधिक 44% हिस्सा रखते हैं।
| विवरण | प्रमाण / मूल्य |
|---|---|
| पृथ्वी पर पहुँचने वाला कुल सौर विकिरण | 174 पेटावॉट |
| पृथ्वी द्वारा अवशोषित ऊर्जा | 122 पेटावॉट |
| औसत इंसोलेशन (दैनिक) | 3.5 से 7.0 kWh/m2 |
| विश्व की कुल ऊर्जा के लिए आवश्यक भूमि | 450,000 वर्ग किमी |
सौर ऊर्जा का उपयोग खाना पकाने के लिए भी व्यापक रूप से हो रहा है। सोलर कुकर्स को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है: बॉक्स कुकर, पैनल कुकर और रिफ्लेक्टर कुकर। सबसे सरल बॉक्स कुकर सर्वप्रथम 1767 में होरेस डी सोस्यूर द्वारा बनाया गया था। यह कुकर 90 से 150 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान प्राप्त कर सकता है। जबकि रिफ्लेक्टर कुकर, जो दर्पण का उपयोग करके सूर्य के प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करता है, वह 315 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक तापमान तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, उद्योगों में भाप और गर्म पानी प्राप्त करने के लिए पैराबोलिक डिश और ट्रफ (trough) जैसी तकनीक का उपयोग किया जाता है। अमेरिका के जॉर्जिया में स्थित सोलर टोटल एनर्जी प्रोजेक्ट (STEP) इसका एक उत्तम उदाहरण है, जो कपड़े की फैक्ट्री के लिए 50% बिजली और गर्मी प्रदान करता था।
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र में आया परिवर्तन Engie SA जैसी बड़ी कंपनियों की रणनीति में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। Engie फ्रांस की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है जिसका मुख्यालय ला डिफेंस में है। 2008 में Gaz de France और Suez के विलय से बनी इस कंपनी ने 2014 से अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने कोयला आधारित प्रोजेक्ट्स से बाहर निकलकर रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) यानी पुन:प्राप्य ऊर्जा में भारी निवेश करने का निर्णय लिया है। 2015 में Engie ने Solairedirect नामक कंपनी का 95% हिस्सा खरीदा था, जिससे उसकी फोटोवोल्टिक उत्पादन क्षमता 125 मेगावाट से बढ़कर 486 मेगावाट हो गई थी।
- सूर्यप्रकाश का एकत्रीकरणदर्पणों का उपयोग करके सूर्य की किरणों को कलेक्टर बॉक्स पर केंद्रित किया जाता है।
- द्रव का गर्मी में रूपांतरणकलेक्टर बॉक्स में स्थित काले पाइपों में पानी या ईथर गर्म होता है।
- भाप का निर्माणगर्म हुआ द्रव भाप में रूपांतरित होता है, जो उच्च दबाव पैदा करता है।
- इंजन का संचालनइस भाप का उपयोग स्टीम इंजन चलाने के लिए होता है, जो पंप या जनरेटर घुमाता है।
Engie की नई रणनीति तीन स्तंभों पर आधारित है: डीकार्बोनाइज्ड एनर्जी (decarbonized energy), विकेंद्रीकृत ऊर्जा (decentralized energy) और डिजिटाइज्ड एनर्जी (digitized energy)। कंपनी ने 2016 से 2018 के बीच कोयले और तेल के एसेट्स बेचकर 15 अरब यूरो का नया निवेश रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी एफिशिएंसी सेवाओं में किया है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, Engie के दुनिया भर में 96,454 कर्मचारी हैं और इसकी वार्षिक आय 93.86 अरब यूरो है। कंपनी ने 'Engie Digital' और 'Engie Fab' जैसी संस्थाएं बनाई हैं जो स्मार्ट ग्रिड, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और हाइड्रोजन जैसी नई टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करती हैं।
भारत और विशेष रूप से गुजरात में सौर ऊर्जा के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण पहलू है। 2021 के कार्बन ट्रैकर इनिशिएटिव के अनुमान के अनुसार, यदि दुनिया की सभी ऊर्जा जरूरतों को केवल सौर ऊर्जा से पूरा करना हो, तो 450,000 वर्ग किलोमीटर जमीन की जरूरत पड़ेगी, जो मोरक्को या कैलिफोर्निया के कुल क्षेत्रफल के बराबर है। यह पृथ्वी की कुल जमीन का मात्र 0.3% हिस्सा है। गुजरात जैसे राज्यों में जहां सूर्य का प्रकाश प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, वहां ऐसे बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ला सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, सौर ऊर्जा की वैश्विक क्षमता वार्षिक 1,600 से 49,800 एक्साज्यूल्स (exajoules) है, जो मानवजाति की जरूरतों से कई गुना अधिक है।
અબજ યુરો
निष्क्रिय सौर टेक्नोलॉजी में इमारतों के अंदर तापमान बनाए रखने के लिए थर्मल मास (thermal mass) का उपयोग किया जाता है। पत्थर, सीमेंट और पानी जैसे पदार्थ दिन के दौरान गर्मी सोख लेते हैं और रात में उसे मुक्त करते हैं, जिससे इमारत प्राकृतिक रूप से ठंडी या गर्म रहती है। सोलर चिमनी (solar chimney) भी एक ऐसी ही निष्क्रिय सिस्टम है, जो गर्म हवा को ऊपर खींचकर इमारत में प्राकृतिक वेंटिलेशन प्रदान करती है। इसके अलावा, पतझड़ वाले पेड़ (deciduous trees) भी प्राकृतिक तापमान नियंत्रक के रूप में काम कर सकते हैं। गर्मियों में उनके पत्ते छाया देते हैं, जबकि सर्दियों में पत्ते झड़ जाने से सूर्य का प्रकाश सीधे इमारत पर पड़ता है। ये सभी पद्धतियां आधुनिक आर्किटेक्चर में ऊर्जा बचाने के लिए बहुत ही प्रभावी साबित हो रही हैं।
भविष्य में सौर ऊर्जा केवल बिजली तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह हाइड्रोजन उत्पादन और ग्रीन मोबिलिटी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। Engie जैसी कंपनियां अब बैटरी स्टोरेज क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही हैं, जैसे कि उन्होंने 2023 में ह्यूस्टन स्थित ब्रॉड रीच पावर कंपनी खरीदी है। जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी सस्ती होती जाएगी और कार्यक्षमता बढ़ेगी, वैसे-वैसे सौर ऊर्जा जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) का एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेगी। पृथ्वी पर उपलब्ध इस अक्षय ऊर्जा स्रोत का उचित उपयोग ही आने वाले कल की ऊर्जा सुरक्षा की कुंजी है।


