खगोलशास्त्र की नई क्रांति: एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप ब्रह्मांड की गहराइयों से खोज निकालेगा नए ग्रह और जीवन के संकेत
चिली के अटाकामा रेगिस्तान में आकार ले रहा विश्व का सबसे बड़ा ऑप्टिकल टेलीस्कोप, पांच-दर्पणों की अद्भुत डिजाइन और एडेप्टिव ऑप्टिक्स की मदद से मानवजाति की देखने की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करेगा।

घटना और उसका महत्व: ब्रह्मांड को देखने की एक नई दृष्टि
जब भी मानवजाति ने आकाश की ओर देखा है, अज्ञात ब्रह्मांड को समझने की जिज्ञासा बढ़ी है। दक्षिण अमेरिका के चिली देश में स्थित उत्तरी अटाकामा मरुस्थल में औपचारिक रूप से एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (Extremely Large Telescope - ELT) नामक एक असाधारण ऑप्टिकल टेलीस्कोप (optical telescope): दृश्य प्रकाश को एकत्रित कर दूर की वस्तुओं को स्पष्ट दिखाने वाली दूरबीन का निर्माण हो रहा है। European Southern Observatory (ESO) के नेतृत्व में तैयार हो रहा यह टेलीस्कोप पूरा होने के बाद विश्व का सबसे बड़ा ऑप्टिकल और मिड-इन्फ्रारेड एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप बन जाएगा।
यह टेलीस्कोप मानव आंख की तुलना में 10 करोड़ (100 मिलियन) गुना अधिक प्रकाश एकत्रित करने की अद्भुत क्षमता रखता है। ईस्वी सन् 2025 तक अस्तित्व में रहने वाले विश्व के सबसे बड़े ऑप्टिकल टेलीस्कोप की तुलना में ELT लगभग 10 गुना अधिक प्रकाश एकत्र कर सकेगा। हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) की तुलना में इसके प्रकाश एकत्रित करने वाली सतह का क्षेत्रफल 250 गुना अधिक है और यह हबल की तुलना में 15 गुना अधिक तीक्ष्ण और स्पष्ट चित्र देने की क्षमता रखता है।

इस टेलीस्कोप का मुख्य उद्देश्य अन्य तारों की परिक्रमा करने वाले बाह्यग्रहों (exoplanets) के वातावरण का गहन अध्ययन करना है। इसके अलावा, ब्रह्मांड में निर्मित प्रथम आकाशगंगाओं, सुपरमैसिव ब्लैक होल, ब्रह्मांड के अदृश्य डार्क मैटर और डार्क एनर्जी के रहस्यों तथा नए बन रहे तारों के आसपास की प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क से पानी और ऑर्गेनिक अणुओं को खोज निकालना है।
खगोलीय दूरबीन का इतिहास: गैलीलियो से लेकर स्पेस टेलीस्कोप तक
ऑप्टिकल खगोलशास्त्र (visible-light astronomy) का इतिहास मानव सभ्यता जितना ही पुराना है। दृश्य प्रकाश 380 से 750 नैनोमीटर की तरंगदैर्घ्य (wavelength) रखता है। दूरबीन की खोज से पहले खगोलशास्त्र केवल खुली आंखों से किए जाने वाले निरीक्षण तक सीमित था। जर्मन-डच चश्मा निर्माता Hans Lippershey को प्रथम ऑप्टिकल टेलीस्कोप की खोज का श्रेय दिया जाता है, जिन्होंने पेटेंट के लिए पहली बार आवेदन किया था।
इस सफलता के आधार पर भौतिक विज्ञानी Galileo Galilei ने ईस्वी सन् 1609 में 3x मैग्निफिकेशन वाला टेलीस्कोप बनाया और बाद में 30x संशोधित संस्करण तैयार किए। 25 अगस्त 1609 को गैलीलियो ने वेनेशियन कानून निर्माताओं के समक्ष अपने टेलीस्कोप का प्रदर्शन किया था और मार्च 1610 में Sidereus Nuncius नामक पुस्तक में अपने प्रथम खगोलीय निरीक्षण प्रकाशित किए थे।
आधुनिक युग में खगोलीय दूरबीनें तीन मुख्य प्रकारों में विभाजित हैं: रिफ्रैक्टिंग टेलीस्कोप (जिसमें लेंस का उपयोग होता है और इसमें क्रोमेटिक एबेरेशन यानी रंगीन त्रुटि देखने को मिलती है), रिफ्लेक्टिंग टेलीस्कोप (जिसमें दर्पण का उपयोग होता है और वैज्ञानिक अनुसंधान में सबसे अधिक उपयोग किया जाता है) और कैटाडिओप्ट्रिक टेलीस्कोप (जिसमें लेंस और दर्पण दोनों का संयोजन होता है)। वायुमंडलीय विकृतियों और प्रकाश प्रदूषण से बचने के लिए NASA ने 1990 में हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) को पृथ्वी की निचली कक्षा में लॉन्च किया था। वर्तमान समय में जमीन पर स्थित सबसे बड़े कंपोजिट कांच वाले टेलीस्कोप Keck Telescopes, Gran Telescopio Canarias और Southern African Large Telescope हैं, जिनके दर्पण का व्यास 10 मीटर के आसपास है।
ELT का स्थल और वास्तुकला: अटाकामा रेगिस्तान की चोटी पर निर्माण
European Southern Observatory (ESO) की काउंसिल ने 26 अप्रैल 2010 को दक्षिण चिली में अटाकामा रेगिस्तान में स्थित 23 किलोमीटर दूर Paranal Observatory के निकट सेरो अरमाज़ोन्स (Cerro Armazones) पहाड़ को ELT के निर्माण के लिए चुना था। इस स्थल के चयन से पहले अर्जेंटीना के सेरो मेकोन, केनेरी आइलैंड्स के Roque de los Muchachos Observatory और उत्तर अफ्रीका, मोरक्को तथा अंटार्कटिका जैसे स्थलों पर विचार किया गया था।
शुरुआत में इस विशाल परियोजना का नाम यूरोपियन एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (E-ELT) था, लेकिन जून 2017 में इस नाम को छोटा करके ELT कर दिया गया। पृथ्वी पर वायुमंडल की स्थिरता और शुष्क मौसम के कारण अटाकामा रेगिस्तान को आकाश दर्शन के लिए विश्व में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
शुरुआत में 42 मीटर व्यास और 1,300 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले ओवरवेल्मिंगली लार्ज टेलीस्कोप (Overwhelmingly Large Telescope - OWL) का 100 मीटर की डिज़ाइन के साथ विचार किया गया था, लेकिन 1.5 अरब यूरो की अनुमानित लागत और अत्यधिक जटिलता के कारण उस विचार को त्याग दिया गया था। उसके बाद 42 मीटर की मूल योजना को 2011 में 13% घटाकर 39.3 मीटर व्यास और 978 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर मंजूरी दी गई।
ऑप्टिकल डिज़ाइन: 5-मिरर (5-mirror) तकनीक का विज्ञान
ELT की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि इसकी पांच दर्पणों वाली नवीन ऑप्टिकल डिज़ाइन (5-mirror anastigmat design) है। अधिकांश पारंपरिक टेलीस्कोप दो दर्पणों का उपयोग करते हैं, जबकि ELT पांच दर्पणों के जटिल संयोजन से 10-आर्कमिनिट (पूर्ण चंद्रमा की चौड़ाई के तीसरे भाग के बराबर) क्षेत्रफल वाले विशाल आकाश में अत्यंत तीक्ष्ण और स्पष्ट छवि बनाता है।
- प्राथमिक दर्पण (M1)39.3 मीटर का दर्पण आकाश से आने वाले प्रकाश को एकत्रित कर सेकेंडरी दर्पण की तरफ परावर्तित करता है।
- द्वितीय और तृतीय दर्पण (M2 और M3)4.25 मीटर का M2 और 4.0 मीटर का M3 दर्पण प्रकाश की किरणों को स्पष्ट और अनुकूलित बिंदु की तरफ रवाना करते हैं।
- चतुर्थ दर्पण (M4 - एडेप्टिव ऑप्टिक्स)2.4 मीटर का पतला दर्पण 5,000 एक्ट्यूएटर्स की मदद से प्रति सेकंड 1,000 बार आकार बदलकर वातावरण की विकृति दूर करता है।
- पंचम दर्पण (M5) और नास्मिथ फोकसM5 दर्पण इमेज को स्थिर करता है और प्रकाश को टेलीस्कोप के बाजू में स्थित वैज्ञानिक उपकरणों की तरफ भेजता है।
सिस्टम में पहले तीन दर्पण (M1, M2, M3) वक्र हैं, जो आकाश से आने वाले प्रकाश को एकत्रित कर उचित बिंदु पर केंद्रित करते हैं। चौथा दर्पण (M4) और पांचवां दर्पण (M5) समतल हैं। M4 वायुमंडलीय तरंगों से होने वाली विकृतियों को सक्रिय रूप से सुधारता है, जबकि M5 छवि को हलचल से मुक्त रखकर स्थिरीकरण (image stabilization) प्रदान करता है। ये दर्पण प्रकाश को साइड में स्थित दो Nasmyth फोकल स्टेशनों की ओर मोड़ते हैं, जहां एक साथ कई बड़े खगोलीय उपकरण स्थापित किए जा सकते हैं।
| दर्पण | व्यास (मीटर) | प्रकार / कार्य | खासियत |
|---|---|---|---|
| M1 (प्राथमिक) | 39.3 | मुख्य परावर्तक दर्पण | 798 षट्कोण टुकड़ों से बना |
| M2 (द्वितीय) | 4.25 | उत्तल (Convex) | दुनिया का सबसे बड़ा द्वितीय दर्पण (3.5 टन) |
| M3 (तृतीय) | 4.0 | अवतल (Concave) | विशाल क्षेत्रफल के लिए त्रुटिरहित इमेज बनाता है |
| M4 (चतुर्थ) | 2.4 | सपाट (Deformable) | 5,000 एक्ट्यूएटर्स के साथ प्रति सेकंड 1,000 बदलाव |
| M5 (पंचम) | सपाट | टिप-टिल्ट स्थिरीकरण | प्रकाश को उपकरणों की तरफ स्थिर तरीके से मोड़ता है |
प्राथमिक दर्पण (M1): 798 कांच के टुकड़ों का आश्चर्यजनक मिश्रण
किसी भी एकल कांच को 8 मीटर से अधिक व्यास में बनाना और उसका परिवहन करना वर्तमान तकनीक के लिए असंभव है। इसलिए ELT का 39.3 मीटर व्यास वाला प्राथमिक दर्पण (M1) 798 छोटे षट्कोणीय (hexagonal) टुकड़ों को जोड़कर बनाया जा रहा है। प्रत्येक टुकड़ा 1.45 मीटर चौड़ा और 50 मिलीमीटर मोटा है।
इन टुकड़ों के निर्माण के लिए जर्मन कंपनी Schott AG को अनुबंध दिया गया था, जिन्होंने तापमान के बदलाव के प्रति न फैलने वाले Zerodur नामक ग्लास-सिरेमिक पदार्थ से ब्लैंक्स तैयार किए हैं। Schott AG ने कुल 798 मुख्य टुकड़े और अतिरिक्त 133 रखरखाव टुकड़े (maintenance set) बनाए हैं। प्रतिदिन काम के घंटों के दौरान 2 टुकड़ों को बाहर निकालकर री-कोटिंग के लिए बदला जाएगा, ताकि टेलीस्कोप की सतह हमेशा साफ और अधिकतम परावर्तक बनी रहे।

फ्रांसीसी कंपनी Safran Reosc को इन दर्पणों को पॉलिश करने का अनुबंध मिला था, जो प्रतिदिन एक टुकड़े को 7.5 नैनोमीटर रूट मीन स्क्वायर से भी कम असमानता रहने तक सटीक रूप से पॉलिश करते हैं। 4,608 एज सेंसर (edge sensors) का निर्माण फ्रांस की Fogale और जर्मनी की Micro-Epsilon के कंसोर्टियम FAMES द्वारा किया गया है, जो मिलीमीटर के लाखोंवें हिस्से की सटीकता से टुकड़ों की स्थिति मापते हैं। CESA (स्पेन) और VDL (नीदरलैंड) द्वारा निर्मित 2,394 पोजीशन एक्चुएटर्स हवा, गुरुत्वाकर्षण और तापमान से होने वाले परिवर्तनों के खिलाफ दर्पण का आकार बनाए रखते हैं।
अनुकूलनशील ऑप्टिक्स (Adaptive Optics): वायुमंडलीय त्रुटियों को सुधारने की कला
जमीन से आकाश का निरीक्षण करते समय पृथ्वी का वायुमंडल प्रकाश की किरणों को मोड़कर छवि को धुंधला बना देता है। ELT इस समस्या का समाधान एडेप्टिव ऑप्टिक्स (adaptive optics): वायुमंडलीय विकृति दूर करने वाली सक्रिय कांच सुधार प्रणाली के माध्यम से लाता है।
टेलीस्कोप में 2.4 मीटर व्यास वाला और मात्र 2 मिलीमीटर मोटा चतुर्थ दर्पण (M4) स्थापित है। M4 के पीछे 5,000 के करीब छोटे यांत्रिक एक्चुएटर्स (actuators) लगे हैं, जो वायुमंडल की हलचल के अनुसार दर्पण की सतह के आकार में प्रति सेकंड 1,000 बार सूक्ष्म परिवर्तन करते हैं।
इसके अतिरिक्त, द्वितीय दर्पण (M2) 4.25 मीटर व्यास और 3.5 टन वजन वाला विश्व का सबसे बड़ा उत्तल (convex) दर्पण है, जिसे Schott AG द्वारा निर्मित कर Safran Reosc द्वारा 15 नैनोमीटर की सटीकता तक पॉलिश किया गया है। SENER कंपनी द्वारा बनाए गए सपोर्ट सेल्स की मदद से M2 और 4.0 मीटर व्यास वाले अवतल M3 दर्पण को 32 पॉइंट्स पर स्थिर रखा जाता है। छह लेजर गाइड स्टार यूनिट्स के साथ मिलकर यह सिस्टम वायुमंडलीय धुंधलापन को पूरी तरह से दूर कर हबल स्पेस टेलीस्कोप से भी अधिक स्पष्ट छवियां देने में सक्षम बनता है।


आंकड़े, लागत और निर्माण समयरेखा: सांख्यिकीय तुलना
ELT का संपूर्ण प्रोजेक्ट वित्तीय और इंजीनियरिंग क्षेत्र में एक असाधारण साहसिक कार्य है। 2011 में कांच का व्यास 42 मीटर से घटाकर 39 मीटर किए जाने पर प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 1.275 अरब यूरो से घटकर 1.055 अरब यूरो हो गई थी। ईस्वी सन् 2017 के अनुमान के अनुसार पहली पीढ़ी के उपकरणों के साथ टेलीस्कोप की कुल लागत 1.15 अरब यूरो थी।
दिसंबर 2014 में ESO के बोर्ड ने 90% से अधिक फंड सुरक्षित होने पर प्रथम चरण के निर्माण के लिए मंजूरी दी थी। 26 मई 2017 को ऑब्जर्वेटरी के मुख्य गुंबद का शिलान्यास किया गया था। जुलाई 2023 में टेलीस्कोप का 50% से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका था। नवीनतम समय-सारणी के अनुसार मार्च 2029 में टेलीस्कोप का टेक्निकल फर्स्ट लाइट (Technical First Light) और दिसंबर 2030 में वैज्ञानिक अवलोकन (First Scientific Observations) शुरू होंगे।
भारत और सामान्य मानव के लिए इस क्रांति का क्या अर्थ है?
एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप केवल वैज्ञानिकों के लिए एक प्रयोगशाला नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानवजाति के अस्तित्व से जुड़े प्रश्नों का समाधान है। "क्या ब्रह्मांड में हम अकेले हैं?" इस सदियों पुराने सवाल का जवाब ELT दे सकता है। अन्य तारों के चारों ओर परिक्रमा करने वाले पृथ्वी जैसे ग्रहों के वायुमंडल में ऑक्सीजन, पानी या ऑर्गेनिक अणुओं की उपस्थिति खोजकर यह पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावना की जांच करेगा।
भारत और अन्य विकासशील देशों के खगोलशास्त्रियों तथा युवा शोधकर्ताओं के लिए इस वैश्विक प्रोजेक्ट से डेटा प्रोसेसिंग, एडेप्टिव ऑप्टिक्स और एडवांस्ड सेंसर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विशाल अवसर उत्पन्न होंगे। भविष्य में इस तकनीक का उपयोग सैटेलाइट कम्युनिकेशन, मेडिकल ऑप्टिकल इमेजिंग और वायुमंडलीय अध्ययन में भी होगा।


