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नासा के स्विफ्ट टेलीस्कोप की अंतिम विदाई: ऑर्बिटल डिके और अंतरिक्ष विज्ञान की एक यात्रा का अंत

22 वर्षों तक गामा-रे बर्स्ट्स का अध्ययन करने वाला स्विफ्ट टेलीस्कोप पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर रहा है; जानिए कैसे सूर्य की सक्रियता ने इस शक्तिशाली वेधशाला का पतन तय किया।

आवतीकाल AI डेस्क4 नवंबर 2026 · 7 मिनट का पाठ
नासा के स्विफ्ट सैटेलाइट का एक भौतिक मॉडल, जो इसकी जटिल संरचना और सोलर पैनलों को दर्शाता है।
नासा के स्विफ्ट सैटेलाइट का एक भौतिक मॉडल, जो इसकी जटिल संरचना और सोलर पैनलों को दर्शाता है।
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अकाश विज्ञान के इतिहास में कुछ वेदशालाएँ ऐसी होती हैं जो अपनी निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक काम करती हैं। NASA की नील गेहरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी (Neil Gehrels Swift Observatory) ऐसी ही एक अद्भुत सफलता का प्रतीक है। २० नवंबर, २००४ को लॉन्च किया गया यह १.५ टन का टेलीस्कोप पिछले २२ वर्षों से ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों, जिन्हें गामा-रे बर्स्ट्स (gamma-ray bursts) कहा जाता है, का अध्ययन कर रहा था। हालाँकि, प्राकृतिक भौतिकी और सूर्य की बदलती गतिविधियों के कारण अब इस मिशन का अंत आ गया है। दक्षिण कोरिया की स्पेस एजेंसी KASA और NASA के रिपोर्टों के अनुसार, इस टेलीस्कोप के ३ नवंबर, २०२६ को पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करके नष्ट हो जाने की संभावना है।

स्विफ्ट टेलीस्कोप का पतन कोई दुर्घटना नहीं है, बल्कि 'ऑर्बिटल डिके' (orbital decay) के रूप में जानी जाने वाली एक वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम है। जब कोई उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में (low Earth orbit) होता है, तो वह अत्यंत पतले वायुमंडल के संपर्क में आता है। समय के साथ, इस वायुमंडल का घर्षण (atmospheric drag) उपग्रह की गति को धीमा करता है, जिससे उसकी ऊँचाई घटती जाती है। स्विफ्ट के मामले में, पिछले दो वर्षों में यह प्रक्रिया तेज हो गई थी। विकिपीडिया के डेटा के अनुसार, सूर्य की बढ़ी हुई सक्रियता के कारण पृथ्वी का वायुमंडल फैल गया था, जिससे टेलीस्कोप पर लगने वाला घर्षण बढ़ गया और उसकी कक्षा तेजी से नीचे आने लगी।

स्विफ्ट गामा-रे बर्स्ट डिटेक्टिंग सैटेलाइट का विस्तृत ३D डिजिटल रेंडर।
स्विफ्ट गामा-रे बर्स्ट डिटेक्टिंग सैटेलाइट का विस्तृत ३D डिजिटल रेंडर। (NASA E/PO, Sonoma State University/Aurore Simonnet, Public domain, Wikimedia Commons)
स्विफ्ट गामा-रे बर्स्ट डिटेक्टिंग सैटेलाइट का विस्तृत ३D डिजिटल रेंडर।
स्विफ्ट गामा-रे बर्स्ट डिटेक्टिंग सैटेलाइट का विस्तृत ३D डिजिटल रेंडर। (NASA E/PO, Sonoma State University/Aurore Simonnet, Public domain, Wikimedia Commons)

स्विफ्ट मिशन: ब्रह्मांड के रहस्यों का शिकारी

स्विफ्ट टेलीस्कोप का मुख्य काम ब्रह्मांड में होने वाले गामा-रे बर्स्ट्स (GRBs) को खोजना और उसकी सटीक जानकारी पृथ्वी पर भेजना था। गामा-रे बर्स्ट्स ब्रह्मांड के सबसे चमकीले और शक्तिशाली विस्फोट हैं, जो सेकंड के थोड़े हिस्से से लेकर कुछ मिनटों तक चलते हैं। स्विफ्ट का नाम उसके काम करने की गति पर रखा गया था। जैसे 'स्विफ्ट' (swift) नाम का पक्षी हवा में तेजी से मुड़ सकता है, वैसे ही यह टेलीस्कोप भी आकाश में कोई विस्फोट दिखते ही उसकी तरफ अपनी दिशा बदल सकता था। इस प्रक्रिया को 'स्लूइंग' (slewing) कहा जाता है। टेलीस्कोप में मौजूद मोमेंटम व्हील्स (momentum wheels) इसे स्वायत्त रूप से सेकंडों में घुमा सकते थे।

इस मिशन में तीन मुख्य उपकरण काम करते थे: बर्स्ट अलर्ट टेलीस्कोप (Burst Alert Telescope - BAT), एक्स-रे टेलीस्कोप (X-ray Telescope - XRT) और अल्ट्रावाइलेट/ऑप्टिकल टेलीस्कोप (Ultraviolet/Optical Telescope - UVOT)। BAT उपकरण आकाश के बड़े हिस्से पर नजर रखता था और विस्फोट होते ही उसकी स्थिति तय करता था। इसके बाद XRT और UVOT उस दिशा में मुड़कर विस्फोट के बाद की चमक, जिसे आॅफ्टरग्लो (afterglow) कहा जाता है, उसका अध्ययन करते थे। विकिपीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, स्विफ्ट ने अपने जीवनकाल के दौरान १,००० से अधिक गामा-रे बर्स्ट्स खोजे थे, जिसमें २७ अक्टूबर, २०१५ को खोजा गया १,०००वाँ बर्स्ट 'GRB 151027B' के रूप में जाना जाता है।

स्विफ्ट टेलीस्कोप के मुख्य वैज्ञानिक उपकरण और उनके कार्य
उपकरण (Instrument)मुख्य कार्य और विशेषता
Burst Alert Telescope (BAT)आकाश के बड़े हिस्से पर नजर रखना और गामा-रे बर्स्ट्स खोजकर उसकी सटीक स्थिति तय करना।
X-ray Telescope (XRT)विस्फोट के बाद की चमक (आफ्टरग्लो) का एक्स-रे द्वारा अध्ययन करना और सटीक स्थान खोजना।
Ultraviolet/Optical Telescope (UVOT)पराबैंगनी और ऑप्टिकल वेवबैंड में आफ्टरग्लो का निरीक्षण करना और लंबे समय के डेटा प्राप्त करना।
ऑर्बिटल डिके (कक्षा में गिरावट) कैसे होती है?यह प्रक्रिया वर्षों तक चलती है।
  1. वातावरणीय घर्षणपृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल की पतली परतें उपग्रह की गति में बाधा पैदा करती हैं।
  2. सूर्य की सक्रियतासौर चक्र के दौरान बढ़ती गर्मी वायुमंडल को फैलाती है, जिससे घर्षण बढ़ता है।
  3. ऊंचाई में कमीगति धीमी पड़ने पर उपग्रह पृथ्वी की तरफ खींचा जाता है और उसकी कक्षा नीचे आती जाती है।
  4. पुनःप्रवेशजब ऊंचाई ३०० किमी से कम हो जाती है, तब वायुमंडल का घनत्व उपग्रह को जला देता है।

ऑर्बिटल डिके और सूर्य का प्रभाव

पृथ्वी के चारों ओर एक निश्चित ऊंचाई पर बने रहने के लिए किसी भी उपग्रह को आवश्यक गति बनाए रखनी पड़ती है। जब स्विफ्ट को लॉन्च किया गया था, तब इसकी ऊंचाई लगभग 585 से 604 किमी थी। हालांकि, पृथ्वी का वायुमंडल अंतरिक्ष में पूरी तरह से शून्य नहीं होता है। जब सूर्य अधिक सक्रिय होता है (सोलर मैक्सिमम), तब वह पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को गर्म करता है, जिससे वायुमंडल फूल जाता है और ऊपर की ओर फैलता है। यह फैला हुआ वायुमंडल स्विफ्ट जैसे उपग्रहों के लिए अवरोध पैदा करता है। 2026 में सूर्य की ऐसी ही सक्रियता के कारण स्विफ्ट की ऊंचाई घटने लगी थी।

जब कोई उपग्रह 300 किमी की ऊंचाई से नीचे जाता है, तब वायुमंडल का घर्षण इतना बढ़ जाता है कि उसे वापस ऊपर ले जाना लगभग असंभव हो जाता है। स्विफ्ट टेलीस्कोप 9 अक्टूबर, 2026 को इस 300 किमी की सीमा से नीचे उतर गया था। इस स्थिति को 'पॉइंट ऑफ नो रिटर्न' (point of no return) कहा जाता है। नासा (NASA) ने 23 अक्टूबर, 2026 को आधिकारिक तौर पर स्विफ्ट का संचालन बंद कर दिया था, क्योंकि अब वह वैज्ञानिक अवलोकन करने के लिए पर्याप्त स्थिरता नहीं रखता था।

ऑर्बिटल डिके (कक्षा में गिरावट) और स्विफ्ट मिशन के अंत की प्रक्रिया
  1. सूर्य की सक्रियता में वृद्धिसूर्य की बढ़ती गतिविधियों के कारण पृथ्वी का ऊपरी वायुमंडल गर्म होकर फूलता है और फैलता है।
  2. वायुमंडल का घर्षणफैले हुए वायुमंडल के संपर्क में आने से उपग्रह पर घर्षण बल बढ़ता है, जो उसकी गति को धीमा करता है।
  3. ऊंचाई में कमी और संकटटेलीस्कोप की कक्षा लगातार नीचे आती गई और वह ३०० किमी की सीमा से नीचे उतर गया।
  4. मिशन का आधिकारिक अंतजब टेलीस्कोप पर्याप्त स्थिरता नहीं रखता था तब NASA द्वारा २३ अक्टूबर, २०२६ के दिन उसका संचालन आधिकारिक रूप से बंद किया गया।
स्विफ्ट टेलीस्कोप के मुख्य वैज्ञानिक उपकरणप्रत्येक उपकरण अलग तरंगदैर्ध्य पर काम करता है।
उपकरण का नामकार्यसटीकता
BAT (Burst Alert Telescope)गामा-रे विस्फोटों की खोज और स्थान निर्धारित करना१ से ४ आर्कमिनिट
XRT (X-ray Telescope)विस्फोट के बाद की एक्स-रे चमक का अध्ययन४ आर्कसेकंड
UVOT (UV/Optical Telescope)पराबैंगनी और दृश्य प्रकाश में अवलोकन१ आर्कसेकंड से कम

बचाने की आखिरी कोशिश: LINK मिशन की विफलता

नासा (NASA) ने स्विफ्ट को बचाने के लिए एक साहसी योजना बनाई थी। सितंबर 2025 में, नासा ने एरिज़ोना स्थित निजी कंपनी 'कैटलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज' (Katalyst Space Technologies) को 30 मिलियन डॉलर का अनुबंध दिया था। इस मिशन का नाम 'LINK' रखा गया था। यह एक रोबोटिक सर्विसिंग अंतरिक्ष यान था, जिसका उद्देश्य स्विफ्ट टेलीस्कोप को पकड़कर उसे फिर से ऊंची कक्षा में धकेलना (बूस्ट करना) था। इस मिशन के लिए नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन के पेगासस XL (Pegasus XL) रॉकेट का उपयोग किया गया था, जिसे विमान से लॉन्च किया जाता है।

3 जुलाई, 2026 को LINK अंतरिक्ष यान लॉन्च किया गया था। हालांकि, अंतरिक्ष में जाकर स्विफ्ट के साथ जुड़ने के लिए जिस सटीकता की आवश्यकता थी, उसे बनाए रखने में LINK असफल रहा। 19 अगस्त, 2026 को कैटलिस्ट कंपनी ने घोषणा की कि LINK अंतरिक्ष यान में 'एटिट्यूड कंट्रोल' (attitude control) यानी दिशा नियंत्रण की समस्याएं पैदा हो गई हैं, जिसके कारण वह स्विफ्ट से संपर्क नहीं साध सकेगा। इस विफलता के साथ ही स्विफ्ट टेलीस्कोप का पतन निश्चित हो गया था। योनहाप (Yonhap) समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस विफलता के बाद टेलीस्कोप धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर गिरने लगा।

वायुमंडल में पुन: प्रवेश और सुरक्षा

जब स्विफ्ट जैसा १.५ टन का टेलीस्कोप पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो यह अत्यधिक उच्च गति पर (हजारों किलोमीटर प्रति घंटा) गति कर रहा होता है। वायुमंडल के साथ घर्षण के कारण पैदा होने वाली गर्मी इतनी प्रचंड होती है कि टेलीस्कोप का अधिकांश हिस्सा जलकर राख हो जाता है। हालांकि, टेलीस्कोप में मौजूद कुछ भारी धातु के हिस्से, जैसे कि मिरर्स या स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स, पूरी तरह से जलते नहीं हैं और पृथ्वी की सतह तक पहुंच सकते हैं।

दक्षिण कोरिया की एयरोस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (KASA) ने स्पष्ट किया है कि इस टेलीस्कोप के टुकड़े कोरियाई प्रायद्वीप पर गिरने की संभावना नगण्य है। आमतौर पर, NASA और अन्य एजेंसियां ऐसे पतन को इस तरह से मॉनिटर करती हैं कि उसका मलबा समुद्र में गिरे। स्विफ्ट के मामले में भी अधिकांश अवशेषों के समुद्र में गिरने की उम्मीद है। इस प्रकार के 'अनकंट्रोल्ड रीएंट्री' (uncontrolled reentry) में सटीक समय और स्थान तय करना मुश्किल होता है, लेकिन स्विफ्ट का आकार देखते हुए यह जनजीवन के लिए बड़ा खतरा पैदा नहीं करता है।

स्विफ्ट की विरासत और भविष्य

स्विफ्ट टेलीस्कोप भले ही नष्ट हो रहा हो, लेकिन उसने विज्ञान जगत को जो डेटा दिया है वह दशकों तक उपयोगी रहेगा। उसने न केवल गामा-रे बर्स्ट्स ही, बल्कि सुपरनोवा (supernovae), ब्लैक होल और एस्टेरॉइड्स का भी अध्ययन किया था। २०११ में उसने पृथ्वी के पास से गुजरने वाले एस्टेरॉइड २००५ YU55 के फोटो लिए थे और २०१७ में गुरुत्वाकर्षण तरंगों (gravitational waves) की घटना से जुड़े पराबैंगनी उत्सर्जन को भी कैप्चर किया था।

स्विफ्ट का पतन हमें याद दिलाता है कि अंतरिक्ष में भेजी गई हर वस्तु का एक अंत होता है। ऑर्बिटल डिके एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष कचरे (space debris) को साफ करने में भी मदद करती है। हालांकि, स्विफ्ट जैसी कीमती वेधशालाओं को खोना विज्ञान के लिए एक क्षति है। अब वैज्ञानिकों की नजर जेम्स वेब टेलीस्कोप और भविष्य के अन्य मिशनों पर है जो स्विफ्ट के अधूरे रहे कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। स्विफ्ट का २२ साल का मिशन साबित करता है कि यदि तकनीक मजबूत हो, तो २ साल के लिए बनाया गया उपकरण भी २ दशकों तक ब्रह्मांड के रहस्यों को खोल सकता है।

स्रोत

  1. yonhap
  2. Wikipedia
  3. Wikipedia

टेक

सब देखें
वाहन के हुड पर स्थापित एक पोर्टेबल सैटेलाइट इंटरनेट टर्मिनल।

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