INS Vikrant पर Rafale-M की सफल लैंडिंग: भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति में नए युग का आरंभ
भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS Vikrant पर फ्रांसीसी फाइटर जेट Rafale-M के पहले सफल परीक्षण ने भारत की रक्षा क्षमता को वैश्विक स्तर पर एक नई ऊंचाई दी है।

भारतीय नौसेना के इतिहास में 29 अक्टूबर का दिन एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इस दिन भारत के गौरव समान स्वदेशी विमानवाहक पोत (aircraft carrier) INS Vikrant पर फ्रेंच निर्मित फाइटर जेट Rafale-M (Marine) ने सफलतापूर्वक लैंडिंग की। यह लैंडिंग केवल एक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली गठबंधन की शुरुआत थी। कैप्टन अशोक राव, जो INS Vikrant के कमांडिंग ऑफिसर हैं, उनके नेतृत्व में इस जटिल कार्य को अंजाम दिया गया। इस सफलता के साथ ही भारतीय नौसेना अब अत्याधुनिक फ्रेंच तकनीक और भारतीय इंजीनियरिंग के समन्वय के साथ समुद्र में अपना दबदबा बनाने के लिए तैयार है।
Livemint की रिपोर्ट के अनुसार, Rafale-M ने अपने पहले ही प्रयास में INS Vikrant के डेक पर सुरक्षित लैंडिंग की। यह परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विमानवाहक पोत पर लैंडिंग करना जमीन पर स्थित रनवे पर उतरने की तुलना में कई गुना अधिक कठिन होता है। समुद्र की लहरों पर लगातार हिलता हुआ जहाज और सीमित लंबाई का रनवे पायलट के कौशल और विमान की तकनीक की कड़ी परीक्षा लेते हैं। यह सफल लैंडिंग साबित करती है कि Rafale-M और INS Vikrant एक-दूसरे के साथ काम करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। नौसेना द्वारा जारी किए गए वीडियो में इस ऐतिहासिक क्षण को कैद किया गया है, जो भारतीय रक्षा क्षेत्र की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।

इस पूरे प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि देखें तो, INS Vikrant भारत का चौथा विमानवाहक पोत है और पूरी तरह से देश में ही निर्मित पहला जहाज है। विकिपीडिया के डेटा के अनुसार, इस जहाज का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा किया गया है। 'विक्रांत' नाम संस्कृत शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ 'साहसी' होता है। इस जहाज का आदर्श वाक्य 'जयेम सम युधिस्पृधः' है, जिसका अर्थ है कि 'जो मुझे चुनौती देने का साहस करते हैं, मैं उन्हें हरा दूंगा'। इस जहाज के डिजाइन का काम 1999 में शुरू हुआ था और 2009 में इसकी नींव (keel laying) रखी गई थी। 2022 में इसे नौसेना में शामिल किया गया था, और तब से यह भारत की समुद्री शक्ति का केंद्र बिंदु बना हुआ है।
| विवरण | मापदंड / आंकड़ा |
|---|---|
| लंबाई | 262 मीटर |
| अधिकतम गति | 28 नोट्स (52 किमी/घंटा) |
| यात्रा क्षमता (Endurance) | 7,500 नॉटिकल मील |
| क्रू (नाविकों की संख्या) | 1,700 |
| कुल कंपार्टमेंट | 2,300 |
| पावर प्लांट | 4 GE LM2500 गैस टर्बाइन |
Rafale-M यानी राफेल मरीन, फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी Dassault Aviation द्वारा निर्मित राफेल फाइटर जेट का नौसैनिक संस्करण है। भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में फ्रांस के साथ 26 Rafale-M जेट खरीदने के लिए लगभग ₹63,000 करोड़ का रक्षा समझौता किया है। इस पैकेज में 22 सिंगल-सीट (एक पायलट वाले) फाइटर एयरक्राफ्ट और 4 ट्विन-सीट (दो पायलट वाले) ट्रेनर एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इस समझौते में न केवल विमान, बल्कि पायलटों का प्रशिक्षण, फ्लाइट सिम्युलेटर (उड़ान का अनुभव कराने वाली मशीन), अत्याधुनिक हथियार और दीर्घकालिक रखरखाव सहायता भी शामिल है। इन विमानों की डिलीवरी 2028 के अंत में या 2029 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है।
- एप्रोच (Approach)पायलट जहाज की गति और हवा की दिशा के अनुसार विमान को सटीक कोण पर डेक की तरफ लाता है।
- हुक डिप्लॉयमेंट (Hook Deployment)विमान के पीछे लगा मजबूत स्टील का हुक नीचे की तरफ खोला जाता है।
- अरेस्टर वायर कैच (Arrestor Wire Catch)उतरते समय विमान का हुक डेक पर बिछाए गए तीन-चार मजबूत तारों में से एक को पकड़ लेता है।
- रेपिड डेसीलरेशन (Rapid Deceleration)तार के खिंचाव के कारण विमान अत्यंत तेजी से (सेकंडों में) स्थिर हो जाता है।
तकनीकी दृष्टि से देखें तो, Rafale-M को विशेष रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। सामान्य ज़मीन-आधारित फाइटर जेट की तुलना में, कैरियर-आधारित विमानों को लैंडिंग के समय भारी झटकों को सहन करना पड़ता है। INS Vikrant पर लैंडिंग के लिए STOBAR (Short Take-Off But Arrested Recovery) पद्धति का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति में विमान छोटे रनवे से टेक-ऑफ करता है और लैंडिंग के समय जहाज के डेक पर लगे मजबूत तारों में विमान का हुक फंस जाता है, जो उसे सेकंडों में ही रोक देता है। Rafale-M के परीक्षण इसी प्रक्रिया की सटीकता जांचने के लिए किए जा रहे हैं, ताकि युद्ध जैसी स्थिति में किसी भी गलती की गुंजाइश न रहे।
વિમાનોની સંખ્યા
INS Vikrant की विशालता का अंदाज़ा उसके आंकड़ों से लगाया जा सकता है। यह जहाज 262 मीटर लंबा है और इसकी शीर्ष गति 28 नॉट्स (लगभग 52 किमी/घंटा) है। यह एक बार ईंधन भरने के बाद 7,500 नॉटिकल मील (लगभग 13,900 किमी) तक की यात्रा कर सकता है। इस जहाज में 2,300 के करीब कंपार्टमेंट (कमरे) हैं और इसमें 1,700 नाविक रह सकते हैं। इतना ही नहीं, इसमें एक आधुनिक अस्पताल कॉम्प्लेक्स और महिला अधिकारियों के लिए अलग केबिन की भी व्यवस्था है। इस जहाज को चलाने के लिए चार General Electric LM2500 गैस टर्बाइन का उपयोग किया जाता है, जो इसे समुद्र में प्रचंड शक्ति प्रदान करते हैं।

Rafale-M के आगमन से भारतीय नौसेना की मल्टीरोल (बहुउद्देश्यीय) क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी। यह विमान न केवल एयर डिफेंस (हवाई सुरक्षा), बल्कि मैरीटाइम स्ट्राइक (समुद्री हमला), रिकोनिसेंस (जासूसी या निगरानी) और ज़मीन पर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने में भी सक्षम है। नौसेना के बेड़े की सुरक्षा के लिए ये विमान एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेंगे। भारत के पास वर्तमान में दो सक्रिय विमानवाहक पोत हैं: INS Vikrant और INS Vikramaditya। Rafale-M इन दोनों जहाजों से संचालित हो सकेगा, जो भारत की रणनीतिक पहुंच को हिंद महासागर और उससे आगे तक विस्तारित करेगा।
भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के अंतर्गत, इस समझौते में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (technology transfer) का प्रावधान भी किया गया है। इसका अर्थ यह है कि भविष्य में भारतीय निर्मित हथियारों को Rafale-M के साथ जोड़ना आसान होगा। इससे रक्षा क्षेत्र में भारत की विदेशी निर्भरता कम होगी और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा। PIB की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग ₹23,000 करोड़ (निर्माण लागत) रही है, जो भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण है। Rafale-M के सफल परीक्षण के बाद अब नौसेना इन विमानों को पूरी तरह से कार्यशील करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगी।
अंततः, Rafale-M और INS Vikrant का यह मिलन केवल दो मशीनों का जुड़ाव नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और आधुनिक तकनीक अपनाने की क्षमता का प्रदर्शन है। 2028-29 में जब इन विमानों का पूरा बेड़ा भारत आएगा, तब भारतीय नौसेना विश्व की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में से एक के रूप में उभरेगी। समुद्र में शांति बनाए रखने और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए यह जोड़ी आने वाले दशकों तक भारत की रक्षक बनी रहेगी। यह सफलता भारत के रक्षा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और नौसेना के जवानों की मेहनत का परिणाम है, जो आने वाले कल के सुरक्षित भारत की नींव रखती है।


