सिलिकॉन फोटोनिक्स: तांबे के तारों से प्रकाश की गति तक डेटा ट्रांसमिशन की क्रांति
कंप्यूटर चिप्स में बिजली के बजाय प्रकाश की किरणों से डेटा ट्रांसफर करने वाली सिलिकॉन फोटोनिक्स तकनीक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक नई क्रांति ला रही है।

आज के समय में डिजिटल डेटा की मांग चक्रवृद्धि दर से बढ़ रही है। कंप्यूटर प्रोसेसर के अंदर और उसके बीच सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए अब तक तांबे (copper) के तारों का उपयोग किया जाता रहा है। लेकिन जैसे-जैसे प्रोसेसिंग गति बढ़ रही है, वैसे-वैसे तांबे के तार से बहने वाला विद्युत प्रवाह अधिक गर्मी और ऊर्जा की बर्बादी उत्पन्न करता है, जो मूर के नियम (Moore's Law) को आगे बढ़ाने में एक बड़ी बाधा बन गया है। इस समस्या के समाधान के रूप में सिलिकॉन फोटोनिक्स (Silicon Photonics) तकनीक का उद्भव हुआ है, जो सूचना के वहन के लिए इलेक्ट्रॉन्स के स्थान पर ऑप्टिकल यानी प्रकाश की किरणों का उपयोग करती है।
सिलिकॉन फोटोनिक्स एक ऐसी तकनीक है जिसमें सिलिकॉन का उपयोग ऑप्टिकल माध्यम के रूप में होता है। इस सिलिकॉन ढांचे को सब-माइक्रोमीटर (sub-micrometre) स्तर की सटीकता से तराशकर सूक्ष्म फोटोनिक घटक तैयार किए जाते हैं। सामान्यतः यह सिस्टम 1.55 माइक्रोमीटर (1.55 micrometre) की इन्फ्रारेड तरंगदैर्ध्य पर काम करता है, जो फाइबर ऑप्टिक टेलीकम्युनिकेशन में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती है। इस चिप में सिलिकॉन सामान्य तौर पर सिलिका की परत पर स्थित होता है, जिसे सिलिकॉन ऑन इंसुलेटर (Silicon on Insulator - SOI) कहा जाता है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मौजूदा सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन तकनीक का ही उपयोग करती है। सिलिकॉन पहले से ही अधिकांश इंटीग्रेटेड सर्किट का आधार होने के कारण, ऑप्टिकल और इलेक्ट्रॉनिक घटकों को एक ही माइक्रोचिप पर एकीकृत करके हाइब्रिड डिवाइस बनाना संभव हो गया है। 2006 में Intel के तत्कालीन सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पैट गेंसिंगर (Pat Gelsinger) ने कहा था कि, "आज ऑप्टिक्स एक विशिष्ट तकनीक है, लेकिन कल यह हमारे द्वारा बनाई जाने वाली प्रत्येक चिप का मुख्य प्रवाह बनेगी।" इस क्षेत्र में IBM और Intel जैसी बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनियां भारी शोध कर रही हैं।

मॉडुलेशन से डिटेक्शन: यह सिस्टम कैसे काम करता है?
ऑप्टिकल कनेक्शन में सूचना पहुँचाने के लिए सबसे पहले डेटा को इलेक्ट्रिकल क्षेत्र से ऑप्टिकल यानी प्रकाश क्षेत्र में बदलना पड़ता है। यह काम इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल मॉडुलेटर (electro-optic modulator) या सीधे मॉड्युलेट होने वाले लेज़र द्वारा होता है। मॉडुलेटर प्रकाश की तीव्रता या उसके फेज (phase) में परिवर्तन करके डेटा कोड करता है। सिलिकॉन फोटोनिक्स में, मॉडुलेशन प्राप्त करने के लिए फ्री चार्ज कैरियर्स (free charge carriers) का घनत्व बदला जाता है।
इलेक्ट्रॉन और होल (hole) की घनत्व में होने वाले परिवर्तन सिलिकॉन के वक्रीभवानांक (refractive index) के वास्तविक और काल्पनिक भाग में बदलाव लाते हैं, जो सोरेफ और बेनेट के अनुभवजन्य समीकरणों (Soref and Bennett empirical equations) द्वारा दर्शाए जाते हैं। इन मॉड्यूलेटर्स में फॉरवर्ड-बायस्ड PIN डायोड हो सकता है, जो बड़ा फेज-शिफ्ट देता है पर गति धीमी होती है, या रिवर्स-बायस्ड p–n जंक्शन हो सकता है। इसके अलावा माच-ज़ेहंडर इंटरफेरोमीटर (Mach-Zehnder interferometers - MZIs) जैसे गैर-रेजोनेंट मॉड्यूलेटर मिलीमीटर आकार के होते हैं और टेलीकॉम में उपयोग होते हैं, जबकि रिंग-रेज़ोनेटर (ring-resonators) जैसे रेजोनेंट उपकरण केवल दस माइक्रोमीटर आकार के होते हैं।
रीसीवर पक्ष पर, ऑप्टिकल सिग्नल को सेमीकंडक्टर फोटोडिटेक्टर (photodetector) द्वारा वापस इलेक्ट्रिकल डेटा में रूपांतरित किया जाता है। इसके लिए शुद्ध जर्मेनियम (Germanium) का उपयोग सबसे अधिक होता है क्योंकि इसका बैंड-गेप फोटॉन ऊर्जा से छोटा होता है। शोधकर्ताओं ने 40 Gbit/s की गति से काम कर सकने वाले सिलिकॉन-जर्मेनियम एवलांच फोटोडिटेक्टर (SiGe avalanche photodiodes) भी बनाए हैं। उसके अलावा ग्राफीन फोटोडिटेक्टर (graphene photodetectors) भी जर्मेनियम से अधिक बैंडविड्थ और कम ऊर्जा खपत देने की क्षमता रखते हैं।
Gbit/s
- १. इलेक्ट्रो-ऑप्टिक मॉड्यूलेशनइलेक्ट्रो-ऑप्टिक मॉडुलेटर या लेज़र द्वारा विद्युत सिग्नल को प्रकाश की तरंगों में रूपांतरित किया जाता है।
- २. सिलिकॉन वेवगाइड प्रसरणप्रकाश की किरणें सिलिकॉन ऑन इंसुलेटर (SOI) वेवगाइड द्वारा सब-माइक्रोकमीटर सटीकता से आगे बढ़ती हैं।
- ३. ऑप्टिकल सिग्नल रूटिंगमाच-ज़ेहंडर इंटरफेरोमीटर या रिंग-रेज़ोनेटर द्वारा प्रकाश के चरण और तीव्रता को नियंत्रित किया जाता है।
- ४. फोटोडिटेक्टर द्वारा डिसिग्नलिंगजर्मेनियम आधारित फोटोडिटेक्टर प्रकाश सिग्नल को फिर से इलेक्ट्रिकल डेटा में बदलता है।
गति और क्षमता के आंकड़े: प्रयोगशाला से वास्तविकता तक
सिलिकॉन फोटोनिक्स तकनीक में पिछले डेढ़ दशक में आश्चर्यजनक प्रगति दर्ज हुई है। 2010 में Intel ने सिलिकॉन फोटोनिक्स का उपयोग करके 50 Gbit/s का ऑप्टिकल कनेक्शन सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया था। तत्पश्चात दिसंबर 2015 में "zero-change" CMOS फोटोनिक्स दृष्टिकोण का उपयोग करके ऑप्टिकल इनपुट/आउटपुट (I/O) वाला पहला माइक्रोप्रोसेसर दर्शाया गया, जिसे फाइबर-टू-दी-प्रोसेसर (fiber-to-the-processor) कहा जाता है। यह उपकरण 45 nm SOI नोड पर आधारित था और इसकी द्वि-दिशात्मक चिप-टू-चिप लिंक 2×2.5 Gbit/s की गति से चली थी, जिसकी कुल ऊर्जा खपत केवल 16 pJ/b (पीकोजूल प्रति बिट) थी।
उत्पादन और स्केलिंग क्षेत्र में, 2012 में IBM ने घोषणा की थी कि उन्होंने 90 नैनोमीटर (90 nm) स्केल पर ऑप्टिकल घटक हासिल किए हैं जिन्हें मानक चिप निर्माण तकनीकों के साथ जोड़ा जा सकता है। सितंबर 2013 में Intel ने डेटा सेंटर सर्वर को जोड़ने के लिए केवल 5 मिलीमीटर व्यास वाले केबल पर 100 Gbit/s की गति से डेटा ट्रांसमिट करने की तकनीक की घोषणा की थी। तुलना के लिए, पारंपरिक PCI-E डेटा केबल 8 Gbit/s, नेटवर्किंग केबल 40 Gbit/s और यूएसबी (USB) का नया संस्करण 10 Gbit/s की गति देते हैं।
लंबे अंतर के टेलीकम्युनिकेशन में भी इस तकनीक ने शक्ति दिखाई है। Sandia, Kotura, NTT, Fujitsu और विभिन्न एकेडमिक संस्थानों के शोधकर्ताओं ने माइक्रोरिंग सिलिकॉन डिवाइस का उपयोग करके 80 किलोमीटर (80 km) के अंतर तक 12.5 Gbit/s की गति से डेटा पहुँचाने का प्रोटोटाइप सफलतापूर्वक चलाकर बताया था।

| वर्ष / संस्था | आधारित तकनीक | डेटा ट्रांसफर स्पीड | विशेषता / ऊर्जा खपत |
|---|---|---|---|
| २०१० (Intel) | सिलिकॉन फोटोनिक्स कनेक्शन | ५० Gbit/s | प्रारंभिक ऑप्टिकल कनेक्शन प्रोटोटाइप |
| २०१२ (IBM) | ९० nm स्केल कंपोनेंट्स | स्टैंडर्ड चिप स्केल | पारंपरिक चिप निर्माण पद्धति के साथ संगत |
| २०१५ (Zero-change CMOS) | ४५ nm SOI नोड | २ × २.५ Gbit/s | १६ pJ/b ऊर्जा खपत, फाइबर-टू-धी-प्रोसेसर |
| २०१० (Sandia/NTT/Fujitsu) | माइक्रोरिंग सिलिकॉन डिवाइस | १२.५ Gbit/s | ८० km तक लंबी दूरी का ट्रांसमिशन |
नॉन-लीनियर ऑप्टिक्स और ऑन-चिप लेज़र की चुनौतियाँ
सिलिकॉन उपकरणों से प्रकाश गुजरने पर उसमें कुछ नॉन-लीनियर (nonlinear) ऑप्टिकल घटनाएँ देखने को मिलती हैं। जिनमें केर असर (Kerr effect), रमन असर (Raman effect), टू-फोटोन एब्जॉर्प्शन (two-photon absorption) और फ्री चार्ज कैरियर्स के बीच की अंतःक्रिया मुख्य हैं। इन नॉन-लीनियर गुणों के कारण प्रकाश ही प्रकाश के साथ अंतःक्रिया कर सकता है, जिससे ऑल-ऑप्टिकल सिग्नल रूटिंग और वेववलेंथ कन्वर्जन जैसे कार्य सरल होते हैं। यह सॉलिटोन प्रोपेगेशन (soliton propagation) जैसी अनोखी घटनाओं को भी सपोर्ट करता है।
ऑप्टिकल कंप्यूटिंग में एक बड़ा वाद-विवाद ऑन-चिप लेजर (on-chip laser) बनाम ऑफ-चिप लेजर का है। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि चिप पर ही लेजर स्रोत होना चाहिए, जबकि अन्य लोग थर्मल (गर्मी) समस्याओं के कारण इसे बाहर रखने की सलाह देते हैं। कंप्यूटर चिप्स गर्म होती हैं और तापमान बढ़ने पर लेजर की क्वांटम कार्यक्षमता घटती है। इसके समाधान के रूप में हाइब्रिड सिलिकॉन लेजर (hybrid silicon laser) बनाए गए हैं, जिनमें सिलिकॉन को इंडियम फॉस्फाइड (Indium Phosphide) जैसे अन्य सेमीकंडक्टर के साथ जोड़ा जाता है। इसके अलावा ऑल-सिलिकॉन रमन और ब्रिलुइन (Brillouin) लेजर भी विकसित किए गए हैं।
प्रकाश संकेतों के ऑल-ऑप्टिकल स्विचिंग (all-optical switching) द्वारा ऑप्टिकल रूटर भी बनाए गए हैं। २०१३ में कैलिफोर्निया और इजराइल स्थित स्टार्टअप कंपनी Compass-EOS ने दुनिया का पहला व्यावसायिक सिलिकॉन-टू-फोटोनिक्स रूटर पेश किया था।
एआई इन्फ्रारेड, ३D इंटीग्रेशन और भविष्य की दिशा
कंप्यूटिंग की नई क्षितिज माने जाने वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) क्षेत्र में भी सिलिकॉन फोटोनिक्स क्रांति ला रहा है। पारंपरिक ट्रांजिस्टर वाले प्रोसेसरों की तुलना में ऑप्टिकल एआई इन्फर्नेस प्रोसेसर्स (AI inference processors) अत्यंत कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं। इसके लिए माच-ज़ेहण्डर इंटरफेरोमीटर्स (MZIs) को नैनोइलेक्ट्रोमेकेनिकल सिस्टम्स के साथ जोड़कर प्रकाश के फेज में फ्रैक्शनल बदलाव किया जाता है।
चिप में जगह की सीमा को दूर करने के लिए मोनोलिथिक मल्टीलेयर फोटोनिक इंटीग्रेशन (Monolithic Multilayer Photonic Integration - MPI) का उपयोग किया जाता है। ऑप्टिकल वेवगाइड का आकार सैकड़ों नैनोमीटर का होता है, जो ट्रांजिस्टर के आकार से बहुत बड़ा होने के कारण महंगे समकालीन CMOS नोड्स पर जगह घेरना आर्थिक रूप से किफायती नहीं होता है। ३D इंटीग्रेशन द्वारा एक ही चिप में खड़े स्तरों में (vertically stacked layers) ऑप्टिकल घटक व्यवस्थित किए जाते हैं। UCLA में बहराम जलाली (Bahram Jalali) और उनके विद्यार्थियों ने सिमॉक्स ३D स्कल्पटिंग (Simox 3D Sculpting) तकनीक विकसित की है, जिसमें ३ खड़े कपल्ड लेयर्स तक ऑप्टिकल सर्किट बनाए जा सकते हैं।
डेटा सेंटरों में GPU क्लस्टरों के बीच के कनेक्शन से लेकर ऑग्मेंटेड रियलिटी (AR) डिस्प्ले तक यह तकनीक फैल रही है। उदाहरण के लिए, 2015 में अमेरिकी स्टार्टअप Magic Leap ने AR डिस्प्ले के लिए सिलिकॉन फोटोनिक्स आधारित लाइट-फिल्ड चिप पर काम करने की घोषणा की थी। जैसे-जैसे AI और सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में डेटा प्रोसेसिंग की मांग बढ़ेगी, वैसे-वैसे सिलिकॉन फोटोनिक्स पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स की जगह लेकर ऑप्टिकल युग का आगमन सुनिश्चित करेगा।



