नए एविएशन नियमों के तहत एयरलाइंस अब कैंसलेशन चार्ज का विवरण अलग से दिखाएंगी
भारतीय विमानन अधिनियम के तहत नए नियम 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, सुबह 8:56 · 3 मिनट का पाठ
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केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा घोषित नए एविएशन नियमों के तहत, अब एयरलाइंस को यात्रियों को हवाई किराया दिखाते समय कैंसलेशन चार्ज और रिफंड की शर्तों को अलग से दिखाना होगा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, जिससे यात्री अब टिकट बुक करते समय सभी खर्चों की स्पष्ट जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
ये नए नियम 'भारतीय विमानन नियम, 2026' के तहत तैयार किए गए हैं, जिन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा 26 अक्टूबर को प्रस्तावित किया गया था और 31 अक्टूबर को गजट ऑफ इंडिया में प्रकाशित किया गया था। ये नियम 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे और ये 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' का स्थान लेंगे। यह कानूनी ढांचा 'भारतीय विमानन अधिनियम, 2024' के तहत तैयार किया गया है, जिसने पुराने 'एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934' को प्रतिस्थापित कर दिया है।
भारतीय विमानन अधिनियम, 2024 की प्रक्रिया में लोकसभा ने इसे 9 अगस्त, 2024 को पारित किया था और राज्यसभा ने इसे 5 दिसंबर, 2024 को मंजूरी दी थी। इस अधिनियम को 11 दिसंबर, 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और यह 1 जनवरी, 2025 से लागू हो गया था।
भारतीय विमानन नियम, 2026 के नियम 192 के अनुसार, एयरलाइंस को अपनी बुकिंग वेबसाइटों और बुक किए गए टिकटों पर यात्री द्वारा देय कुल राशि दर्शानी होगी। इस राशि के साथ पूर्ण विवरण (ब्रेक-अप) भी होना चाहिए, जिसमें किराया, टैक्स, फीस, कैंसलेशन चार्ज, रिफंड की शर्तें और अन्य किसी भी चार्ज को अलग से दिखाना आवश्यक है। यह नियम न केवल भारतीय एयरलाइंस के लिए, बल्कि भारत से, भारत की ओर या भारत से संचालित होने वाली अनुसूचित सेवाओं वाली विदेशी एयरलाइंस के लिए भी लागू होगा।
इसके अतिरिक्त, सभी एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपने टैरिफ प्रकाशित करने होंगे। इस टैरिफ का प्रारूप और पद्धति नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा निर्धारित की जाएगी, ताकि जनता में जागरूकता और पारदर्शिता लाई जा सके। भारतीय अनुसूचित एयरलाइंस को अपने टैरिफ नियामक द्वारा निर्धारित अंतराल और पद्धति के अनुसार DGCA को सबमिट करने होंगे। DGCA इन स्थानीय एयरलाइंस द्वारा निर्धारित टैरिफ की निगरानी भी करेगा।
नए नियम पूर्ववर्ती 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' के तहत प्रकटीकरण आवश्यकताओं पर आधारित हैं। पिछले नियमों में एयरलाइंस के लिए यात्रियों द्वारा देय कुल राशि और उसका विवरण जैसे किराया, टैक्स, फीस और अन्य चार्ज दिखाना आवश्यक था। हालांकि, 2026 के नए नियमों में कैंसलेशन चार्ज और रिफंड की शर्तों को भी स्पष्ट रूप से विवरण की सूची में शामिल किया गया है।
नियमों में यह भी बताया गया है कि एयरलाइंस को परिचालन लागत सहित कारकों के आधार पर टैरिफ निर्धारित करने होंगे। किसी भी असाधारण स्थिति में, केंद्र सरकार जनहित में एयरलाइंस को लिखित निर्देश दे सकती है। ऐसे निर्देश स्थिति के अनुपात में होने चाहिए और वे केवल निर्दिष्ट अवधि के लिए ही लागू रहेंगे। ये प्रावधान एयरफेयर पर कोई नियमित सीमा (कैप) नहीं लगाते हैं और न ही प्रत्येक टिकट की कीमत के लिए सरकारी मंजूरी की आवश्यकता पैदा करते हैं। इसलिए, सामान्य परिस्थितियों में एयरलाइंस स्वयं ही किराया निर्धारित करना जारी रखेंगी, लेकिन टैरिफ सबमिशन और DGCA द्वारा निगरानी की नई व्यवस्था लागू होगी।
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