हाईकोर्ट का आदेश: स्कूलों में बुलिंग और भेदभाव रोकने के लिए सख्त कार्यान्वयन जरूरी
फरीदाबाद के छात्र की मृत्यु के बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने स्कूलों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 2:21 · 4 मिनट का पाठ
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग और सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) को निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले सभी स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को सुखदेव साहा मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। इन दिशा-निर्देशों में विशेष रूप से लिंग, लिंग पहचान और यौन अभिविन्यास के आधार पर होने वाली उत्पीड़न और बुलिंग की शिकायतों को हल करने के लिए स्कूलों में आंतरिक समितियां बनाना अनिवार्य है।
यह आदेश 16 वर्षीय एक छात्र की मां द्वारा दायर याचिका के बाद आया है। यह छात्र फरीदाबाद के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ता था, जिसका 24 फरवरी, 2022 को निधन हो गया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि छात्र की कलात्मक रुचि के कारण उसके सहपाठी उसे स्त्री जैसा मानते थे, जिसके कारण उसे स्कूल परिसर में ही छात्रों के एक समूह द्वारा बुलिंग, शारीरिक और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। मां ने स्कूल अधिकारियों और हेडमिस्ट्रेस के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे और पूरे मामले की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से जांच की मांग की थी।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता ने स्कूलों में LGBTQIA+ समुदाय के छात्रों की सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश बनाने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुखदेव साहा मामले में छात्रों की मृत्यु के बढ़ते मामलों को देखते हुए पहले ही बाध्यकारी दिशा-निर्देश दिए हैं, इसलिए अलग से नए दिशा-निर्देश बनाने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वास्तविक समस्या दिशा-निर्देशों के अभाव की नहीं है, बल्कि कागज पर मौजूद दिशा-निर्देशों के कमजोर कार्यान्वयन की है। कोर्ट ने कहा कि कागज पर मौजूद दिशा-निर्देश संकट में पड़े बच्चे को बहुत कम सुरक्षा प्रदान करते हैं।
कोर्ट ने आगे कहा कि 2015 का CBSE परिपत्र उस अवधि के दौरान भी लागू था जब मृतक छात्र उत्पीड़न का शिकार हुआ था। रिकॉर्ड के अनुसार, छात्र की मां और उसके मनोवैज्ञानिक ने स्कूल को उसकी स्थिति के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था, इसके बावजूद स्कूल ने उचित कदम नहीं उठाए। अब, हाईकोर्ट ने हरियाणा शिक्षा विभाग को आदेश दिया है कि बुलिंग और उत्पीड़न की शिकायतों को तत्काल और गोपनीय तरीके से हल किया जाए। यदि किसी मामले में अपराध बनता है, तो कानून के अनुसार पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है।
CBSE को भी निर्देश दिया गया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों से वार्षिक रिपोर्ट मांगें और उनकी गहन जांच करें। यदि कोई स्कूल नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो बोर्ड के उप-नियमों के अनुसार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है ताकि भविष्य में किसी छात्र को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट का सुखदेव साहा मामला शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों से संबंधित है। इस मामले में पहले कोर्ट ने स्कूलों में सुरक्षित वातावरण प्रदान करने और किसी भी प्रकार के भेदभाव या हिंसा को रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश तैयार किए थे, जिसका उद्देश्य छात्रों के जीवन की रक्षा करना और उन्हें शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित महसूस कराना था।
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