12वीं की परीक्षा में कैलकुलेटर के उपयोग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
गणित और अकाउंटेंसी में दिव्यांग छात्रों को राहत देने वाली याचिका पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 12:12 · 4 मिनट का पाठ
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दिल्ली हाईकोर्ट ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में दिव्यांग छात्रों को सामान्य और नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य अधिकारियों से जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सोमवार और जस्टिस संजय शर्मा की पीठ ने इस मामले में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE), केंद्र सरकार, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) और 'परख' (PARAKH - नेशनल असेसमेंट सेंटर) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इन सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने और जवाब दाखिल करने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी 2027 को होगी।
विशाल दुआ और कुछ अभिभावकों द्वारा दायर इस याचिका में मांग की गई है कि, वर्तमान में केवल 'डिस्कैलकुलिया' (गणित की अवधारणाओं को समझने में असमर्थता) से पीड़ित छात्रों को मिलने वाली कैलकुलेटर की सुविधा का दायरा बढ़ाकर अन्य श्रेणियों के दिव्यांग छात्रों को भी उनकी आवश्यकतानुसार राहत दी जाए। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि गणित और अकाउंटेंसी जैसे विषयों में लंबी और जटिल गणनाएं करने के कारण छात्रों का कीमती समय बर्बाद होता है। यदि कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति मिलती है, तो छात्र हाथ से गणना करने में समय गंवाने के बजाय विषय के मुख्य कॉन्सेप्ट और अपनी समझ पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि दिसंबर 2024 में आयोजित गवर्निंग बॉडी की बैठक में CBSE ने अकाउंटेंसी की परीक्षा में कैलकुलेटर के उपयोग पर सहमति जताई थी। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 में पाठ्यक्रम समिति ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और उल्लेख किया था कि वर्तमान प्रतिबंध छात्रों पर अतिरिक्त 'कॉग्निटिव लोड' (मानसिक बोझ) डालते हैं। समिति ने इस कदम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार लंबे समय से लंबित पहल बताया था। इसके बावजूद, इस प्रस्ताव की कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है और न ही इसे लागू किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि अगस्त 2026 में अधिकारियों को इस प्रस्ताव के कार्यान्वयन के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की है कि CBSE एक विशेषज्ञ समिति का गठन करे जो गणित में कैलकुलेटर के उपयोग की जांच करे और डिस्कैलकुलिया के अलावा अन्य दिव्यांग छात्रों को भी यह छूट दे। दूसरी ओर, कोर्ट में मौजूद CBSE के वकील ने कहा कि यह मामला वर्तमान में विचाराधीन है और बोर्ड से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।
इस बीच, अन्य शैक्षणिक समाचारों में, IIT दिल्ली ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़े सुधारों की घोषणा की है। अगस्त 2026 में एक छात्र की दुखद मृत्यु के बाद, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर संस्थान अब अधिक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर की भर्ती करेगा। NDTV इंडिया के अनुसार, संस्थान अब छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देगा।
एक अलग घटना में, गुवाहाटी के असम इंजीनियरिंग कॉलेज (AEC) के हॉस्टल नंबर 7 की पानी की टंकी में एक मृत बंदर का शव मिला, जिससे 43 से 54 छात्र बीमार हो गए। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने पानी में दुर्गंध आने की शिकायत की थी और उनमें पेट दर्द, उल्टी तथा बुखार के लक्षण देखे गए थे। कुछ छात्रों को गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. अमृता गांगुली ने बताया कि टंकी की सफाई कर दी गई है और मेस को अन्य हॉस्टलों में स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. प्रणब ज्योति बैश्या ने पुष्टि की कि 54 छात्रों का इलाज किया गया। इस घटना के कारण छात्रों की आगामी CAT परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ी थीं।
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