अमेरिका और यूरोप के नियामकों ने भारत की छह फार्मा फैक्ट्रियों में गंभीर खामियां पाईं
केंद्र सरकार अब गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर लाइसेंस तत्काल रद्द करने के लिए नियमों में संशोधन करेगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 8:08 · 3 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
भारतीय दवा उद्योग की गुणवत्ता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हुए हैं। अमेरिका और यूरोप के दवा नियामकों ने पिछले तीन महीनों के दौरान भारत की छह दवा फैक्ट्रियों और एक जांच लैब में गुणवत्ता संबंधी गंभीर खामियां पाई हैं। इस जांच में विशेष रूप से इंजेक्शन के उत्पादन के दौरान संक्रमण रोकने की कमजोर व्यवस्था, मशीनों की सफाई में लापरवाही और जांच के रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं के बाद अब भारत सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है।
अमेरिकी दवा नियामकों ने तीन कंपनियों और एक जांच लैब को चेतावनी पत्र भेजे हैं। तेलंगाना में स्थित युज़िया फार्मा को 13 अगस्त को चेतावनी दी गई थी, क्योंकि वहां इंजेक्शन बनाते समय संक्रमण रोकने की व्यवस्था अत्यंत कमजोर पाई गई थी। दूसरी ओर, नवी मुंबई में स्थित रिलायंस लाइफ साइंसेज की फैक्ट्री में बड़ी गड़बड़ी पाई गई है। 18 अगस्त को जारी किए गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस फैक्ट्री में नमूनों की उचित जांच किए बिना ही उनके परिणामों को रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था।
गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित शूलिन फार्मा की फैक्ट्री की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। वहां जांच के दौरान गंदगी, मशीनों में जंग और पुराने रसायनों के निशान मिले थे। इन गंभीर त्रुटियों के कारण अमेरिका ने कंपनी को चेतावनी पत्र भेजने के साथ-साथ, इस कंपनी द्वारा अमेरिका भेजी जाने वाली दवाओं पर 'इंपोर्ट अलर्ट' भी लगाया है। इसके अलावा, ओरिगा रिसर्च नामक जांच लैब में भी गंभीर खामियां मिली हैं। 12 अगस्त को लैब को भेजे गए चेतावनी पत्र में बताया गया है कि नमूनों के मूल रिकॉर्ड अधूरे थे। इसके अलावा, जब जांच के परिणाम निर्धारित मानकों से अधिक आते थे, तो बिना किसी ठोस कारण के बार-बार जांच की जाती थी ताकि पहले परिणामों को खारिज किया जा सके।
यूरोप के दवा नियामकों ने भी भारत की तीन फैक्ट्रियों में गंभीर खामियां दर्ज की हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित अनंता मेडिकेयर की फैक्ट्री में सफाई, मशीनों की हालत और जांच के रिकॉर्ड में बड़ी खामियां पाई गईं। गुजरात के अहमदाबाद जिले में स्थित एक्यूलाइफ हेल्थकेयर की फैक्ट्री में मशीनों की सफाई के संबंध में गंभीर त्रुटियां पाई गई हैं। यूरोपीय रिपोर्ट में इस फैक्ट्री में एक गंभीर, आठ बड़ी और 24 अन्य खामियां दर्ज की गई हैं। तेलंगाना के सिद्दीपेट में स्थित ग्लुकेम बायोकेयर की फैक्ट्री में सफाई के बाद भी मशीनों के अंदर पानी और गंदगी के अवशेष मिले थे।
दवाओं की गुणवत्ता में ऐसी गंभीर कमी पाए जाने पर भारत सरकार अब सख्त कानूनी कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा 'औषधि नियम, 1945' में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। इस संशोधन के लागू होने के बाद, यदि किसी भी दवा निर्माता कंपनी की दवाओं में गुणवत्ता मानकों की कमी पाई जाती है, तो सरकार उस निर्माता का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर सकेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय दवा उद्योग में पारदर्शिता लाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता बनाए रखना है, ताकि वैश्विक बाजार में भारतीय दवाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।
चित्तौड़गढ़ में पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद हिंसा, 150 लोगों ने किया पथराव
मतगणना केंद्र पर हमले में दो पुलिसकर्मी घायल और वाहनों में तोड़फोड़ की गई
धनतेरस पर मुंबई के ज़वेरी बाज़ार में सोने की खरीदारी का धमधमाट
भाव बढ़ने के बावजूद ग्राहकों में सोना खरीदने के लिए भारी उत्साह देखा गया
राजस्थान के 600 पहलवानों को मिलेगा 1,100 किलो शुद्ध देसी घी
हरियाणा की तरह पहलवानों को मजबूत बनाने के लिए राजस्थान स्टेट रेसलिंग एसोसिएशन द्वारा पोषण और सुविधाओं में बढ़ोतरी