कोच्चि मर्सिडीज दुर्घटना: हाईकोर्ट ने जज की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
नाबालिग बेटे की कार दुर्घटना में दुकानदार की मौत के बाद जज के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, दोपहर 1:27 · अपडेट दोपहर 2:27 · 6 मिनट का पाठ
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केरल के कोच्चि में मर्सिडीज कार दुर्घटना में एक नाबालिग लड़के द्वारा 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199ए के तहत दर्ज मामले में जज को अग्रिम जमानत दी है। इस दुर्घटना में जज का 17 वर्षीय बेटा मर्सिडीज कार चला रहा था, जिसने एक स्कूटर सवार को जोरदार टक्कर मारी थी।
हस्टन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस कौसर एडापगाथ की सिंगल जज बेंच ने यह निर्णय दिया है। कोर्ट ने अवलोकन किया कि जांचकर्ताओं ने न्यायाधीश से चार घंटे तक पूछताछ कर ली है और वे जांच में सहयोग करेंगे। कोर्ट ने कहा कि कस्टोडियल इंटरोगेशन के लिए कोई अवकाश नहीं है और न्यायाधीश होने के नाते उन्हें संरक्षण देना आवश्यक है। पीड़ित पक्ष के वकील ने इस निर्णय का विरोध किया था और आरोप लगाया था कि इरिंजालकुडा की मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में तैनात यह जज सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।
यह दुखद घटना 25 अक्टूबर को तड़के सुबह घटी थी। टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना चेरानेल्लूर क्षेत्र के पास हुई थी। मर्सिडीज कार जो एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के नाम पर पंजीकृत थी, वह 104 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ रही थी। इस बेकाबू कार ने जयबालकृष्णन नामक 55 वर्षीय व्यक्ति के स्कूटर को पीछे से जोरदार टक्कर मारी थी, जिसके कारण उनकी घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना के समय कार की गति 200 किमी प्रति घंटे होने का भी उल्लेख है।
मृतक जयबालकृष्णन एक मैकेनिकल इंजीनियर थे जो अपने शौक के कारण कोच्चि के चित्तूर क्षेत्र में शाकाहारी भोजन का स्टॉल चलाते थे। दैनिक भास्कर के अनुसार, वे पिछले 30 वर्षों से अपनी पत्नी मंजू के साथ मिलकर यह स्टॉल चलाते थे। वे हर शाम 4 बजे दुकान खोलते थे। दुर्घटना के समय वे चित्तूर मंदिर के पास अपना स्टॉल बंद करके घर लौट रहे थे। सामान्य तौर पर वे और उनकी पत्नी स्कूटी द्वारा 20 किलोमीटर की दूरी तय करके दुकान पर पहुंचते थे, लेकिन दुर्घटना के समय उनकी पत्नी वेरिकोज वेन्स के उपचार के कारण एक सप्ताह की छुट्टी पर थीं और जयबालकृष्णन अकेले ही घर जा रहे थे।
दुर्घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ भारी विरोध हुआ था। टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने शुरुआत में नाबालिग आरोपी के खिलाफ केवल लापरवाही से वाहन चलाने और मौत का कारण बनने (धारा 106) से संबंधित हल्का मामला दर्ज किया था। इसके कारण उसे किशोर न्याय कानून (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट) के तहत तत्काल जमानत मिल गई थी। हालांकि, पीड़ित परिवार के कड़े विरोध और प्रदर्शन के बाद पुलिस ने धारा बदलकर गैर-इरादतन हत्या का मामला जोड़ा और उसे फिर से हिरासत में लिया। दैनिक भास्कर के अनुसार, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसे फिर से जमानत दे दी थी, जिससे परिवार आक्रोशित हो गया था।
मृतक जयबालकृष्णन की बेटी ने सोमवार को मीडिया के सामने कहा कि आरोपी के जज का बेटा होने के कारण पुलिस ने उसके साथ नरमी का रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें स्थानीय पुलिस पर कोई भरोसा नहीं है और पुलिस ने आरोपी को बचाने का प्रयास किया है। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगी। मृतक के रिश्तेदार जयलक्ष्मी थंकराज ने बताया कि दुर्घटना इतनी भयानक थी कि शरीर के टुकड़े हो गए थे। उन्होंने सरकार से आरोपी का पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त करने की मांग की है, क्योंकि आरोपी प्रभावशाली परिवार से है और देश छोड़कर भाग सकता है।
इस मामले में केरल सरकार और पुलिस तंत्र में भी बड़े बदलाव हुए हैं। हस्टन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने पुलिस की जांच में खामियां स्वीकार की हैं और चेरानेल्लूर पुलिस स्टेशन से जुड़े चार पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही, कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर कालीराज महेश कुमार को बदलकर उनकी जगह 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी आर. निशांतिनी की नियुक्ति की गई है। केरल के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला ने विधानसभा में स्वीकार किया कि पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में गलती हुई थी। उन्होंने बताया कि डीजीपी और एडीजीपी के हस्तक्षेप के बाद उचित धाराएं जोड़ी गई हैं और उन्होंने पुलिस को नाबालिग की जमानत रद्द कराने के लिए निर्देश दिया है।
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199ए के तहत दर्ज इस मामले में, यदि नाबालिग वाहन चलाता है तो कानून यह मान लेता है कि वाहन मालिक या अभिभावक की सहमति थी। इस धारा के तहत तीन साल तक की जेल की सजा, ₹25,000 का जुर्माना और 12 महीने के लिए वाहन का पंजीकरण रद्द करने का प्रावधान है। नाबालिग आरोपी ने पुलिस को बताया था कि उसने पहली बार कार चलाई थी और यूट्यूब से ड्राइविंग सीखी थी। दुर्घटना में मर्सिडीज कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और स्कूटर के भी टुकड़े हो गए थे। एर्नाकुलम की स्पेशल कोर्ट में शुक्रवार को नाबालिग की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई की जाएगी।
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