1 लाख शराब की बोतलों की अवैध बिक्री मामले में ED की जांच
गुरुग्राम के 'द ठेका' द्वारा 10 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई का आरोप
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:53 · अपडेट सुबह 3:45 · 3 मिनट का पाठ
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली-NCR, हरियाणा और पंजाब में 10 स्थानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई गुरुग्राम स्थित लिकर आउटलेट 'द ठेका' द्वारा विदेशी शराब की अवैध बिक्री और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के हिस्से के रूप में की गई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस सिंडिकेट द्वारा अनिवार्य होलोग्राम और ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप्स के बिना आयातित शराब की खरीद और बिक्री करने का आरोप है।
एजेंसी के अनुसार, इस ऑपरेशन के माध्यम से लगभग 1 लाख शराब की बोतलें अवैध रूप से बेची गईं। इस बिक्री के जरिए 20 से 25 प्रतिशत मुनाफा कमाया गया था, और ED के अनुमान के मुताबिक इस आपराधिक गतिविधि के जरिए 10 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की गई है।
ED के गुरुग्राम जोनल ऑफिस द्वारा 3 और 4 नवंबर 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत यह सर्च ऑपरेशन चलाया गया था। इस दौरान एजेंसी ने 11 लाख रुपये नकद, शराब की आपूर्ति से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
जांच का मुख्य केंद्र 'द ठेका' है, जो अंकुश गोयल और उनके साझेदारों के स्वामित्व में है। ED इस आउटलेट के विदेशी शराब आपूर्तिकर्ताओं, ट्रांसपोर्टरों और अन्य व्यक्तियों के साथ कथित संबंधों की जांच कर रही है, जो पहचान और ट्रैकिंग आवश्यकताओं के बिना आयातित शराब के वितरण में शामिल थे। यह छापेमारी लिकर आउटलेट से जुड़े व्यक्तियों, अनधिकृत आपूर्तिकर्ताओं और ट्रांसपोर्टरों के आवासीय और कार्यालय परिसरों में की गई थी।
यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज FIR और चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई थी। यह मामला एक्साइज अधिकारियों की एक शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें 9 दिसंबर 2025 को 'द ठेका' से होलोग्राम और ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप्स के बिना आयातित विदेशी शराब के 3,921 केस और 176 खुली बोतलें जब्त की गई थीं। इसके अलावा, ED को पता चला कि हरियाणा पुलिस ने सिंडिकेट के कुछ सदस्यों के खिलाफ नकली शराब की बिक्री के संबंध में भी FIR दर्ज की है।
जांच में सामने आया है कि शराब का आयात सरकारी मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा भारत में किया गया था। हालांकि, सिंडिकेट द्वारा 'बॉन्ड-टू-बॉन्ड' ट्रांसफर सिस्टम का दुरुपयोग किया गया, जो सीमा शुल्क (कस्टम्स) और एक्साइज ड्यूटी के तत्काल भुगतान के बिना राज्यों के बीच शराब की आवाजाही की अनुमति देता है। इसके लिए आरोपियों ने हरियाणा और गोवा/महाराष्ट्र में अलग-अलग कंपनियां बनाई थीं और आवश्यक कस्टम लाइसेंस प्राप्त किए थे।
बैंकिंग चैनलों के माध्यम से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने के बाद, माल हरियाणा के बॉन्डेड वेयरहाउस में लाया गया था। लेकिन, गोवा या महाराष्ट्र के निर्धारित वेयरहाउस में भेजने के बजाय, ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से इस माल को सीधे गुरुग्राम के लिकर आउटलेट्स में डायवर्ट कर दिया गया। इसके बाद, इस आयातित शराब को कस्टम ड्यूटी, राज्य एक्साइज टैक्स और अन्य शुल्कों का भुगतान किए बिना ग्राहकों को कानूनी स्टॉक के रूप में बेचा गया।
ED के अनुसार, 2025-2027 अवधि के लिए शराब के लाइसेंस प्राप्त करने के बाद, सिंडिकेट द्वारा मुनाफा बढ़ाने के लिए अनिवार्य होलोग्राम और ट्रैकिंग स्ट्रिप्स के बिना आयातित शराब प्राप्त करने और बेचने की रणनीति तैयार की गई थी।
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