सेबी ने करेंसी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए अंडरलाइंग एक्सपोजर की सीमा में किया संशोधन
घरेलू ग्राहकों और FPIs के लिए अब सभी करेंसी जोड़ों में एकीकृत 5 मिलियन डॉलर की सीमा निर्धारित
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 4:23 · 3 मिनट का पाठ
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भारतीय शेयर बाजार के नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने रुपये से संबंधित करेंसी डेरिवेटिव्स में रखी जा सकने वाली पोजीशन के नियमों को सख्त कर दिया है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी ने अब घरेलू ग्राहकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सभी करेंसी जोड़ों और स्टॉक एक्सचेंजों में एकीकृत 5 मिलियन डॉलर की सीमा तय की है। इस सीमा तक की पोजीशन के लिए अंडरलाइंग एक्सपोजर स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होगी।
गुरुवार को जारी एक परिपत्र में सेबी ने करेंसी डेरिवेटिव्स की पोजीशन से संबंधित मौजूदा प्रावधानों में संशोधन किया है। यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 10 अक्टूबर को घोषित संशोधित थ्रेशोल्ड सीमाओं के अनुरूप बनाने के लिए उठाया गया है। इससे पहले RBI ने रुपये से संबंधित करेंसी डेरिवेटिव एक्सपोजर के लिए 100 मिलियन डॉलर की सीमा तय की थी। नए नियमों के तहत, अब व्यक्तिगत कॉन्ट्रैक्ट्स को अलग-अलग गिनने के बजाय सभी रुपये से संबंधित करेंसी जोड़ों को एक ही एकीकृत सीमा के तहत लाया गया है।
नए ढांचे के अनुसार, घरेलू ग्राहक और FPIs किसी भी समय सभी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों और सभी करेंसी जोड़ों में नोशनल वैल्यू में 5 मिलियन डॉलर तक की लॉन्ग या शॉर्ट पोजीशन ले सकते हैं, जिसके लिए अंडरलाइंग एक्सपोजर दिखाने की आवश्यकता नहीं है। अंडरलाइंग एक्सपोजर में विदेशी मुद्रा में किए जाने वाले भुगतान या प्राप्त होने वाली राशि शामिल हो सकती है, जिसका हेजिंग करना आवश्यक हो।
FPIs के लिए इन नियमों में कुछ विशेष शर्तें रखी गई हैं। सभी एक्सचेंजों में विदेशी मुद्रा-रुपया जोड़ों के सभी कॉन्ट्रैक्ट्स में उनकी शॉर्ट पोजीशन 5 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं हो सकती। हालांकि, जो FPIs इस सीमा से अधिक लॉन्ग पोजीशन लेना चाहते हैं, उन्हें भारतीय डेट या इक्विटी सिक्योरिटीज, जिसमें इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड की यूनिट्स शामिल हैं, में अंडरलाइंग एक्सपोजर स्थापित करना होगा।
अंडरलाइंग एक्सपोजर का अर्थ है वह वास्तविक वित्तीय आवश्यकता या निवेश जो करेंसी डेरिवेटिव पोजीशन को समर्थन देता है। उदाहरण के लिए, कोई आयातक जिसे भविष्य में डॉलर में भुगतान करना हो या कोई निर्यातक जिसे विदेशी मुद्रा में राशि मिलनी हो, वे विनिमय दर के जोखिम को कम करने के लिए डेरिवेटिव्स का उपयोग कर सकते हैं।
ये संशोधित प्रावधान सेबी के 30 दिसंबर 2024 के स्टॉक एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स के लिए मास्टर सर्कुलर के तहत थ्रेशोल्ड सीमाओं को बदल देंगे। सेबी ने कहा है कि पिछले मास्टर सर्कुलर के तहत अन्य सभी आवश्यकताएं, शर्तें और नियम यथावत रहेंगे, सिवाय वहां जहां नवीनतम परिपत्र द्वारा बदलाव किया गया हो या सेबी द्वारा निर्देश दिया गया हो।
स्टॉक एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स को आवश्यक सिस्टम व्यवस्थित करने, अपने नियमों और विनियमों में जरूरी संशोधन करने और इन संशोधित प्रावधानों को स्टॉकब्रोकर्स और क्लियरिंग मेंबर्स तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। यह परिपत्र RBI द्वारा रुपये से जुड़े फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव्स के नियमों में किए गए व्यापक सुधारों के बाद आया है, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट्स के रद्दीकरण, री-बुकिंग और हेजिंग दस्तावेजों से संबंधित आवश्यकताएं भी शामिल हैं।
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