भारत के शीर्ष बी-स्कूलों में इंटर्नशिप हायरिंग में वृद्धि और स्टाइपेंड में उछाल
2026-28 बैच के छात्रों के लिए भर्ती प्रक्रिया में नए रिक्रूटर्स जुड़े
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 12:40 · अपडेट सुबह 12:54 · 3 मिनट का पाठ
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भारत के प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में इंटर्नशिप हायरिंग की प्रक्रिया एक बार फिर गति पकड़ रही है। द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिक्रूटर्स अब 2026-28 बैच के छात्रों की भर्ती के लिए समर इंटर्नशिप पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस रुझान में सबसे उल्लेखनीय बदलाव छात्रों को दिए जाने वाले स्टाइपेंड में वृद्धि है, जो उद्योगों में बढ़ती मांग और प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में यह सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। विशेष रूप से आईआईएम कलकत्ता और आईआईएम लखनऊ जैसे संस्थानों ने रिपोर्ट किया है कि उनकी भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने वाले रिक्रूटर्स की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, इन संस्थानों में औसत (median) स्टाइपेंड की राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो छात्रों के लिए आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद साबित हो रही है।
आईआईएम कोझिकोड के मामले में भी सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं। संस्थान ने नोट किया है कि इंटर्नशिप को स्थायी नौकरी में बदलने की प्रक्रिया, यानी कन्वर्जन रेट में सुधार हुआ है। इसके अलावा, प्री-प्लेसमेंट ऑफर्स (PPOs) की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि कंपनियां इंटर्नशिप के दौरान छात्रों के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं और उन्हें पूर्णकालिक कर्मचारी के रूप में रखना चाहती हैं।
भर्ती प्रक्रिया में विविधता भी देखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष कई नए रिक्रूटर्स हायरिंग प्रक्रिया से जुड़े हैं। नए क्षेत्रों और नई कंपनियों के आगमन के कारण छात्रों के लिए अवसरों का दायरा बढ़ा है, जिससे उन्हें विभिन्न उद्योगों में अपना कौशल साबित करने का मौका मिल रहा है। इन नए रिक्रूटर्स के जुड़ने से छात्रों को न केवल अधिक विकल्प मिले हैं, बल्कि विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के साथ काम करने का अनुभव भी मिल रहा है।
कुल मिलाकर, शीर्ष बी-स्कूलों में इंटर्नशिप का माहौल वर्तमान में बहुत उत्साहजनक है। रिक्रूटर्स द्वारा उच्च स्टाइपेंड की पेशकश करना और अधिक संख्या में कंपनियों का जुड़ना प्रबंधन क्षेत्र में फिर से आने वाली तेजी के संकेत हैं। विशेष रूप से 2026-28 बैच के लिए यह प्रक्रिया उद्योगों की बदलती जरूरतों और नवीन प्रतिभाओं की खोज को प्रतिबिंबित करती है।
आईआईएम (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट) भारत के प्रमुख सार्वजनिक संस्थान हैं जो प्रबंधन शिक्षा प्रदान करते हैं। ये संस्थान अपनी कठिन प्रवेश परीक्षाओं और उच्च गुणवत्ता वाले पाठ्यक्रमों के लिए जाने जाते हैं, जो हर साल उद्योगों के लिए कुशल लीडर और मैनेजर तैयार करते हैं।
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