ग्रेटर नोएडा की PNB शाखा में ₹35 करोड़ की कथित धोखाधड़ी, 5 कर्मचारी निलंबित
ऐच्छर गांव की शाखा में कई खाताधारकों का बैलेंस शून्य हुआ, पुलिस जांच शुरू
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
29 अक्टूबर 2026, सुबह 4:31 · अपडेट शाम 7:43 · 8 मिनट का पाठ
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द इकोनॉमिक टाइम्स और दैनिक भास्कर की रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में खाताधारकों के करोड़ों रुपये गायब होने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घोटाले में अनुमानित ₹30 से ₹35 करोड़ की राशि गायब होने की आशंका है, जिससे ग्राहकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इस घटना के बाद बैंक मैनेजर सहित कुल 5 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उनके स्थान पर नया स्टाफ तैनात किया गया है।
यह पूरी घटना ग्रेटर नोएडा के ऐच्छर गांव में स्थित PNB शाखा में हुई है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कई खाताधारकों ने शिकायत की है कि उनके खाते में मौजूद बैलेंस अचानक शून्य हो गया है। जिन लोगों ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई थी, उनके खाते में अब कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। इसी तरह, जिनके सेविंग्स अकाउंट में ₹3 से ₹4 लाख जैसी राशि जमा थी, उनके खाते में अब केवल ₹16 से ₹20 हजार ही बचे हैं। सबसे अधिक प्रभाव उन लोगों पर पड़ा है जिन्हें सरकारी मुआवजे के रूप में बड़ी राशि मिली थी; कुछ के खातों से ₹1 करोड़ 29 हजार जैसी पूरी राशि गायब हो गई है।
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब ऐच्छर गांव के निवासी और ट्रांसपोर्टर विनीत भाटी मंगलवार को बैंक की सेक्टर-पाई-1 शाखा के दौरे पर गए थे। विनीत भाटी 'जय शिव ट्रांसपोर्ट' नाम की फर्म चलाते हैं और बैंक में उनका करंट अकाउंट है। उन्होंने बताया कि वे म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते थे, जिसके लिए उन्होंने बैंक कर्मचारियों से संपर्क किया था। ब्रांच मैनेजर के कहने पर उन्होंने चेक और संबंधित ब्रोशर पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, इसके बाद फंड के ₹25 लाख उनके सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर करने के बजाय किसी अन्य खाते में भेज दिए गए। बैंक द्वारा बताया गया कि यह दूसरा खाता भी विनीत भाटी के नाम पर ही था, लेकिन विनीत ने स्पष्ट किया कि वह उनका खाता नहीं था। इस घटना के बाद उन्होंने बीटा-2 कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई और बैंक कर्मचारियों की जांच करने तथा उनके ₹25 लाख वापस दिलाने की मांग की।
विनीत भाटी के इस हंगामे के दौरान बैंक में मौजूद अन्य 5-6 खाताधारकों ने भी आवाज उठाई, जिससे अन्य कई खातों से राशि गायब होने का खुलासा हुआ। इस घटना से आक्रोशित ग्राहकों ने बैंक के बाहर इकट्ठा होकर 'PNB मुर्दाबाद' के नारे लगाए। पीड़ितों ने अपने एफडी के दस्तावेज दिखाए, जिनमें राशि अब शून्य दिखाई दे रही थी। 18 लोगों की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने बीटा-2 पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की है, जो इस शाखा के अधिकार क्षेत्र में आता है।
पीड़ितों की बातें सुनकर इस घोटाले की गंभीरता और अधिक स्पष्ट होती है। ब्रिजेश नामक व्यक्ति ने बताया कि नोएडा एयरपोर्ट के लिए उनकी माता की जमीन अधिग्रहित की गई थी, जिसके बदले उनके खाते में अनुमानित ₹1 करोड़ 29 लाख का मुआवजा आया था। परिवार ने इस राशि में से केवल ₹15 लाख ही निकाले थे, लेकिन अब उनके खाते से ₹1 करोड़ से अधिक की राशि गायब है और बैलेंस शून्य दिखाई दे रहा है।
एक वृद्ध ग्राहक धर्मवीर ने अपना दुखद अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके खाते में ₹17.5 लाख थे, लेकिन बैंक ने पिछले 2 वर्षों से उन्हें खाते में कोई एंट्री करने की अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी की गई है। बैंक द्वारा कभी खाता बंद कर दिया जाता था, तो कभी पैन कार्ड खराब होने की बात कही जाती थी। अक्सर आधार कार्ड का KYC कराने के लिए दबाव बनाया जाता था। जब वे कल बैंक गए, तो मैनेजर ने उन्हें दिखाया कि खाते में कुछ भी नहीं बचा है। धर्मवीर ने आगे बताया कि उनकी दादी का भी इसी बैंक में खाता है जिसमें ₹61 लाख हैं, और उन्हें संदेह है कि वह राशि भी सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा उनकी ₹2.25 लाख की एफडी भी थी।
संतोष नाम की एक वृद्ध महिला ने बताया कि उन्हें मुआवजे के रूप में ₹1 करोड़ 29 लाख मिले थे, जो बैंक के कर्मचारियों ने ले लिए। संतोष और उनकी बहन दोनों को इतना ही मुआवजा मिला था, जिसमें से कुछ रुपये निकालने के बाद अब उनके ₹1 करोड़ 18 लाख गायब हैं। संतोष ने अत्यंत भावुक होकर बताया कि उनका घर बन रहा है और उनके बच्चे किराए के मकान में रहते हैं। उनकी पुत्री बीमार थी और पति की सेवानिवृत्ति के समय मिले ₹32 लाख पुत्री के इलाज में खर्च हो गए थे, फिर भी पुत्री की मृत्यु हो गई। अब उनके पास एक भी रुपया नहीं बचा है और वे पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। जब वे बैंक में पूछताछ करने गए, तो नए आए कर्मचारी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं है।
संतोष की बहन सरोज ने बताया कि उन्हें मिले ₹1 करोड़ 29 लाख में से उन्होंने ₹10 लाख नकद निकाले थे और ₹20 लाख ट्रांसफर करवाए थे। जब वे अधिक राशि निकालने गईं, तो बैंक की महिला कर्मचारी ने उन्हें टाल दिया और कहा कि 'इतनी राशि नहीं होगी, बाद में करवा लेना'। इसके बाद जब वे दोबारा आईं, तो कर्मचारी ने कहा कि बड़ी राशि चाहिए तो 2 दिन पहले बताना होगा। सरोज ने आगे कहा कि बैंक की महिला कर्मचारी ने तो उन्हें वहां से जाने को कह दिया और कहा कि 'अगर आप बार-बार आएंगे तो हमारी नौकरी चली जाएगी, अब यहाँ मत आना'।
इसके अलावा श्रीचंद नामक व्यक्ति ने बताया कि उनकी ₹1.16 करोड़ की एफडी थी, जिसकी राशि गबन कर ली गई है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बिरौंडी, चक्रसेनपुर और आसपास के कई गांवों के लोग इस धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं। पीड़ितों की सूची में करतरी नामक व्यक्ति का नाम भी शामिल है, जिनकी दो एफडी में से क्रमशः ₹9.87 लाख और ₹6.89 लाख की हेराफेरी हुई है। अमीचंद की एफडी से ₹10.34 लाख, विजयपाल के खाते से ₹1 करोड़ से अधिक, सुभाष के खाते से ₹1 करोड़ से अधिक और संतोष के खाते से अनुमानित ₹1.18 करोड़ की राशि गायब हुई है।
इस सूची में बिजेन्द्र सिंह के खाते से ₹88 लाख और एफडी से ₹25 लाख, रणपाल के खाते से अनुमानित ₹90.43 लाख, हनीफ खान के खाते से अनुमानित ₹40 लाख, सोनू के खाते से अनुमानित ₹1.07 करोड़, जगदीश की एफडी से ₹23 लाख और सुनीता की एफडी से ₹80 लाख रुपये गायब होने की बात सामने आई है।
बैंक के अधिकारियों ने खाताधारकों को आश्वासन दिया है कि उनकी राशि गुरुवार तक उनके खाते में वापस आ जाएगी। हालांकि, यह राशि बैंक से चोरी हुई है, गायब हुई है या यह कोई डिजिटल लूट है, इस बारे में बैंक द्वारा कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है और न ही कोई स्पष्ट जानकारी दी गई है। वर्तमान में, बैंक में गंभीर लापरवाही बरतने वाले और गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों की जांच की जा रही है। पुलिस के साथ-साथ एंटी करप्शन टीम भी इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है।
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