UPI धोखाधड़ी में खोए पैसे वापस पाने के लिए RBI ने जारी किए विशेष दिशा-निर्देश
तीन कार्य दिवसों के भीतर सूचना देने पर ग्राहकों की जिम्मेदारी शून्य हो सकती है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 3:10 · 4 मिनट का पाठ
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UPI के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी में बैंक खातों से मिनटों में पैसे साफ हो सकते हैं। बैंक अधिकारी होने का दावा करने वाले ठग, फर्जी कस्टमर-केयर नंबर, भ्रामक भुगतान अनुरोध या स्क्रीन-शेयरिंग एप्लिकेशन के जरिए लोगों को ठगकर पैसे हड़प लिए जाते हैं। हालांकि, द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, UPI धोखाधड़ी का शिकार होने का मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को सारा नुकसान सहना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास एक ढांचा है जो अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के खिलाफ ग्राहकों की रक्षा करता है।
RBI के इस ढांचे के तहत कुछ मामलों में ग्राहकों की जिम्मेदारी शून्य (Zero Liability) हो सकती है। यह सुरक्षा मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करती है: धोखाधड़ी कैसे हुई, क्या ग्राहक ने अपनी गोपनीय जानकारी साझा की थी या लेनदेन को मंजूरी दी थी, और बैंक को इस बारे में कितनी जल्दी सूचित किया गया था।
यदि अनधिकृत लेनदेन बैंक की लापरवाही, धोखाधड़ी या कमी के कारण हुआ है, तो ग्राहक चाहे जब भी सूचित करे, उसकी जिम्मेदारी शून्य रहती है। इसी तरह, यदि सुरक्षा में सेंध किसी तीसरे पक्ष (Third Party) द्वारा लगाई गई हो और इसमें बैंक या ग्राहक दोनों की कोई गलती न हो, तो ग्राहक के लिए बैंक से सूचना मिलने के 3 कार्य दिवसों के भीतर रिपोर्ट करना आवश्यक है। यदि इस समय सीमा के भीतर सूचना दी जाती है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य हो सकती है।
Plutos ONE के संस्थापक और CEO रोहित महाजन समझाते हैं कि ग्राहक की जिम्मेदारी तय करने का दायित्व बैंक का है। RBI के नियमों के अनुसार, पात्र मामलों में बैंक को 10 कार्य दिवसों के भीतर अनंतिम क्रेडिट (Provisional Credit) देना चाहिए और शिकायत का निपटारा 90 दिनों के भीतर करना चाहिए।
हालांकि, यहाँ एक महत्वपूर्ण शर्त है। यदि कोई ठग बैंक प्रतिनिधि होने का ढोंग करके खाते के सत्यापन के लिए कहता है और ग्राहक स्वयं UPI पिन (UPI PIN) दर्ज करता है या भुगतान अनुरोध को मंजूरी देता है, तो बैंक इसे 'ग्राहक द्वारा अधिकृत' लेनदेन मान सकता है। Cyble के EVP मंदर पाटिल के अनुसार, जब ग्राहक जानबूझकर UPI पिन दर्ज करता है, OTP साझा करता है या भ्रामक कलेक्शन अनुरोध को मंजूरी देता है, तो बैंक इसे ग्राहक की लापरवाही के रूप में वर्गीकृत कर सकता है।
RBI के ढांचे के अनुसार, यदि नुकसान ग्राहक की लापरवाही (जैसे भुगतान क्रेडेंशियल साझा करना) के कारण हुआ है, तो बैंक को सूचित किए जाने तक का नुकसान ग्राहक को स्वयं सहना होगा। लेकिन, एक बार रिपोर्ट करने के बाद जो अतिरिक्त नुकसान होता है, उसकी जिम्मेदारी बैंक की होती है। मंदर पाटिल आगे बताते हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक हर दावे को खारिज कर सकता है। यदि लेनदेन सिस्टम की विफलता, सुरक्षा में खामी या बैंक की किसी अन्य कमी के कारण हुआ है, तो जिम्मेदारी बदल सकती है। इसलिए, प्रत्येक शिकायत की परिस्थितियों और सबूतों की जांच करना आवश्यक है।
ग्राहकों को सुरक्षा का एक बुनियादी नियम याद रखना चाहिए कि पैसे प्राप्त करने के लिए UPI पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है। पिन का उपयोग केवल आपके खाते से पैसे काटने (Debit) के लिए किया जाता है। रिफंड पाने, भुगतान प्राप्त करने या पैसे जमा हुए हैं या नहीं, इसकी जांच करने के लिए कभी भी पिन दर्ज नहीं करना चाहिए।
RBI के ग्राहक जिम्मेदारी मानकों के तहत 3 कार्य दिवसों में रिपोर्ट करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। तीसरे पक्ष की सेंधमारी के कारण हुए अनधिकृत लेनदेन के लिए तत्काल रिपोर्ट करने से आमतौर पर आपकी जिम्मेदारी शून्य हो जाती है।
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