लोन EMI चुकाने में देरी होने पर CIBIL स्कोर पर क्या असर पड़ता है
आरबीआई के नियमों और लेट किस्तें भरने से क्रेडिट स्कोर पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानें पूरी डिटेल्स।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, दोपहर 2:42 · अपडेट सुबह 10:12 · 3 मिनट का पाठ
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टीवी९ गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के अनुसार यदि किसी लोन की किस्त या ईएमआई तय तारीख के अंत तक चुकाई नहीं जाती है, तो उसे ओवरड्यू यानी बकाया माना जा सकता है। लोन की शर्तों और बैंक की लागू होने वाली नीति के आधार पर मात्र १ दिन की देरी भी लेट पेमेंट चार्ज आकर्षित कर सकती है।
कोई बैंक ग्रेस पीरियड प्रदान करेगा या नहीं, यह प्रत्येक बैंक की अलग-अलग नीतियों पर निर्भर करता है। बैंक ग्रेस पीरियड दे सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देर से भुगतान करने पर लगने वाला जुर्माना भी माफ कर दिया जाएगा। आरबीआई के नियम स्पष्ट करते हैं कि बैंक और अन्य नियंत्रित ऋणदाता मनमाने ढंग से जुर्माना नहीं लगा सकते हैं और उन्हें उचित जुर्माना राशि के साथ अपनी प्रकाशित नीतियों का पालन करना ही होगा।
जुर्माने की राशि के ऊपर फिर से ब्याज वसूलने के लिए इसे लोन की मूल राशि में नहीं जोड़ा जा सकता है। ऋणदाता क्रेडिट ब्यूरो को कब भुगतान की जानकारी भेजते हैं और पिछले भुगतानों का इतिहास कैसा है, इसके आधार पर १ दिन की देरी से क्रेडिट स्कोर पर तुरंत कोई बड़ा असर पड़े ऐसा जरूरी नहीं है।
वर्तमान समय में क्रेडिट जानकारी हर ७ दिन में और महीने के आखिरी दिन क्रेडिट ब्यूरो को भेजी जाती है। यदि ईएमआई भरने में १ मिनट की भी देरी होती है, तो क्रेडिट रिपोर्ट में अगले ७ साल तक यह बात दिखाई देगी कि ईएमआई समय पर चुकाई नहीं गई थी।
यदि देरी होने के दूसरे ही दिन ईएमआई चुका दी जाती है, तो सीबीआईसी स्कोर (CIBIL Score) पर बहुत बड़ा असर नहीं होगा, लेकिन रिपोर्ट में डिफॉल्ट के रूप में दिखने से बैंकों का रवैया बदल सकता है या भविष्य में लोन मंजूर करने में वे हिचकिचाहट महसूस कर सकते हैं।
यदि ईएमआई चुकाने में बार-बार देरी होती है, तो समय के साथ क्रेडिट रिकॉर्ड पर पड़ने वाला नकारात्मक असर बढ़ सकता है। यदि भुगतान ३० दिन से अधिक समय के लिए ओवरड्यू रहे, तो क्रेडिट प्रोफाइल को गंभीर नुकसान होने का जोखिम रहता है।
लागू होने वाले नियमों के तहत यदि लोन का ब्याज या मूल राशि ९० दिन से अधिक समय तक चुकाए बिना बाकी रहे, तो उस खाते को एनपीए (NPA - Non-Performing Asset) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
यदि किसी कारणवश ईएमआई छूट जाए, तो बाकी राशि जितनी जल्दी हो सके जमा करवा देनी चाहिए। बैंक खाते में पर्याप्त राशि होने के बावजूद यदि ऑटो-डेबिट भुगतान विफल हो जाए, तो उसका कारण जानने के लिए तुरंत बैंक से संपर्क करना जरूरी है।
यदि पहले से ही अंदाजा हो कि किस्त भरने में परेशानी पैदा होने वाली है, तो समय पर बैंक से बात कर लेनी चाहिए। भुगतान करने के बाद उसकी रसीद या बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित संभाल कर रखना चाहिए।
यदि क्रेडिट रिपोर्ट में कोई ईएमआई गलत तरीके से बकाया दर्शाई गई हो, तो पर्याप्त सबूत के साथ बैंक और संबंधित क्रेडिट ब्यूरो के समक्ष उसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
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