केंद्र सरकार ने चावल बिक्री का लक्ष्य दोगुना कर 50 लाख मीट्रिक टन किया
ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत चावल की मात्रा में वृद्धि, दक्षिणी राज्यों में स्टॉक सीमा में छूट
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, शाम 5:23 · 3 मिनट का पाठ
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केंद्र सरकार ने देश में चावल की कीमतों को नियंत्रित रखने और उसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पीआईबी की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) के तहत चावल की वार्षिक बिक्री का लक्ष्य 25 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन करने का निर्णय लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लिए गए इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य बाजार में चावल की आपूर्ति बढ़ाकर उपभोक्ताओं को राहत देना है। चालू वित्तीय वर्ष में 31 अक्टूबर 2026 तक ई-नीलामी के माध्यम से निजी पक्षों को 25 लाख मीट्रिक टन चावल बेचे जा चुके हैं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 11 लाख मीट्रिक टन के आंकड़े से काफी अधिक है।
इसके अलावा, सरकार ने देशभर के सभी चावल और धान व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी चेन वाले रिटेलर्स और मिलर्स के लिए स्टॉक घोषित करना अनिवार्य कर दिया है। 6 नवंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, सभी संस्थाओं को हर शुक्रवार को फूड स्टॉक पोर्टल पर अपने स्टॉक का विवरण अपडेट करना होगा। इस स्टॉक को छह श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें बासमती चावल, प्रीमियम नॉन-बासमती चावल, सामान्य नॉन-बासमती चावल, उबला हुआ चावल, टूटे हुए चावल और धान शामिल हैं। जो संस्थाएं पोर्टल पर पंजीकृत नहीं होंगी या निर्धारित स्टॉक सीमा का उल्लंघन करेंगी, उनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 6 और 7 के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दक्षिण भारत के राज्यों में चावल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को धान और चावल पर स्टॉक सीमा लगाने का अधिकार दिया है। 6 नवंबर 2026 को दी गई यह मंजूरी 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी। इन कदमों का उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी को रोककर सामान्य उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चावल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना है। केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से इन नियमों के कार्यान्वयन पर करीब से नजर रखेंगी।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने 'भारत राइस' के वितरण में भी वृद्धि की है। नाफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार जैसी एजेंसियों को अतिरिक्त मात्रा आवंटित की गई है, ताकि देश के कोने-कोने में, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में सस्ते दर पर चावल उपलब्ध कराया जा सके। इन एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे वितरण के सभी संभावित माध्यमों का उपयोग करें ताकि उपभोक्ता आसानी से चावल खरीद सकें। इन सभी नीतिगत हस्तक्षेपों का उद्देश्य देश में खाद्य सुरक्षा बनाए रखना और कीमतों में होने वाली वृद्धि को रोकना है।
ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उपयोग अनाज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। अतीत में भी सरकार ने आवश्यकतानुसार इस योजना के तहत बाजार में गेहूं और चावल की मात्रा जारी की है। इस योजना के माध्यम से भारतीय खाद्य निगम (FCI) अपने गोदामों में रखे अतिरिक्त अनाज को ई-नीलामी के जरिए बेचता है, ताकि बाजार में कमी न हो और कीमतें स्थिर रहें। सरकार की इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और बाजार में आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखना रहा है।
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