जानें किराए के मकान में मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा
नुकसान के कारण और रेंट एग्रीमेंट के आधार पर तय होगी मकान मालिक या किराएदार की जिम्मेदारी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, रात 10:40 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
जब कोई व्यक्ति अपना मकान किराए पर देता है, तो यह अपेक्षा की जाती है कि किराएदार घर की उचित देखभाल करेगा। लेकिन वास्तविकता में अक्सर यह देखा जाता है कि जब किराएदार घर खाली करके जाता है, तो दीवारों पर गहरे निशान, प्लास्टर उखड़ा हुआ, पेंट खराब या सीलन जैसी समस्याएं नजर आती हैं। ऐसी स्थिति में मकान मालिक के सामने बड़ा सवाल खड़ा होता है कि घर की मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा। क्या मकान मालिक किराएदार की सिक्योरिटी डिपॉजिट से ये पैसे काट सकता है या फिर किराएदार को अपनी जेब से यह राशि चुकानी होगी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रश्न का उत्तर मुख्य रूप से दो बातों पर आधारित है: घर को कितना नुकसान हुआ है और वह नुकसान किन कारणों से हुआ है। यदि हम दीवारों के पेंट की बात करें, तो यदि किराएदार लंबे समय तक घर में रहा हो, तो समय के साथ दीवारों का पेंट फीका पड़ना, रंग उड़ जाना या सामान्य रूप से गंदा होना एक आम बात है। कानूनी और व्यावहारिक दृष्टि से इसे 'नॉर्मल वियर एंड टियर' (सामान्य घिसावट) माना जाता है। ऐसी स्थिति में दीवारों पर फिर से पेंट कराने का खर्च आमतौर पर मकान मालिक को ही उठाना पड़ता है।
हालांकि, पेंट के मामले में अपवाद भी हैं। यदि किराएदार ने दीवारों पर जगह-जगह बड़े छेद किए हों, या बच्चों ने दीवारों पर पेन या पेंट से लिखा हो, या किराएदार की लापरवाही के कारण दीवारों को अधिक नुकसान पहुँचा हो, तो मकान मालिक मरम्मत का खर्च किराएदार से मांग सकता है। इसी तरह दीवार में दरारें पड़ने या प्लास्टर उखड़ने के संबंध में भी नियम स्पष्ट हैं। यदि घर की दीवार में अपने आप दरार आ गई हो या इमारत पुरानी होने के कारण प्लास्टर उखड़ रहा हो, तो इसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी।
लेकिन, यदि किराएदार ने दीवार में गलत तरीके से ड्रिलिंग कराई हो, भारी सामान लटकाने के लिए बड़े छेद किए हों या किसी अन्य काम के जरिए दीवार को नुकसान पहुँचाया हो, तो उसे मरम्मत का खर्च चुकाना पड़ सकता है। संक्षेप में, दीवार खराब होने का कारण क्या है, इसकी जांच करना अत्यंत आवश्यक है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट के मुद्दे पर बात करें तो, अधिकांश मकान मालिक घर किराए पर देते समय किराएदार से सिक्योरिटी डिपॉजिट लेते हैं, जो घर खाली करते समय वापस कर दिया जाता है। यदि किराएदार ने घर का सामान्य उपयोग से अधिक नुकसान किया है, तो मकान मालिक मरम्मत का उचित खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट से काट सकता है। हालांकि, मकान मालिक सामान्य घिसावट के नाम पर मनमाने ढंग से पैसे नहीं काट सकते। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मरम्मत का खर्च कितना हुआ है, उसका बिल या अन्य उचित प्रमाण रखना अधिक श्रेयस्कर है।
किराएदारों को घर खाली करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि भविष्य में विवाद न हो। पहला, घर में पहले से जो खामियां हों, उनकी तस्वीरें रखनी चाहिए। दूसरा, मकान मालिक के साथ हुए रेंट एग्रीमेंट को बहुत ध्यान से पढ़ना चाहिए। तीसरा, घर खाली करने से पहले दीवारों और घर के अन्य हिस्सों की तस्वीरें ले लेनी चाहिए। यदि कोई नुकसान हुआ हो, तो उसकी मरम्मत प्रक्रिया के बारे में मकान मालिक से पहले ही बात कर लेनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि, जब सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस मिले और यदि कोई कटौती की गई हो, तो उसका पूरा हिसाब मांगना चाहिए।
भारतीय कानून के अनुसार, मकान मालिक और किराएदार के बीच की जिम्मेदारियां रेंट एग्रीमेंट और लागू किराया कानूनों के आधार पर तय होती हैं। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 108 में मकान मालिक और किराएदार के अधिकारों और जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है। इसलिए, मरम्मत का खर्च तय करते समय रेंट एग्रीमेंट की शर्तों, नुकसान के कारण और उसकी स्थिति को देखना अनिवार्य है।
निष्कर्षतः, यदि दीवारें पुरानी होने के कारण या सामान्य उपयोग से खराब हुई हैं, तो खर्च आमतौर पर मकान मालिक उठाएगा। लेकिन यदि किराएदार की लापरवाही या गलत उपयोग से नुकसान हुआ है, तो मरम्मत का खर्च किराएदार को ही उठाना होगा।
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