झारखंड में आदिवासी नेता निशा भगत ने की आत्महत्या, सोरेन सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सोशल मीडिया पर लाइव आकर निशा भगत ने प्रशासनिक तंत्र और भू-माफियाओं पर तीखे हमले किए थे।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, शाम 4:42 · अपडेट शाम 4:54 · 3 मिनट का पाठ
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झारखंड में एक दुखद घटना सामने आई है, जिसमें आदिवासी नेता निशा भगत ने आत्महत्या कर ली है। इस आत्महत्या से पूर्व उन्होंने फेसबुक पर लाइव आकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार, स्थानीय प्रशासन और जमीन से जुड़े कुछ व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
'आज तक' की रिपोर्ट के अनुसार, निशा भगत ने अपने अंतिम फेसबुक लाइव में बताया कि वह लगातार अपने समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही थीं, लेकिन उन्हें कहीं से भी उचित सहयोग नहीं मिला। हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यदि सरकार की खामियों को उजागर करना और उनका पर्दाफाश करना अपराध है, तो उसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था और महिलाओं को अपमानित करने वाली घटनाओं के सामने वह खुद को लाचार महसूस कर रही थीं।
अपने लाइव वीडियो में निशा भगत ने जमीन से जुड़े कुछ लोगों पर भी गंभीर आरोप लगाए। प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी सुरक्षा और समस्याओं के संबंध में कई बार प्रशासन से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिली। उन्होंने विशेष रूप से अजय तिरकी का नाम लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे। इसके अलावा, उन्होंने पिथोरिया के थाना प्रभारी से फोन पर बात करने का भी उल्लेख किया, जिस दौरान उन्होंने पुलिस की कार्रवाई के प्रति अपना रोष व्यक्त किया था।
निशा भगत ने आरोप लगाया कि उनके घर में हुई चोरी के मामले में भी पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और चोरों को पकड़ने में विफल रही। उन्होंने बताया कि जो लोग उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे थे, उनके खिलाफ भी कोई कदम नहीं उठाए गए। इन सभी बातों के कारण वह अत्यधिक मानसिक तनाव में थीं और उन्होंने लाइव के दौरान अपनी गंभीर परेशानियों का जिक्र किया था।
अपने परिवार के बारे में बात करते हुए निशा भगत भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने उन्हें बहुत लाड-प्यार से पाला था, लेकिन आज उनकी इस लड़ाई के कारण माता-पिता को समाज में कई बातें सुननी पड़ रही हैं। इस बात का उन्हें बहुत दुख था। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें एक मजबूत महिला के रूप में देखते थे, लेकिन इस संघर्ष में वह अकेली पड़ गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों से उन्हें जैसी उम्मीद थी, वैसा साथ नहीं मिला और वह अपने समाज के मुद्दों के लिए अकेले लड़ रही थीं।
निशा भगत ने अपने लाइव में यह भी कहा कि वह इस तरह की परिस्थितियों को अधिक समय तक सहन नहीं कर सकती थीं। उन्होंने अपनी मौत के लिए सिस्टम और भू-माफियाओं को जिम्मेदार ठहराया।
निशा भगत झारखंड की एक जानी-मानी आदिवासी नेता थीं, जो लंबे समय से अपने समाज के हितों और जमीन के अधिकारों के लिए आवाज उठा रही थीं। वह विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय थीं और अपने समाज की समस्याओं को उठाने के लिए जानी जाती थीं। हालांकि, इस घटना ने उनके लंबे संघर्षपूर्ण जीवन का दुखद अंत कर दिया है।
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