कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में भीड़ के धक्के से हुई दुर्घटना में 19 की मौत
बारिश से बचने के लिए महिलाओं के गेट के पास इकट्ठा होने पर मची अफरा-तफरी में हुई इस दुर्घटना की पुलिस जांच जारी है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, सुबह 12:18 · अपडेट सुबह 5:41 · 4 मिनट का पाठ
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कोलकाता के चोरबागान इलाके में दुर्गा पूजा के उत्सव के दौरान एक दुखद दुर्घटना हुई है, जिसमें 19 लोगों ने जान गंवाई है। 17 अक्टूबर को शाम लगभग 7:30 बजे यह घटना हुई थी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बारिश के दौरान पंडाल में भीड़ बढ़ने और पंडाल ढहने की गलत अफवाह फैलने से मची अफरा-तफरी में यह बड़ी दुर्घटना हुई थी।
कोलकाता पुलिस के अनुसार, इस दुर्घटना का मुख्य कारण बारिश से बचने का प्रयास था। पंडाल में बारिश शुरू होते ही महिलाएं अपने कपड़े और मेकअप को बचाने के लिए बाहर निकलने वाले गेट के पास इकट्ठा हो गई थीं। इस दौरान भीड़ में अचानक बढ़ोतरी होने से लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई और वे एक-दूसरे पर गिरने लगे, जिसके कारण भीड़ में भगदड़ (स्टैम्पीड) मच गई थी। सीसीटीवी फुटेज में भी देखा गया है कि बारिश के दौरान सैकड़ों लोग एक साथ पंडाल के अंदर घुस गए थे।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पंडाल के गेट से लगभग 11 फीट की दूरी पर पहला व्यक्ति नीचे गिरा था। इस घटना के संदर्भ में पुलिस अभी विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि पंडाल में महिला स्वयंसेवकों और पुलिसकर्मियों की पर्याप्त संख्या में तैनाती थी या नहीं। इसके अलावा, भीड़ बढ़ने की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने में कोई देरी हुई थी या नहीं, इस पर भी जांच चल रही है।
इस मामले में अब तक पुलिस 9 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार किए गए लोगों में से दो व्यक्तियों पर पंडाल का एक हिस्सा ढहने की गलत घोषणा करके लोगों में अफरा-तफरी फैलाने का आरोप है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पंडाल ढहने के दावे के संबंध में कोई सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इस गलत घोषणा के कारण लोगों में घबराहट फैल गई और भीड़ में भगदड़ मच गई थी। पुलिस अब उस व्यक्ति की तलाश कर रही है जिसने यह अफवाह फैलाई थी। यह घोषणा किसने और क्यों की थी, यह जानना अभी बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है।
गिरफ्तार किए गए दो लोगों के आवाज के नमूने लेने के लिए पुलिस अदालत से अनुमति मांग सकती है। इसके साथ ही, पुलिस द्वारा पंडाल के कलाकार से भी पूछताछ की गई है। सुशांत शिबानी पाल ने यह पंडाल ‘ऑर्ब’ यानी ‘बियॉन्ड साउंड’ थीम पर तैयार किया था। इस पंडाल की कलात्मक सजावट देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच रहे थे।
सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जांच में पंडाल के आयोजकों द्वारा रखी गई निजी एजेंसी के कामकाज की भी जांच की जा रही है। एजेंसी के कर्मचारियों के पास ‘मैनपैक’ नाम के पोर्टेबल रेडियो थे, जिनका उपयोग सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं के लिए किया जाता है। ये रेडियो बैग की तरह पीठ पर लटकाए जा सकने वाले उपकरण हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के समय एजेंसी के कर्मचारी कहां थे, उन्हें भीड़ बढ़ने की जानकारी मिली थी या नहीं और यदि जानकारी मिली थी तो उन्होंने क्या कदम उठाए थे।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस दुर्घटना में भीड़ का अत्यधिक प्रमाण, घबराहट और ढांचागत विफलता के बारे में गलत घोषणा मुख्य कारण थे। विशेषज्ञों ने भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी भीड़ प्रबंधन (क्राउड मैनेजमेंट) के महत्व पर जोर दिया है। जांचकर्ता संकरे बाहर निकलने के रास्तों और अपर्याप्त सुरक्षा के उपायों जैसे विभिन्न कारकों की भी जांच कर रहे हैं।
इस पूरी घटना ने सुरक्षा और भीड़ के नियंत्रण को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है ताकि इस दुर्घटना के पीछे के सटीक कारणों को जाना जा सके और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।
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